दिल्ली के स्कूलों में NCPCR गाइडलाइंस लागू, बच्चों को 'पनिशमेंट' देना पड़ेगा महंगा!

शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी के मुताबिक एनसीपीसीआर के इस निर्देश का स्कूलों में सख्ती से पालन कराया जाएगा. छात्रों को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर रोक लगाने के लिए शिक्षकों और स्कूल प्रबंधकों को जागरूक किया जाएगा. इस दंड को खत्म करने के लिए एनसीपीसीआर द्वारा तैयार किए गए दिशानिर्देशों से शिक्षकों को जागरूक किया जाएगा. 

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 30 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

दिल्ली के स्कूलों में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सभी दिशानिर्देश लागू होंगे. इसे लेकर दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को NCPCR द्वारा स्कूलों में शारीरिक दंड को खत्म करने के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है. पालन न करने पर स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के भी निर्देश हैं. 

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बताया जा रहा है कि यह आदेश हाल ही में राजधानी के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका द्वारा छात्रा को पहली मंजिल से नीचे फेंके जाने के मामले के बाद आया है. इस आदेश के तहत अब शिक्षक छात्रों के साथ किसी भी तरह की 'हिंसा' नहीं कर सकते और न ही उन्हें दंडित कर सकते हैं. अगर शिक्षक छात्र की पिटाई करते हैं तो ऐसे में शिक्षक के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी. उन्हें नौकरी से भी बर्खास्त किया जा सकता है. इन नियमों को लागू करना स्कूल की जिम्मेदारी है.

शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी के मुताबिक एनसीपीसीआर के इस निर्देश का स्कूलों में सख्ती से पालन कराया जाएगा. छात्रों को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर रोक लगाने के लिए शिक्षकों और स्कूल प्रबंधकों को जागरूक किया जाएगा. इस दंड को खत्म करने के लिए एनसीपीसीआर द्वारा तैयार किए गए दिशानिर्देशों से शिक्षकों को जागरूक किया जाएगा. 

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एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने इस बारे में कहा है कि एनसीपीसीआर ने कई साल पहले इसे लेकर दिशानिर्देश बनाए थे. इस गाइडलाइन में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि बच्चों के साथ होने वाली मारपीट या दंड देना तत्काल बंद हो. हाल ही में दिल्ली में छात्रा के साथ मारपीट के बाद एनसीपीसीआर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग को गाइडलाइन लागू करने को कहा है. 

 

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