देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT दिल्ली) ने छात्र कल्याण और मेंटल हेल्थ के मोर्चे पर एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है. कैंपस में छात्रों के लिए एक सुरक्षित, तनावमुक्त और पारदर्शी माहौल तैयार करने के उद्देश्य से संस्थान ने कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है.
हाल ही में स्टूडेंट अफेयर्स काउंसिल (SAC) की बैठक में छात्रों के सुझावों को शामिल करते हुए एक समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार किया गया है. आइए जानते हैं कि IIT दिल्ली के इस नए रोडमैप में क्या-क्या खास बदलाव शामिल हैं.
क्यों और कैसे उठी इन सुधारों की मांग?
यह पूरा घटनाक्रम और नीतिगत बदलाव पिछले दिनों कैंपस में एक छात्र (ऋषिकेश कुमार) के असामयिक निधन के बाद सामने आया है. इस घटना के बाद संस्थान ने छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणालियों की कमियों की जांच के लिए एक बाहरी जांच समिति का गठन किया था.
दिल्ली हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता वाली इस समिति में AIIMS के वरिष्ठ विशेषज्ञ और छात्र प्रतिनिधि भी शामिल थे. समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर ही IIT दिल्ली ने इन सुधारों का खाका तैयार किया है.
IIT दिल्ली के नए सुधारों के मुख्य बिंदु
स्वतंत्र 'स्टूडेंट ग्रीवांस ओम्बुडस्पर्सन': छात्रों की शिकायतों और समस्याओं के निष्पक्ष समाधान के लिए एक स्वतंत्र ओम्बुडस्पर्सन की नियुक्ति की जाएगी.
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ: कैंपस में मनोवैज्ञानिक सहायता को और सुलभ बनाने के लिए अतिरिक्त क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों और काउंसलर की भर्ती होगी.
फैकल्टी और स्टाफ के लिए अनिवार्य 'एम्पैथी वर्कशॉप': प्रशासनिक कर्मचारियों, हॉस्टल स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों के लिए संवेदनशीलता (Empathy), सॉफ्ट स्किल्स और मेंटल हेल्थ से जुड़ी वर्कशॉप अनिवार्य कर दी गई हैं, ताकि वे छात्रों की मानसिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकें.
री-एंट्री प्रोटोकॉल: लंबी छुट्टी या ब्रेक के बाद पढ़ाई के लिए वापस लौटने वाले छात्रों के लिए एक औपचारिक और सुगम री-एंट्री प्रक्रिया लाई जाएगी ताकि उन्हें अकादमिक व मानसिक तालमेल बिठाने में मदद मिल सके.
व्यापक बाहरी समीक्षा: मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और छात्र प्रतिनिधियों से बनी एक नई बाहरी समिति संस्थान की मौजूदा वेलनेस पॉलिसी, इमरजेंसी रिस्पांस और रेफरल मैकेनिज्म की व्यापक समीक्षा करेगी.
नशा मुक्ति और जागरूकता अभियान
इन सबके अलावा, संस्थान कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों और सब्सटेंस एब्यूज (नशीले पदार्थों के सेवन) से जुड़े कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की भी योजना बना रहा है.
IIT दिल्ली के इन कदमों को शैक्षणिक संस्थानों में छात्र कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में परिसरों में छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकेगी.
आजतक एजुकेशन डेस्क