स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और इस ऐतिहासिक पल को पूरा देश देखता है. इस बार समारोह के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के ठीक पीछे अनुशासित मुद्रा में खड़ी भारतीय सेना की अधिकारी कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने सभी का ध्यान खींचा. ध्वजारोहण की आधिकारिक प्रक्रिया में प्रधानमंत्री की सहायता कर रहीं कैप्टन सोनिया की मौजूदगी सिर्फ एक ड्यूटी नहीं थी, बल्कि यह नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका को भी दिखाती है. आज भारतीय महिलाएं सीमा की रक्षा से लेकर देश के बड़े राष्ट्रीय समारोहों तक हर जिम्मेदारी को मजबूती से निभा रही हैं.
लाल किले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया, तो देश का ध्यान एक पल के लिए उस सैन्य अधिकारी पर भी ठहर गया, जो पूरे अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ उनके पीछे मौजूद थीं. कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की मौजूदगी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के उस दृश्य को और खास बना दिया. प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण से जुड़ी औपचारिक सैन्य प्रक्रिया में जिम्मेदारी निभातीं सोनिया सिंह सिर्फ एक अधिकारी के तौर पर नजर नहीं आईं बल्कि उस बदलते भारत की तस्वीर भी बनीं, जहां महिलाएं सेना में नेतृत्व की भूमिकाओं से लेकर देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोहों तक अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. 15 अगस्त 2026 के इस खास मौके पर जानते हैं कि लाल किले के इस सैन्य प्रोटोकॉल में उनकी भूमिका क्या थी?
कौन हैं कैप्टन सोनिया सिंह चौहान?
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त सैन्य अधिकारी हैं. वे भारतीय सेना की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अपनी योग्यता, अनुशासन और काबिलियत के दम पर हर मोर्चे पर आगे खड़ी होती हैं. स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर जब लोगों की नजर लाल किले पर टिकी हुई थी, तब कैप्टन सोनिया ने रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के संयुक्त कोऑर्डिनेशन के तहत अपनी इस जिम्मेदारी को बेहद अनुशासन के साथ पूरा किया.
क्या है लाल किले पर ध्वजारोहण का प्रोटोकॉल?
लोगों को लगता है कि लाल किले पर तिरंगा फहराना एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके पीछे सशस्त्र बलों की कड़ी मेहनत और प्रोटोकॉल होता है.
इंडा फरहान से लेकर राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी के बीच 1-1 सेकेंड का तालमेल पहले से ही तय किया जाता है.
हर साल तीनों सेनाओं में से किसी एक को इस समारोह की जिम्मेदारी मिलती है.
जो बात सबसे खास है, वह ये है कि रक्षा मंत्रालय की तरफ से चुने गए अधिकारी को ही प्रधानमंत्री के साथ मंच पर खड़े होकर ध्वज की रस्सियों, सलामी और औपचारिक प्रक्रिया को संभालने का सम्मान मिलता है.
कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने लड़कियों के मन में जगाई नई अलख
लेकिन जो तस्वीर लाल किले पर कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की वायरल हो रही है, उसने देश की लाखों लड़कियों के मन में देशभक्ति की एक नई अलख जगाई है. आज भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी केवल ऑफिस तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि देश के सबसे बड़े मौकों पर तिरंगे की शान संभालना हो तो महिलाएं हर जगह नेतृत्व कर रही हैं. कैप्टन सोनिया की इस झलक से हर बेटी के मन में बड़े सपनों को पूरा करने की एक जिद बन गई है.
कैसे बन सकती हैं सेना में अफसर?
अगर आप या आपके घर की बेटियां कैप्टन सोनिया सिंह चौहान की तरह भारतीय सेना में अफसर बनकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं, तो इसके लिए किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करें. इसके बाद स्नातक के बाद CDS (Combined Defence Services) की परीक्षा दें. अगर NCC का ‘C’ सर्टिफिकेट है तो NCC Special Entry के जरिए सीधे इंटरव्यू में शामिल हो सकती हैं. रिटन एग्जाम/शॉर्टलिस्टिंग के बाद SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट पास करना होगा. चयनित उम्मीदवारों को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में बेहद कठिन सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क