ऑफिस में अलग-अलग उम्र या एज के लोग एक साथ काम करते हैं. किसी के लिए देर तक ऑफिस में रुकना मेहनत की निशानी है, तो कोई तय वक्त पर काम खत्म करके अपनी पर्सनल लाइफ को टाइम देना चाहता है. इसी तरह, कुछ एम्प्लॉय पुराने तरीकों से काम करना पसंद करते हैं, जबकि कुछ नए तरीके अपनाने में यकीन रखते हैं. ऐसे में काम करने के तरीके को लेकर पीढ़ियों के बीच मतभेद भी सामने आते रहते है. हर दूसरे दिन कोई सोशल मीडिया पर वर्क कल्चर में आते बदलाव को लेकर अपना एक्सपीरियंस शेयर करता है.
जेन जी और मिलेनियल्स के बीच काम को देखने का नजरिया भी कई बार अलग हो सकता है. ओक इंगेज के जनवरी 2026 में जारी एक सर्वे में 26% जेन जी एम्प्लॉय ने कहा कि उनके मिलेनियल कलीग लंबे टाइम तक काम करने को नॉर्मल मानते हैं. वहीं, 22% मिलेनियल्स ने जेन जी को 'हक जताने वाला' यानी एंटाइटल्ड बताया. ये सर्वे दिखाता है कि ऑफिस में दोनों पीढ़ियों के बीच काम करने के तरीके को लेकर मतभेद हो सकते हैं.
1. देर तक ऑफिस में रुकने को मेहनत मानना
कुछ एम्प्लॉय के लिए ऑफिस में देर तक रुकना कामकी तरफ डेडीकेशन दिखाने का तरीका हो सकता है. लेकिन जेन जी के कुछ एम्प्लॉय मानते हैं कि हार्ड वर्क का फैसला ऑफिस में बिताए गए घंटों से नहीं, बल्कि काम की क्वालिटी से होना चाहिए.
ओक इंगेज के सर्वे में 26% जेन जी एम्प्लॉय ने कहा कि उनके मिलेनियल कलीग लंबे टाइम तक काम करने को नॉर्मल मानते हैं. ऐसे में अगर कोई एम्प्लॉय अपना काम टाइम पर पूरा करके घर जाना चाहता है, तो उसे कम मेहनती समझना दोनों पीढ़ियों के बीच स्ट्रेस पैदा कर सकता है.
2. हर काम में जरूरत से ज्यादा दखल देना
किसी काम का बार-बार अपडेट मांगना, हर छोटी बात पर ऑर्डर देना या एम्प्लॉय को अपने तरीके से काम नहीं करने देना कुछ लोगों को परेशान कर सकता है. खासकर तब, जब एम्प्लॉय को लगता है कि वो अपनी जिम्मेदारी खुद संभाल सकता है.
नौकरी की जनवरी 2026 में जारी 'द जेन जी वर्क कोड' रिपोर्ट 23 हजार से ज्यादा जेन जी प्रोफेशनल्स के सर्वे पर बेस्ड है. इसके मुताबिक, माइक्रोमैनेजिंग बॉस यानी हर छोटी बात पर नजर रखने वाले बॉस को स्ट्रेस की बड़ी वजह मानने वाले जेन जी एम्प्लॉय का आंकड़ा 16% था, जबकि मिलेनियल्स में ये 25% था. यानी ये आदत दोनों पीढ़ियों को परेशान कर सकती है, हालांकि सर्वे में मिलेनियल्स ने इसे ज्यादा बड़ी प्रॉब्लम बताया.
3. 'हमने भी ऐसे ही काम किया है' वाला ऐटीट्यूड
ऑफिस में एक्सपीरियंस की अपनी अहमियत है. लेकिन जब कोई सीनियर एम्प्लॉय अपने पुराने तरीके को ही सही मानकर नए सजेशन्स को सुनने से मना कर देता है, तो नए एम्प्लॉयज को अपनी बात रखने में परेशानी हो सकती है.
डेलॉयट की 2026 जेन जी और मिलेनियल सर्व के भारत से जुड़े नतीजों के मुताबिक, 99% जेन जी और 98% मिलेनियल्स ने माना कि काम से सैटिसफैक्शन के लिए अपने काम में एक एम यानी उद्देश्य महसूस करना जरूरी है. इससे पता चलता है कि दोनों पीढ़ियां अपने काम को मायने रखने वाला मानना चाहती हैं. इसलिए नए सजेशन्स को सिर्फ उम्र या एक्सपीरियंस के बेसिस पर खारिज करने के बजाय उन पर चर्चा करना बेहतर है.
4. काम को पर्सनल लाइफ से ऊपर रखना
ऑफिस के बाद भी ईमेल देखना, छुट्टी के दिन काम के मैसेज का जवाब देना या हर टाइम काम के लिए अवेलेबल रहना कुछ एम्प्लॉय के लिए नॉर्मल हो सकता है. लेकिन कई जेन जी एम्प्लॉय चाहते हैं कि काम और पर्सनल लाइफ के बीच एक साफ बाउंड्री हो.
नौकरी की 'द जेन जी वर्क कोड' रिपोर्ट के मुताबिक, 50% जेन जी प्रोफेशनल्स ने नौकरी चुनते टाइम सैलरी के अलावा काम और पर्सनल लाइफ के बैलेंस को सबसे अहम बताया. ये नंबर दिखाता है कि जेन जी के लिए सिर्फ नौकरी पाना ही नहीं, बल्कि उसके साथ अपनी जिंदगी को भी टाइम देना जरूरी है.
aajtak.in