नौकरी जाने की वजह हमेशा कंपनी में घाटा या कारोबार में मंदी ही नहीं होती. अब कर्मचारियों के कामकाज, उत्पादकता और प्रदर्शन का आकलन भी छंटनी के फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं. क्वालकॉम ने कर्मचारियों की सालाना समीक्षा के बाद दुनियाभर में नौकरियां घटाने की योजना बनाई है. इस फैसले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कंपनियां अब छंटनी के लिए कर्मचारियों के प्रदर्शन को भी आधार बना रही हैं?
क्वालकॉम ने बनाई नौकरियां घटाने की योजना
क्वालकॉम ने सालाना कर्मचारी समीक्षा के बाद दुनियाभर में नौकरियां कम करने की योजना बनाई है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टियानो अमोन ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा कि इस कदम का मकसद प्रदर्शन की मजबूत संस्कृति बनाना और उन क्षेत्रों में सुधार करना है, जहां कंपनी लगातार उम्मीद के मुताबिक नतीजे हासिल नहीं कर पा रही है. कर्मचारियों को नवंबर से छंटनी के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है. हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि इस फैसले से कितने कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होगी. छंटनी को लेकर फैसला करते समय कारोबारी जरूरतों, संगठन की प्राथमिकताओं और कर्मचारियों के स्किल और विशेषज्ञता पर भी विचार किया जाएगा.
ट्रेडिशनल छंटनी से कैसे अलग है प्रदर्शन आधारित छंटनी?
आमतौर पर कंपनियां खर्च कम करने, कारोबार में बदलाव या किसी विभाग की जरूरत खत्म होने पर कर्मचारियों की संख्या घटाती हैं. इसे पारंपरिक छंटनी कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में किसी कर्मचारी की नौकरी उसके प्रदर्शन के बजाय उसकी भूमिका या विभाग में बदलाव के कारण भी जा सकती है. वहीं, प्रदर्शन आधारित छंटनी में कर्मचारियों के काम, उत्पादकता, लक्ष्य पूरे करने की क्षमता और प्रदर्शन की समीक्षा को आधार बनाया जा सकता है. कंपनी यह तय कर सकती है कि किन कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखना है और किनकी जगह दूसरे लोगों को मौका देना है.
हालांकि, दोनों तरह की छंटनी के कारण एक साथ भी हो सकते हैं. किसी कंपनी में खर्च घटाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही हो, तो वह इस दौरान उनके प्रदर्शन और कौशल का आकलन भी कर सकती है.
पद बना रह सकता है, लेकिन कर्मचारी की नौकरी जा सकती है
दोनों तरीकों के बीच एक बड़ा अंतर यह है कि पारंपरिक छंटनी में किसी पद या विभाग की जरूरत खत्म हो सकती है. इसके उलट, प्रदर्शन आधारित छंटनी में पद बना रह सकता है, लेकिन कंपनी उस पर काम कर रहे कर्मचारी को बदलने का फैसला कर सकती है. मिसाल के तौर पर, अगर किसी विभाग में काम जारी है लेकिन कंपनी को लगता है कि कुछ कर्मचारियों का प्रदर्शन तय उम्मीदों के मुताबिक नहीं है, तो वह उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को रखने पर विचार कर सकती है.
हालांकि, कंपनी की ओर से प्रदर्शन का हवाला दिए जाने का यह मतलब नहीं है कि नौकरी गंवाने वाले हर कर्मचारी का प्रदर्शन खराब था. छंटनी के पीछे संगठनात्मक जरूरतें और दूसरे कारोबारी कारण भी हो सकते हैं.
कंपनियों में पहले से होता रहा है प्रदर्शन का आकलन
कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा, प्रदर्शन सुधार योजना और कर्मचारियों की रैंकिंग जैसी प्रक्रियाएं कंपनियों में लंबे समय से इस्तेमाल होती रही हैं. इनके जरिए कर्मचारियों के काम का आकलन किया जाता है और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है. अब जब कंपनियां छंटनी की वजह बताते समय प्रदर्शन और उत्पादकता का भी जिक्र कर रही हैं, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि कर्मचारी की भूमिका खत्म हो रही है या उसके काम के आकलन के आधार पर उसे हटाया जा रहा है. हालांकि, हर कंपनी की प्रक्रिया और छंटनी के कारण अलग हो सकते हैं.
सालाना आकलन से नौकरी पर बढ़ सकता है दबाव
अगर किसी कंपनी में प्रदर्शन की समीक्षा को नौकरी पर बनाए रखने के फैसले से जोड़ा जाता है, तो कर्मचारियों के लिए सालाना आकलन और तय लक्ष्यों का महत्व बढ़ सकता है. ऐसे में कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनके काम का आकलन किन मानकों पर किया जा रहा है.
यह भी जरूरी है कि कंपनियां कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दें और सभी टीमों में उचित व एक जैसे मानक अपनाएं. प्रबंधकों की राय, काम की बदलती जरूरतें और कंपनी की प्राथमिकताएं भी प्रदर्शन के आकलन को प्रभावित कर सकती हैं.
कुल मिलाकर, छंटनी के पीछे सिर्फ कारोबार में मंदी या खर्च घटाने की वजह ही नहीं हो सकती. कुछ मामलों में कर्मचारियों के प्रदर्शन और स्किल का आकलन भी फैसले का हिस्सा बन सकता है. इसलिए कर्मचारियों के लिए यह समझना अहम है कि कंपनी उनसे क्या उम्मीद करती है और उनके काम का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाता है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क