पिता मुंबई के चॉल में करते हैं गुजारा, अब बेटा बनेगा डॉक्टर, मिल गई MBBS की सीट

कहते हैं न सपने क्लास नहीं देखती है. जौनपुर के महेंद्र यादव मुंबई में ऑटो चलाते हैं और अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते हैं. अब उन्हें बेटे को KGMU लखनऊ में MBBS में एडमिशन मिल गया है. 

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ऑटो चालक का बेटा बनेगा डॉक्टर. ऑटो चालक का बेटा बनेगा डॉक्टर.

चेतन गुर्जर

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

MBBS में एडमिशन के लिए अब भी प्रक्रिया चल रही है. हालांकि, आधे से ज्यादा सीटों पर एडमिशन पूरी हो चुकी है. इस बीच कोटा से एक और अच्छी खबर सामने आई है. एक बार फिर सीमित संसाधनों वाले परिवार के बेटे को डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है. उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के देवकीपुर गांव के रहने वाले प्रभात कुमार यादव ने NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), उत्तर प्रदेश के लखनऊ कैंपस में एमबीबीएस में दाखिला लिया है. प्रभात की इस सफलता के पीछे उसके पिता की करीब दो दशक की मेहनत, परिवार का सहयोग और कोटा में मिली कोचिंग का अहम योगदान रहा. 

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पिता चलाते हैं ऑटो

बता दें कि प्रभात के पिता महेंद्र कुमार यादव पिछले करीब 20 सालों से मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. परिवार से दूर मुंबई की एक छोटी चॉल में रहकर उन्होंने मेहनत की और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. वहीं, प्रभात के दादा इन्द्र बहादुर यादव, मां बंशराजी और भाई-बहन गांव में ही रहते हैं. 

प्रभात की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पिता भावुक नजर आ रहे हैं, जबकि दादा इन्द्र बहादुर यादव पोते की कामयाबी की खुशी में नाचते दिखाई दे रहे हैं. दादा का कहना है कि प्रभात ने अपनी सफलता के जरिए अपने पिता की मेहनत और त्याग को सम्मान दिया है.

गांव में पढ़ाई से कोटा तक का सफर

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प्रभात ने शुरुआती पढ़ाई अपने गांव में रहकर की. उसने कक्षा 10वीं में 89.44 प्रतिशत और 12वीं में 83.44 प्रतिशत  नंबर हासिल किए हैं. डॉक्टर बनने के लक्ष्य को लेकर वह करीब दो साल तक कोटा में रहे और एलन करियर इंस्टीट्यूट के क्लासरूम प्रोग्राम से NEET की तैयारी की. प्रभात को संस्थान की ओर से 50 प्रतिशत फीस में रियायत मिली. बची हुई फीस भी उसके पिता ने किस्तों में जमा की. पढ़ाई के दौरान रहने और खाने की व्यवस्था उसके मामा दयाराम यादव ने संभाली. सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभात ने अपनी तैयारी जारी रखी. 

दूसरे प्रयास में मिली सफलता 

NEET के पहले प्रयास में प्रभात ने 504 अंक हासिल किए थे. इसके बाद उसने अपनी कमियों पर काम करते हुए तैयारी को और मजबूत किया. NEET UG 2026 में उसने 627 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 3864 प्राप्त की. प्रभात ने पहले प्रयास गांव में रहकर ही की थी. डॉक्टर बनने की चाह में उन्होंने पहले तो दो सालों तक गांव में रहकर ही तैयारी की लेकिन फिर वह कोटा आ गए. 

सफलता से आस-पास के गांवों में भी खुशी 

प्रभात का कहना है कि उसकी सफलता में परिवार की मेहनत और एलन कोटा के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. अब वह एक अच्छा डॉक्टर बनकर अपने गांव और समाज की सेवा करना चाहता है. प्रभात की कामयाबी से देवकीपुर गांव के अलावा आसपास के करीब चार गांवों में भी उत्साह का माहौल है. ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रवासी परिवार को लगातार बधाई दे रहे हैं. 

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