मुख्यमंत्री की जांच समिति बेअसर! रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में तीसरी बार पेपर लीक

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक का सिलसिला जारी है, हाल ही में फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स विषय का पेपर लीक हुआ है. 28 कॉलेजों में हुई इस परीक्षा के बाद प्रशासन ने पुलिस जांच की मांग की है. इससे पहले भी एंटोमोलॉजी परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, जिसके कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं.

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इस यून‍िवर्स‍िटी में लगातार तीसरा पेपर लीक, अब 'जेनेटिक्स' का पर्चा भी आउट, पुलिस जांच की मांग इस यून‍िवर्स‍िटी में लगातार तीसरा पेपर लीक, अब 'जेनेटिक्स' का पर्चा भी आउट, पुलिस जांच की मांग

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • रायपुर,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में पेपर लीक का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अभी कुछ ही दिन पहले बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का पेपर व्हाट्सएप पर वायरल होने के बाद दो विषयों की परीक्षाएं रद्द की गई थीं, और अब एक और नया मामला सामने आ गया है. इस बार 'फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स' (APB-5121) का पर्चा लीक होने का आरोप लगा है. लगातार हो रही इस फजीहत के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले की पुलिस जांच कराने की मांग की है.

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28 कॉलेजों में हुई थी परीक्षा

मिली जानकारी के मुताबिक, 19 अगस्त को प्रदेश भर के 28 कृषि महाविद्यालयों में APB-5121 (फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स) विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा संपन्न होने के बाद इस पर्चे के भी लीक होने की बात सामने आई. एक के बाद एक पर्चे लीक होने से न सिर्फ विश्वविद्यालय प्रबंधन की साख दांव पर लग गई है, बल्कि हजारों छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है.

पहले भी उठ चुके हैं सवाल, 70% मैच हुआ था पर्चा

यह पहली बार नहीं है जब IGKV सुर्खियों में है. इससे पहले एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा का पर्चा व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हुआ था. जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच की, तो लीक हुए पर्चे और असली प्रश्नपत्र में करीब 70 प्रतिशत समानता पाई गई थी. मामला बिगड़ता देख आनन-फानन में दो विषयों की परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को खुद हस्तक्षेप करते हुए 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन करना पड़ा था. छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद उन परीक्षाओं को सितंबर के पहले सप्ताह में कराने का फैसला लिया गया था.

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगी पुलिस जांच

लगातार तीसरे पर्चे पर लीक का साया पड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अंदरूनी स्तर पर लीपापोती की गुंजाइश खत्म होती देख प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच की मांग करने का निर्णय लिया है.

अब सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहले से ही एक उच्चस्तरीय जांच समिति काम कर रही थी, तब सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक दोबारा कैसे हो गई? क्या विश्वविद्यालय के भीतर ही कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है जो लगातार छात्रों की मेहनत पर पानी फेर रहा है? फिलहाल छात्र संगठन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग पर अड़े हैं.

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