कल्पना कीजिए... आप किसी नौकरी के इंटरव्यू के लिए ठीक 11 बजे का टाइम तय करके फोन हाथ में लिए बैठे हैं. 10:59 बजे यानी ठीक 60 सेकंड पहले कॉल आता है, आप फोन उठाते-उठाते रह जाते हैं और उधर से कॉल कट जाता है. आप तुरंत वापस कॉल करते हैं, लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं मिलता. और कुछ घंटे बाद आपको मेल आता है कि आप इंटरव्यू के लिए उपलब्ध नहीं थे, इसलिए आपको रिजेक्ट किया जाता है.
जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्कि कॉर्पोरेट जगत का वो कड़वा और खौफनाक सच है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. रेडिट के r/recruitinghell कम्युनिटी पर एक कैंडिडेट ने अपना यह दर्दनाक और हैरान कर देने वाला अनुभव साझा किया है. इस पोस्ट के सामने आते ही जॉब मार्केट की तानाशाही और HR के रवैये को लेकर यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है.
60 सेकंड का खेल और गेम ओवर!
पीड़ित कैंडिडेट ने नाम उजागर न करते हुए बताया कि उसका फोन इंटरव्यू सुबह 11:00 बजे शेड्यूल था. इंटरव्यू लेने वाले हायरिंग मैनेजर ने ठीक 11 बजे से 1 मिनट पहले यानी 10:59 बजे ही कॉल मिला दिया. कैंडिडेट के फोन में ऑटोमेटेड 'स्पैम-स्क्रीनिंग' फीचर ऑन था, जिसे आने वाले अनजान नंबर को प्रोसेस करने में 2-3 सेकंड का समय लगा. उसने तुरंत फोन उठाया, पर जैसे ही उसने स्क्रीन पर कॉल एक्सेप्ट किया, मैनेजर फोन काट चुका था! कैंडिडेट ने बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत उसी नंबर पर वापस कॉल मिलाया, लेकिन फोन सीधे 'वॉइसमेल' पर चला गया.
री-शेड्यूल की गुजारिश... पर मिला रिजेक्शन!
15 मिनट तक दूसरे कॉल का इंतजार करने के बाद कैंडिडेट ने खुद रिक्रूटर से संपर्क किया. उसने पूरी बात साफ-साफ बताई कि फोन स्पैम फिल्टर की वजह से 2 सेकंड लेट हुआ और उसने तुरंत कॉल बैक भी किया था. कैंडिडेट ने विनम्रता से रिक्वेस्ट की कि मैनेजर जब भी फ्री हों, इंटरव्यू री-शेड्यूल कर लें. लेकिन कुछ घंटे बाद जो जवाब आया, उसने कैंडिडेट के होश उड़ा दिए!
रिक्रूटर ने साफ कह दिया कि हायरिंग मैनेजर ने आपके आवेदन को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है, क्योंकि इंटरव्यू 11 बजे तय था और जब कॉल किया गया तो आप उपलब्ध नहीं थे!
कैंडिडेट का कहना है कि सिर्फ 60 सेकंड की वजह से रिजेक्ट होना बेहद निराशाजनक था, लेकिन इससे यह भी साफ हो गया कि अगर वो उस कंपनी में सिलेक्ट हो भी जाता, तो वहां का वर्क कल्चर कितना टॉक्सिक होता.
लोग बोले- यह तो बस एक बहाना है
इस पोस्ट के सामने आते ही सैकड़ों लोगों ने अपनी भड़ास निकाली और HR के इस अजीबोगरीब रवैये पर जमकर क्लास लगाई. एक यूजर ने लिखा, 'यह सिर्फ एक बहाना है. एक-एक पोस्ट के लिए उनके पास सैकड़ों आवेदन आते हैं, इसलिए वे किसी भी बचकाने तरीके से लोगों को छांटने की कोशिश करते हैं. दुखी होने की जरूरत नहीं है, सोचिए जो इंसान 60 सेकंड के लिए इतना सख्त है, उसके नीचे काम करना कितना खौफनाक होता. किस्मत ने आपको एक घटिया बॉस से बचा लिया.'
एक अन्य यूजर ने अपना गुस्सा निकालते हुए बताया कि कैसे एक रिक्रूटर ने बार-बार मीटिंग का टाइम बदला, खुद लेट कॉल किया, फोन नहीं उठाया और बाद में रिजेक्शन थमा दिया. यूजर ने लिखा, 'इन कंपनियों में बेसिक तमीज और इंसानी इज्जत नाम की चीज नहीं बची है. दुख इस बात का है कि इनके इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए इन पर कोई एक्शन नहीं होता.'
एक तीसरे यूजर ने अपना किस्सा सुनाते हुए कहा कि कैसे HR ने इंटरव्यू से 30 मिनट पहले कॉल करके तुरंत ऑनलाइन जुड़ने को कहा था. उसने सलाह दी कि जॉब मार्केट भले ही कितना खराब हो, लेकिन ऐसी जगह जाने से बेहतर है कि आप ऐसी कंपनी खोजें जहां आपको इंसान समझा जाए.
आजतक एजुकेशन डेस्क