'सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा, डायरेक्टर कुर्सी छोड़ें!' IIT बॉम्बे में प्रदर्शन जारी, इस्तीफे पर अड़े छात्र

आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाते हुए डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग की है, तो वहीं इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है. पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.

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IIT Bombay Ground Report by AajTak IIT Bombay Ground Report by AajTak

मुस्तफा शेख / विद्या

  • मुंबई ,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

IIT Bombay Student Suicide Case: मुंबई के पवई स्थित देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल की मौत के बाद बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है. घटना के बाद से ही कैंपस के अंदर और बाहर विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है और आज आंदोलन का चौथा दिन है. जहां एक तरफ छात्र संगठन प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए डायरेक्टर और प्रोफेसरों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर अब सियासत भी शुरू हो गई है.

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'सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा, इस्तीफा चाहिए'

कैंपस के बाहर छात्र संगठन AISA और अन्य प्रोटेस्टर्स लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र- छात्राएं माफी से ज्यादा डायरेक्टर को कुर्सी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. मुंबई यूनिवर्सिटी में इंग्लिश लिटरेचर की छात्रा और AISA की प्रोटेस्टर सना सलीम का कहना है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर माफी मांगने से काम नहीं चलेगा.

सना ने कहा कि अपोलॉजी का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक हमें कोई ठोस बयान न मिले. हमारी मांग है कि जब तक पूरी जवाबदेही और पारदर्शिता तय नहीं होती, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा. हमें सबसे पहले डायरेक्टर और संबंधित सभी प्रोफेसरों का इस्तीफा चाहिए.

'दो महीने में दूसरी और एक साल में चौथी सुसाइड'
प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों का दावा है कि यह कोई छिटपुट या अकेली घटना नहीं है. छात्र संगठनों के मुताबिक, पिछले दो महीनों के अंदर यह दूसरी और बीते एक साल में चौथी सुसाइड की घटना है.

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AISA से जुड़ी अक्सा ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल में हुए चार मामलों में से तीन छात्र दलित बैकग्राउंड से थे. उनका कहना है कि छात्र ने अपने माता-पिता को पहले ही बताया था कि उसके साथ दलित बैकग्राउंड की वजह से भेदभाव और कास्टिज्म (जातिगत टिप्पणी) हो रहा था.

यह भी पढ़ें: साहिल की मौत पर बवाल के बीच IIT बॉम्बे ने मांगी माफी, प्रोफेसर पर भी एक्शन

वहीं दूसरे छात्रों का कहना है कि अगर क्लासरूम में कोई छात्र चीटिंग या चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते पकड़ा भी जाता है, तो आमतौर पर मार्क्स काटना या चेतावनी देना जैसे कदम उठाए जाते हैं. लेकिन सीधे एक साल के सस्पेंशन की धमकी देना बेहद कठोर और मानसिक दबाव बनाने वाला कदम है.

छात्रों की मुख्य मांगें

डीन और आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर का तुरंत इस्तीफा
कैंपस में मेंटल हेल्थ को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं और एकेडमिक प्रेशर कम किया जाए
एक इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) स्टूडेंट बॉडी का गठन हो, जो सीधे छात्रों के अधिकारों और मुद्दों पर बात कर सके

कैंपस में वीडियो वायरल, SFI को बाहर करने की उठी मांग

विरोध-प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी बॉम्बे के अंदर के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं. एक वीडियो में आईआईटी के डायरेक्टर छात्रों के बीच बैठकर उनकी मांगों को सुनते और उन पर साइन करते नजर आ रहे हैं. वहीं, कैंपस से ही आए एक अन्य वीडियो में आईआईटी के छात्र SFI संगठन के लोगों को कैंपस से बाहर जाने के लिए कहते दिख रहे हैं. 

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शिवसेना UBT ने कहा- 'मामले पर राजनीति न हो'

आईआईटी बॉम्बे में जारी इस घमासान पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आईआईटी बॉम्बे को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए.

आनंद दुबे ने कहा, 'देश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है. जब कोई बच्चा आत्महत्या करता है, तो हर किसी को उसका दर्द समझ आता है और हमारी पूरी संवेदनाएं मृत छात्र के साथ हैं. लेकिन साथ ही हमें यह भी सोचना होगा कि जिस शिक्षक या डायरेक्टर पर कार्रवाई और इस्तीफे का दबाव बनाया जा रहा है, उन पर क्या बीत रही होगी.' 

उन्होंने आगे कहा कि नकल रोकना शिक्षक और मैनेजमेंट का काम है. हमें नकल भी रोकनी है और किसी छात्र को आत्महत्या जैसे कदम से भी बचाना है. इस मामले की एसआईटी (SIT), क्राइम ब्रांच या पुलिस से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जब तक जांच का पूरा सच सामने नहीं आता, तब तक किसी पर एकतरफा दबाव बनाना या राजनीति ढूंढना ठीक नहीं है.

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