MPSC की परीक्षाओं को लेकर पुणे में शुरू हुआ आंदोलन अब और उग्र होता जा रहा है. आयोग की कार्यप्रणाली, कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता समेत कई मुद्दों को लेकर छात्रों का गुस्सा दिखाई दे रहा है. वहीं, दूसरी तरफ छात्रों को समर्थन देने के लिए कई नेता भी आगे आए हैं. कल यानी सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी छात्रों के बीच पहुंचें. वहीं, अब खबर सामने आ रही है कि 7 या 8 अक्टूबर को राहुल गांधी भी छात्रों को समर्थन देने के लिए आंदोलन में शामिल हो सकते हैं. लेकिन इससे पहले समझ लेते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे क्या-क्या मुख्य वजहें और मांगें हैं.
तीन जगहों पर चल रहा है प्रदर्शन
बता दें कि पुणे में MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन फिलहाल तीन अलग-अलग जगहों पर चल रहा है. इन जगहों पर छात्रों की मांगें भी अलग हैं. कुछ छात्र परीक्षा में ऑब्जेक्टिव पैटर्न (MCQ) की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ डिस्क्रिप्टिव पैटर्न को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि, इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की है. इस बीच रोहित पवार ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि राहुल गांधी 7 या 8 अक्टूबर को पुणे आ सकते हैं और प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की युवा इकाई के नेता भी आंदोलन में शामिल हैं और राहुल गांधी की टीम के संपर्क में हैं. रोहित पवार ने यह भी कहा कि अगर सरकार छात्रों की मांगों पर फैसला नहीं लेती है तो आंदोलन का अगला कदम तय किया जाएगा. इसमें सड़क जाम करने या पुणे से मुंबई तक मार्च निकालने जैसे विकल्पों पर चर्चा हो सकती है.
क्या है विवाद जिसके लिए छात्रों का दिख रहा उग्र रूप?
दरअसल, छात्रों के बीच ये विवाद अचानक ही नहीं शुरू हुई बल्कि पिछले कुछ समय से अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं. मामला तब और गंभीर हुआ जब ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया. 22 मार्च, 2026 को ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा हुई थी. बाद में परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की खबर सामने आई.
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर पाया कि लीक हुए सवालों में से कई सवाल वास्तविक परीक्षा में आए थे. इसके बाद MPSC ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराने की बात कही गई थी. इसके बाद से ही छात्रों का गुस्सा 7वें आसमान पर पहुंच गया. इस मामले में छात्रों ने आयोग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए. इसी के साथ MPSC अध्यक्ष और सचिव की भूमिका को लेकर भी प्रदर्शनकारियों की नाराजगी बढ़ी.
सचिव को हटाया गया, लेकिन अध्यक्ष पर फैसला नहीं
प्रदर्शन के बीच छात्रों ने MPSC सचिव महेंद्र हरपालकर और अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हटाने की मांग की थी. सरकार ने महेंद्र हरपालकर की प्रतिनियुक्ति खत्म कर दी और उन्हें पद से हटा दिया. हालांकि, अध्यक्ष भीमनवार को हटाने की मांग अभी भी आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनी हुई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि MPSC अध्यक्ष संवैधानिक पद पर होते हैं और राज्य सरकार या राज्यपाल उन्हें सीधे नहीं हटा सकते. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत इसके लिए तय प्रक्रिया होती है जिसका पालन करना अहम होता है.
30 सितंबर को CM से हुई छात्रों की मुलाकात
इसके बाद से आंदोलन के बीच 30 सितंबर को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की. सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर कदम उठाने का आश्वासन दिया. सरकार की ओर से कहा गया कि MPSC के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी. साथ ही MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन जारी रखने और परीक्षा के तरीके में कोई बदलाव करने से पहले छात्रों और दूसरे संबंधित पक्षों से चर्चा करने की बात कही गई.
सरकार ने ग्रुप C की 3 जनवरी को होने वाली परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने, तीन साल की भर्तियों की योजना बनाने और रिटायरमेंट से खाली होने वाले पदों पर पहले से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी बात कही. उम्मीदवारों के लिए एक सिंगल कार्ड सिस्टम लाने का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि हर परीक्षा के लिए बार-बार दस्तावेज जमा न करने पड़ें. इन आश्वासनों के बाद छात्रों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था. लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद प्रदर्शन फिर तेज हो गया.
केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है छात्रों की मांग!
छात्रों की मांगें सिर्फ अध्यक्ष के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं. प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, समय पर भर्ती और खाली पदों को भरने की मांग कर रहे हैंय अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग करने वाले गुट ने 70 हजार सरकारी पदों पर भर्ती, सभी MPSC परीक्षाओं को ऑफलाइन कराने और उम्मीदवारों से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसी मांगें भी रखी हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क