न है इंजीनियरिंग की डिग्री, फिर भी बना दी फ्लाइंग कार! कौन हैं रवि टम्टा जिन्होंने कर दिखाया ये कमाल 

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि टम्टा ने कमाल कर दिखाया है. बिना किसी इंजीनियरिंग की डिग्री के उन्होंने इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार की प्रोटोटाइप तैयार कर दी है, जिसको देख हर कोई हैरान हो रहा है. लेकिन इससे खास बात ये है कि उन्होंने केवल BA की पढ़ाई की है. चलिए जानते हैं कि यह कमाल उन्होंने कैसे किया है.    

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उत्तराखंड के रवि टम्टा ने बिना इंजीनियरिंग डिग्री के इलेक्ट्रिक उड़ने वाली कार बनाई. उत्तराखंड के रवि टम्टा ने बिना इंजीनियरिंग डिग्री के इलेक्ट्रिक उड़ने वाली कार बनाई.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

किसी नए आइडिया पर काम करने के लिए क्या इंजीनियरिंग की डिग्री होना जरूरी है? क्या बिना किसी बड़े संस्थान में पढ़े भी तकनीक के क्षेत्र में कुछ नया किया जा सकता है? उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि टम्टा की कहानी इन सवालों पर सोचने को मजबूर करती है. BA की पढ़ाई कर चुके रवि ने ऑनलाइन मौजूज जानकारी, खुद की कोशिशों और लगातार प्रयोगों के जरिए इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है. उनकी कहानी बताती है कि केवल बड़े संस्थानों से पढ़ाई और किताबों की डिग्रियां सफलता की गारंटी नहीं करती है.  

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हालांकि, उनकी कहानी का मतलब यह नहीं है कि तकनीकी शिक्षा की जरूरत नहीं है. बल्कि यह बताती है कि सीखने की इच्छा, प्रैक्टिकल अनुभव और सही दिशा में मेहनत किसी नए आइडिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

कहां से की पढ़ाई? 

बता दें कि रवि की शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने नैनीताल कैंपस से बीए की डिग्री हासिल की है. उनके पिता हरीश राम पेशे से मैकेनिक हैं. परिवार में तकनीक से जुड़ा कोई बड़ा आधार नहीं था, फिर भी रवि ने अपनी तकनीकी क्षेत्र की रुचि को आगे बढ़ाया. उन्होंने इंटरनेट के जरिए नई चीजें सीखीं और लगातार प्रयोग करके अपने आइडिया को धीरे-धीरे शेप दिया. 

फ्लाइंग व्हीकल बनाने से पहले भी रवि कई अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं. उनकी बनाई चीजों में मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्मार्ट छड़ी, बांस काटने वाली मशीन और वन विभाग के लिए आग बुझाने समेत कई उपकरण शामिल हैं.

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फिलहाल, उनके फ्लाइंग व्हीकल को आम इस्तेमाल में लाने से पहले जरूरी तकनीकी जांच और नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बावजूद रवि का सफर दिखाता है कि किसी समस्या का हल खोजने की लगन इंसान को नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है.

बीए की पढ़ाई के बाद फ्लाइंग व्हीकल बनाने का सफर

रवि टम्टा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कफलीखान गांव के रहने वाले हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बीए की पढ़ाई की है. उन्हें इसका आइडिया लोगों के परेशानियों को देखकर आया. पहाड़ी इलाकों में लंबी और घुमावदार सड़के होने की वजह से आने-जाने में होने वाली मुश्किलों ने उन्हें उड़ने वाले वाहन के डायरेक्शन में सोचने के लिए प्रेरित किया.

रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने साल 2015 में इस आइडिया पर काम करना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर मौजूद जानकारियों और अपने प्रयोगों के सहारे तकनीक को समझने की कोशिश की. उनके प्रोजेक्ट का नाम HAPIDA SKYNeX है, जो एक सिंगल सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप है, जिसमें ड्रोन जैसी कई मोटर और प्रोपेलर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.

इस वाहन की टेस्ट फ्लाइट अगस्त 2026 में हुई थी. हालांकि, टेस्ट फ्लाइट पूरा होना और किसी वाहन का आम लोगों को ले जाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित व प्रमाणित होना अलग-अलग बातें हैं. इसे व्यावसायिक इस्तेमाल में लाने के लिए आगे की तकनीकी जांच और जरूरी मंजूरियों की आवश्यकता होगी.

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क्या बिना इंजीनियरिंग डिग्री के इनोवेशन संभव है?

रवि की कहानी बताती है कि नए आइडिया पर काम करने के लिए केवल एक तय शैक्षणिक रास्ता ही नहीं होता. इंटरनेट, किताबें, ऑनलाइन कोर्स, प्रैक्टिकल प्रयोग और अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लेकर भी नई चीजें सीखने की शुरुआत की जा सकती है.

लेकिन किसी तकनीकी प्रोजेक्ट को तैयार करना केवल आइडिया तक सीमित नहीं होता. खासकर फ्लाइंग व्हीकल जैसी तकनीक में डिजाइन, बैटरी की क्षमता, मोटर का प्रदर्शन, वाहन का संतुलन और सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को समझना पड़ता है. इसलिए खुद से सीखना मददगार हो सकता है, लेकिन गंभीर तकनीकी प्रोजेक्ट में विशेषज्ञों की सलाह, जांच और सुरक्षा मानकों का पालन भी जरूरी है.

छात्रों के लिए क्या है सीख?

रवि टम्टा की कहानी से छात्रों को यह सीख मिल सकती है कि पढ़ाई के साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में प्रयोग करना और नई स्किल सीखना भी महत्वपूर्ण है. किसी समस्या को पहचानकर उसका समाधान खोजने की कोशिश इनोवेशन की शुरुआत हो सकती है. अगर किसी छात्र को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन डिजाइन या नई तकनीक में दिलचस्पी है, तो वह छोटे और सुरक्षित प्रोजेक्ट से शुरुआत कर सकता है. इसके लिए उपलब्ध ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधनों, स्कूल-कॉलेज की लैब, प्रोजेक्ट प्रतियोगिताओं और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का सहारा लिया जा सकता है.

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हालांकि, केवल इंटरनेट पर जानकारी देख लेना किसी तकनीक में दक्षता हासिल करने के बराबर नहीं है. सीखी गई बातों को समझना, उनका अभ्यास करना और गलतियों से सीखना भी उतना ही जरूरी है. रवि टम्टा का सफर इस बात का उदाहरण है कि सीखने की प्रक्रिया डिग्री मिलने के बाद भी जारी रह सकती है. इनोवेशन में औपचारिक शिक्षा मजबूत आधार दे सकती है, जबकि जिज्ञासा और लगातार अभ्यास नए विचारों को आकार देने में मदद कर सकते हैं.
 

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