नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 7 निजी स्कूलों को झटका, लगा एक-एक लाख का जुर्माना, तय सीमा से ज्यादा बढ़ाई फीस

फीस को लेकर स्कूल की मनमानी लगातार सामने आ रही है. इस कड़ी में गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की गई है. नियमों के उल्लंघन के चलते इन स्कूलों पर एक-एक लाख का जुर्माना लगाया गया है.   

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई स्कूलों पर लगा एक-एक लाख का जुर्माना. नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई स्कूलों पर लगा एक-एक लाख का जुर्माना.

अरुण त्यागी

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:40 AM IST

गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति (फीस रेगुलेटरी कमिटी) की बैठक में शुल्क विनियमन अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने वाले 7 प्राइवेट स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस की समीक्षा की गई. जांच में सामने आया कि 6 स्कूलों ने तय सीमा 7.23 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई, जबकि एक स्कूल ने कंपोजिट फीस के अलावा अलग से एनुअल चार्ज भी वसूला. 

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45 नोटिस किए गए थे जारी 

समिति ने बताया कि नियमों का पालन कराने के लिए पहले 45 नोटिस जारी किए गए थे. इसके बावजूद 7 स्कूलों ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 का उल्लंघन किया. 

कौन-कौन से स्कूल हैं शामिल? 

इनमें जिन स्कूलों का नाम शामिल है वह एपीजे स्कूल, सेक्टर-16, नोएडा, स्पर्श ग्लोबल स्कूल, सेक्टर-20, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-50, नोएडा, विश्व भारती स्कूल, सेक्टर-28, नोएडा, श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल, गौर सिटी, ग्रेटर नोएडा,सेंट जॉन्स स्कूल, सेक्टर-2, ग्रेटर नोएडा, बाल भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-21, नोएडा हैं. इन स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. 

कितनी बढ़ाई गई है फीस?

प्रशासन के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाई जा सकती है.  इससे अधिक फीस बढ़ाना नियमों के खिलाफ है. इसके अलावा बाल भारती पब्लिक स्कूल पर शैक्षणिक वर्ष 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट पर अपलोड न करने और कंपोजिट फीस के अलावा अलग से एनुअल चार्ज लेने के कारण भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जिला प्रशासन ने सभी निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन अधिनियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. 

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