राजधानी दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शनों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है. ताजा मामला डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली का है, जहां 13 अक्टूबर की शाम को कश्मीरी गेट कैंपस में हुए एक उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है. यूनिवर्सिटी ने अनुशासनहीनता, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हाथापाई के आरोप में 10 छात्रों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
प्रॉक्टोरियल बोर्ड की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पर एक्शन
यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह फैसला प्रॉक्टोरियल बोर्ड की शुरुआती रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और 13 अक्टूबर की शाम हुई घटना के तमाम विजुअल सबूतों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है. यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि निलंबन की इस अवधि के दौरान इन सभी छात्रों के कैंपस में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी. पूरे मामले को आगे की विस्तृत जांच के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड या डिसिप्लिनरी कमेटी के पास भेज दिया गया है.
प्रशासन के आरोप: बिना अनुमति धरना और मारपीट
प्रशासन का कहना है कि छात्रों का यह समूह बिना किसी पूर्व अनुमति के कैंपस में एक अनधिकृत जगह पर बैठकर धरना-प्रदर्शन कर रहा था. आरोप है कि मंगलवार शाम करीब 7 बजे प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और वहां ड्यूटी पर तैनात महिला व पुरुष सुरक्षाकर्मियों के साथ शारीरिक हाथापाई की.
यूनिवर्सिटी ने यह भी आरोप लगाया कि जब अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने और मामले को सुलझाने की कोशिश की, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. कैंपस की सुरक्षा और शांति को खतरे में देखते हुए प्रशासन को मजबूरन पुलिस को सूचना देनी पड़ी.
'कानून और नियमों के तहत होगी निष्पक्ष जांच'
यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष है कि छात्रों की जितनी भी वैध और जायज मांगें थीं, उन्हें पहले ही हल किया जा चुका था. प्रशासन ने कड़े शब्दों में कहा कि हिंसा, तोड़फोड़, स्टाफ के साथ बदसलूकी और अकादमिक माहौल को बिगाड़ने वाली हरकतें कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. यूनिवर्सिटी अपने नियमों और स्टेट्यूट्स के मुताबिक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
आजतक एजुकेशन डेस्क