दिल्ली के जंतर-मंतर और रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाद अब बिहार भी छात्र आंदोलन की चपेट में आ गया है. मंगलवार 18 अगस्त से राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर शिक्षक भर्ती (TRE-4) समेत कई लंबित भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में शुरू हुए इस महाआंदोलन का मकसद साफ है, TRE-4 का विज्ञापन तुरंत जारी हो, नहीं तो शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी इस्तीफा दें.
क्या हैं प्रमुख मांगें?
BPSC TRE-4 का विज्ञापन तुरंत जारी हो, जिसमें सभी विषयों और पर्याप्त रिक्तियों का उल्लेख हो.
परीक्षा सिंगल फेज में हो और ‘वन कैंडिडेट, वन रिजल्ट’ नीति लागू हो.
BSSC की लंबित परीक्षाओं (CGL-4, इंटर लेवल, BSO) में कॉन्ट्रैक्टुअल सर्विस वेटेज हटाया जाए.
लाइब्रेरियन भर्ती का नोटिफिकेशन जारी हो (जो 18 साल से अटका पड़ा है).
अन्य लंबित भर्तियों (AEDO, दारोगा, सिपाही आदि) की तारीखें जल्द घोषित हों.
परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए.
छात्र नेताओं का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने जुलाई में TRE-4 का विज्ञापन जारी करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. इसलिए अब धैर्य जवाब दे चुका है.
5 दिन का अल्टीमेटम
आंदोलनकारियों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अनशन शुरू होने के 5 दिनों के अंदर अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो विधानसभा घेराव किया जाएगा. अनशन गर्दनीबाग पर जारी रहेगा. दिलीप कुमार ने कहा कि हम कोई नई रिक्ति नहीं मांग रहे. पहले से लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए. या तो विज्ञापन निकालो, या शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो.
बता दें कि यह आंदोलन अकेला नहीं है. दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर आंदोलन और झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन की सफलता के बाद बिहार के युवा भी सड़क पर उतर आए हैं. लगभग 50 लाख अभ्यर्थी विभिन्न परीक्षाओं से प्रभावित बताए जा रहे हैं. कल 19 अगस्त को राजद भी लोक भवन मार्च निकालने वाला है, जिसमें तेजस्वी यादव शामिल होंगे.
पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक के मुद्दे पर भी विरोध होगा. गर्दनीबाग अब बिहार के युवाओं का नया मोर्चा बन चुका है. सवाल वही है जो दिल्ली और रांची में पूछा जा रहा था कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता कब आएगी और युवाओं का भविष्य कब सुरक्षित होगा? सरकार का रुख क्या होगा, यह अगले कुछ दिन तय करेंगे.
शशि भूषण कुमार