तीन मई को हुई नीट परीक्षा के रद्द होने और सीबीआई (CBI) जांच के बीच, कल यानी 21 जून, 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा NEET-UG री-एग्जाम आयोजित हुआ. इतिहास में पहली बार भारतीय वायुसेना (IAF) की मदद से सुरक्षित तरीके से प्रश्नपत्र पहुंचाए गए. हर तरफ कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सरकार इस बार नीट एग्जाम को एकदम नीट एंड क्लीन ही रखना चाहती थी. सभी राज्य सरकारें और पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद दिखा.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा के इतने कड़े दावों के बीच 21 जून का यह री-एग्जाम कितना 'नीट और क्लीन' रहा? जब देश भर के परीक्षा केंद्रों से आई ग्राउंड रिपोर्ट्स को खंगाला गया, तो साफ हुआ कि कड़े पहरे के बावजूद परीक्षा माफिया और सॉल्वर गैंग ने एग्जाम में सेंध लगाने की पूरी कोशिश की. बिहार के लखीसराय और मुजफ्फरपुर में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा शुरू होते ही इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया.
लखीसराय में बड़ा भंडाफोड़: 5 मेडिकल छात्रों समेत 24 गिरफ्तार
21 जून को परीक्षा के दौरान सबसे सनसनीखेज मामला बिहार के लखीसराय से सामने आया. यहां पुलिस और जांच एजेंसियों ने एक बड़े 'मुन्नाभाई और सॉल्वर गैंग' के नेटवर्क को ध्वस्त किया. पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 हाई-प्रोफाइल मेडिकल और नर्सिंग छात्रों समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने और उम्मीदवारों की पहचान वेरिफाई करने के लिए तैनात की गई बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारियों को भी पुलिस ने साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है. इनका काम असली परीक्षार्थियों की जगह 'सॉल्वर्स' (स्कॉलर) को फर्जी तरीके से सीट पर बैठाना था.
मयंक कश्यप ऐसे बना 'मोहरा' और खुला पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था, लेकिन एक छोटी सी चूक से पुलिस ने पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ दीं:
बीमारी का बहाना और फर्जी एंट्री: पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) का थर्ड ईयर का MBBS छात्र मयंक कश्यप कॉलेज में चल रहे क्विज और सेमिनार से बीमारी का बहाना बनाकर गायब हुआ. वह बायोमेट्रिक कंपनी का फर्जी स्टाफ (कर्मचारी) बनकर लखीसराय के हसनपुर हाई स्कूल परीक्षा केंद्र के भीतर घुस गया.
छापेमारी और धरपकड़: पुलिस चेकिंग में सबसे पहले मयंक कश्यप ही पकड़ा गया. उसकी कड़ी पूछताछ और निशानदेही के आधार पर पुलिस ने तुरंत 'केआरके हायर सेकेंडरी स्कूल' और 'केंद्रीय विद्यालय लखीसराय' में बैक-टू-बैक छापेमारी की. वहां से 7 फर्जी परीक्षार्थियों (अभ्यर्थियों) समेत अन्य लोगों को दबोच लिया गया.
सरगना पर सीबीआई की नजर: जांच एजेंसियों के मुताबिक, गया के ANMMCH मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित राज इस पूरे गैंग का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. गौरतलब है कि 2024 के पुराने नीट पेपर लीक मामले में भी सीबीआई अर्पित राज से पहले पूछताछ कर चुकी है.
एम्स, बीएचयू और पीएमसीएच के छात्र बने 'मुन्नाभाई'
इस रैकेट की सबसे दुखद और हैरान करने वाली बात यह है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के छात्र चंद रुपयों के लालच में दूसरों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे:
पूनम कुमारी (BHU नर्सिंग छात्रा): बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की इस छात्रा को दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया.
सौरभ झा (AIIMS रायबरेली छात्र): एम्स रायबरेली का यह छात्र भी सॉल्वर के रूप में रैकेट का हिस्सा पाया गया और गिरफ्तार हुआ.
अमन अग्रवाल (मेडिकल इंटर्न, दिल्ली): दिल्ली के शाहदरा स्थित एक मेडिकल कॉलेज का यह इंटर्न भी लखीसराय में नेटवर्क के साथ पकड़ा गया.
संजीत (NMCH नर्सिंग छात्र): नालंदा मेडिकल कॉलेज (NMCH) के नर्सिंग छात्र संजीत और उसके भाई को भी पुलिस ने कस्टडी में लिया है.
मुजफ्फरपुर में 'फेक क्वेश्चन पेपर' बेचने वाले 4 दबोचे
सिर्फ सॉल्वर गैंग ही नहीं, बल्कि परीक्षा से ठीक पहले छात्रों और अभिभावकों को ठगने वाले गिरोह भी सक्रिय थे. मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस ने सोशल मीडिया पर नीट का फर्जी प्रश्नपत्र और आंसर-की बेचने का दावा करने वाले एक गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया. इनके नाम हर्ष, अमन कुमार, कन्हाई कुमार और हर्ष कनोडिया बताए गए हैं. इनके पास से तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ये टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर ठगी के लिए कर रहे थे.
फेल हुए नकल के अतरंगी पैंतरे
बिंदायका थाना क्षेत्र में सरकारी स्कूल में जयपुर की रहने वाली एक छात्रा का नीट का सेंटर आया था. एग्जाम के दौरान उसने मोबाइल से चीटिंग करने की कोशिश की. एग्जाम हॉल में मौजूद टीचर ने गतिविधियां संदिग्ध मिलने पर उसे पकड़ा. तलाशी के दौरान उसके पास मोबाइल मिला. बिंदायका थाना पुलिस ने सूचना पर पहुंचकर चीटिंग करने की कोशिश करने वाली छात्रा को राउंडअप कर लिया है. पुलिस का कहना है कि अंडर गारमेंटस में शर्ट के बटन के नीचे हुक से कनेक्ट करके मोबाइल छिपाया गया था. चीटिंग में पकड़ी छात्रा से पूछताछ करने के साथ मामले की जांच की जा रही है.
ऐसी ही कई और छिटपुट खबरें 24 घंटे के भीतर सामने आई हैं, हालांकि अभी तक कहीं से ऐसी खबर नहीं आई जिसमें ये दावा किया गया हो कि पेपर लीक हुआ है. हालांकि सॉल्वर गैंग को लेकर जरूर कयास लगाए जा रहे हैं कि ये लोग इतने शातिर हैं कि अपनी पहचान बदलकर किसी का एग्जाम दे सकते हैं, इतनी सख्ती के बावजूद ये लोग ऐसा करते पाए गए. हो सकता है कि सॉल्वर गैंग में और भी लोग इनवॉल्व हों. फिलहाल अभी जांच जारी है.
आजतक एजुकेशन डेस्क