कौन हैं लक्ष्मणन मय्यप्पन? 16 साल की उम्र में बन गए यंगेस्ट CA 

16 साल 141 दिन की उम्र में दुबई के लक्ष्मणन मय्यप्पन ने अपने नाम एक बेहद शानदार रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है. बस इतना ही नहीं अपनी इस उपलब्धि के दम पर उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम शामिल करवा लिया है. उनके नाम सबसे कम उम्र के  चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का ताज सज गया है. 

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16 साल की उम्र में बन गए CA. (Image: Century Financial) 16 साल की उम्र में बन गए CA. (Image: Century Financial)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:27 AM IST

वैसे तो 16 साल की उम्र में बच्चे 10वीं या 12वीं की पढ़ाई या करियर ऑप्शन पर विचार करते हैं. लेकिन लक्ष्मणन मय्यप्पन ने इतनी कम उम्र में प्रोफेशनल अकाउंटिंग की पढ़ाई पूरी कर दुनिया को चौंका दिया है. दुबई के रहने वाले लक्ष्मणन केवल 16 साल और 141 दिन की उम्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट घोषित किया है.  उनका ये सफर कोरोना के दौरान शुरू हुआ था. तब उन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा पास की थी और केवल 15 साल के थे. तब ही लक्ष्मणन ने ACCA की पढ़ाई शुरू की और करीब 1 साल में इसे पूरा कर लिया. 

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कहां से शुरू हुई CA बनने की तैयारी ? 

लक्ष्मणन की फाइनेंस से रुचि महामारी के दौरान डेवलप हुई थी. उनकी मां खुद ACCA पास की है. जब लॉकडाउन हुआ तो उनके पास खाली समय था. इसे वेस्ट करने के बजाय उन्होंने अपनी मां से अकाउंटिंग के बेसिक कॉन्सेप्ट्स समझाने शुरू किए. इसके बाद से ही उन्हें इस फील्ड में इतनी रुचि हो गई कि वह खुद यह प्रोफेशनल क्वॉलिफिकेशन हासिल करने का फैसला कर लिया और बहुत कम समय में इसे पास कर दिखाया.

पढ़ाई के साथ बनाया करियर 

उनका सफर यहीं पर खत्म नहीं हुआ. गिनीज रिकॉर्ड बनाने के बाद लक्ष्मणन मय्यप्पन की अकादमिक सफर भी नहीं रुका. ACCA पूरा करने के बाद उन्होंने CFA (चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट) की भी डिग्री हासिल की. हाल में वह फाइनेंस में एमएससी कर रहे हैं और साथ ही दुबई के सेंचुरी फाइनेंशियल कंपनी में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम भी कर रहे हैं. 

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सीखना बेहद जरूरी

मेय्यप्पन का कहना है कि रिकॉर्ड हासिल करना उनकी पेशेवर योग्यता हासिल करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य नहीं था. यह उपलब्धि मेरे लिए बहुत मायने रखती है, लेकिन मैंने कभी भी क्वालिफिकेशन को एक दौड़ के रूप में नहीं लिया है. उन्होंने कहा कि उनका ध्यान इस बात को समझने पर है कि वित्त व्यवहार में कैसे काम करता है और ऐसे स्किल  विकसित करने पर है जो समय के साथ प्रासंगिक बने रह सकें. जब सीखने की प्रक्रिया गति के बजाय जिज्ञासा से प्रेरित होती है, तो परिणाम कहीं अधिक सार्थक होता है.

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