गुजरात यूनिवर्सिटी में 40 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग के आरोपों पर पूर्व कुलपति (VC) नीरजा गुप्ता ने तीखा पलटवार किया है. कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI और नेताओं द्वारा लगाए गए इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व कुलपति ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके खिलाफ एक भ्रामक, मनगढ़ंत और मलिन नैरेटिव चलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि 40 करोड़ रुपये की ग्रांट कभी आई ही नहीं.
पूर्व वीसी नीरजा गुप्ता पर आरोप लगाए गए थे कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की PMJVK (प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम) योजना के तहत मिली ग्रांट की रकम उनके पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर की गई.
इन दावों को खारिज करते हुए उन्होंने साक्ष्य प्रस्तुत किए. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के तहत 40 करोड़ रुपये की योजना मंजूर हुई थी, लेकिन पहली किस्त के तौर पर सिर्फ 16.50 करोड़ रुपये ही आए थे. इसके बाद कोई अतिरिक्त फंड जारी नहीं हुआ. यह ग्रांट 'PI PMJVK जैन मनुस्क्रिप्ट' के नाम से गुजरात यूनिवर्सिटी के आधिकारिक खाते में आई थी, न कि किसी निजी खाते में.
'पाई-पाई का हिसाब जमा, बची रकम बैंक ड्राफ्ट से सौंपी'
नीरजा गुप्ता ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी को मिले 16.50 करोड़ रुपये में से सिर्फ 1,90,80,228 रुपये ही विभिन्न कार्यों पर खर्च हुए थे.
उन्होंने बताया कि बाकी बची पूरी रकम मय ब्याज (14,59,19,772 रुपये) का बैंक ड्राफ्ट बनाकर मैंने अपने त्यागपत्र के साथ ही कुलसचिव (रजिस्ट्रार) दफ्तर के जरिए गुजरात यूनिवर्सिटी के पास जमा करवा दिया था. सारे बिल सीए (CA) ऑफिस में सुरक्षित हैं और उनका यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) तैयार कर मंत्रालय को भेजा जा रहा है. ऐसे में 40 करोड़ के मिसयूज की बात पूरी तरह तथ्यहीन है.
कंसल्टेंसी और रिसर्च पर भी दी सफाई
कुलपति रहते हुए पेड रिसर्च और कंसल्टेंसी करने के सवालों पर उन्होंने कहा कि यह किसी भी शिक्षण संस्थान के प्रमुख का राष्ट्रीय कर्तव्य होता है कि वह अपने अनुभव का लाभ देश को दे.
उन्होंने साफ किया कि सांची यूनिवर्सिटी में वीसी रहते हुए वे ICHR (इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च) का एक प्रोजेक्ट कर रही थीं. गुजरात यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर होने के बाद ICHR ने वह प्रोजेक्ट और उसकी ग्रांट भी यहीं ट्रांसफर की थी. इस तरह की कंसल्टेंसी का पद या सैलरी से कोई संबंध नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर मिलती है.
जांच कमेटी पर उठाए सवाल, निष्पक्षता की मांग
वर्तमान इन-चार्ज वाइस चांसलर द्वारा गठित जांच समिति पर नीरजा गुप्ता ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जांच टीम में शामिल दो एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) मेंबर्स पिछले 11 महीनों से उनसे असंतुष्ट चल रहे थे और कई मंचों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे. ऐसे असंतुष्ट सदस्यों को जांच कमेटी में शामिल करना निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है.
इंचार्ज वीसी से की अपील
नीरजा गुप्ता ने इन-चार्ज वीसी से अनुरोध किया कि वे किसी भ्रामक प्रचार के जाल में न आएं और पूरे मामले में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्रालय से उचित मार्गदर्शन लेकर ही निष्पक्ष कार्रवाई आगे बढ़ाएं. उन्होंने कहा कि वे हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह उपलब्ध हैं.
अतुल तिवारी