राजनेता की छवि दिमाग में आते ही आमतौर पर भाषण, रैलियां और राजनीतिक दांव-पेच ही कौंधते हैं. लेकिन महाराष्ट्र के कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने साबित कर दिया है कि जनसेवा के साथ-साथ पढ़ाई और कुछ नया सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती.
पहले से ही मेडिकल में MBBS और MS जैसी बड़ी डिग्रियां हासिल कर चुके डॉ. शिंदे ने अब लंदन के मशहूर 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस' (LSE) में TRIUM Global Executive MBA कोर्स में एडमिशन ले लिया है.
लंदन पहुंचे सांसद, तो सोशल मीडिया (X) पर लिखी दिल छूने वाली पोस्ट
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के परिसर में अपने पहले दिन का अनुभव डॉ. श्रीकांत शिंदे ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल पर शेयर किया. LSE में स्थापित भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के सामने खड़े होकर उन्होंने एक भावुक पोस्ट लिखी:
लंदन पहुंचने के बाद सबसे पहले LSE परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने नतमस्तक होना मेरे लिए बेहद गर्व और भावुक करने वाला क्षण था. एक सदी पहले जिस युवा को भेदभाव झेलना पड़ा, उन्होंने इसी संस्थान से 'The Problem of the Rupee' पर डॉक्टरेट हासिल की और आगे चलकर देश के संविधान और RBI की नींव रखी.
उन्होंने X पर आगे लिखा कि आज भले ही मैं महाराष्ट्र से एक सांसद हूं, लेकिन इस ऐतिहासिक परिसर में मेरी प्राथमिक पहचान सिर्फ एक जिज्ञासु छात्र की है.
डॉक्टरी के बाद अब इकोनॉमी और पॉलिसी की बारी
डॉ. श्रीकांत शिंदे पेशावर रूप से ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं. उनका कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई ने उन्हें इंसानी शरीर का इलाज करना सिखाया, लेकिन अब एक जनप्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए उन्हें देश की अर्थव्यवस्था, बजट और सरकारी नीतियों की जटिलताओं को गहराई से समझना था. इसी वजह से उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU Stern), LSE और HEC पेरिस के इस जॉइंट ग्लोबल MBA प्रोग्राम को चुना है.
युवाओं और Gen-Z के लिए बड़ा मैसेज
LSE से युवाओं के नाम संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि कोई बड़ी नौकरी, पद या डिग्री मिल जाने से पढ़ाई का सफर खत्म नहीं हो जाता. आज की बदलती दुनिया में खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी है.
आजतक एजुकेशन डेस्क