एक पिता की JEE में असफलता उनके बेटे के लिए प्रेरणा बन गई. IIT BHU के पूर्व छात्र और न्यूयॉर्क में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर आकाश संपूर्णानंद पांडे ने एक वायरल पोस्ट में बताया कि उनके पिता 1980 में IIT प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर पाए थे. आकाश के अनुसार, पिता की इस असफलता की वजह से उन्हें बिना डर के सपने देखने की हिम्मत मिली. उन्होंने मेहनत की और अपने पहले ही प्रयास में JEE परीक्षा पास कर IIT BHU में दाखिला हासिल कर लिया.
सोशल मीडिया पर शेयर की कहानी
बता दें कि आकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उनके पिता साल 1980 में केवल 10 रुपये लेकर करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर IIT JEE की परीक्षा देने पहुंचे थे. उन्हें परीक्षा के बारे में केवल छह महीने पहले मालूम चला था. हालांकि, गांव का सबसे होनहार छात्र होने के कारण उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया. लेकिन परीक्षा में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. आकाश के मुताबिक, उनके पिता ने बताया था कि वह एक भी सवाल हल नहीं कर पाए और पूरी तरह असफल रहे.
फेल होने के बाद भी नहीं थी नाराजगी
JEE में मिली हार के बाद भी उनके पिता ने कभी हार नहीं मानी और न ही कोई शिकायत की. वह हमेशा IIT से पढ़े लोगों की तारीफ करते थे. आकाश पांडे का कहना है कि उनके पिता की वही असफलता आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई और उसी ने उनके भविष्य की दिशा तय की.
आकाश पांडे ने आगे बताया कि उनके पिता की JEE में असफलता उनके लिए एक बड़ा फायदा बन गई. उन पर परीक्षा पास करने का कोई दबाव नहीं था. अगर वे असफल होते, तो भी कोई बात नहीं थी और अगर सफल होते, तो परिवार में ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति बनते. उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि जिस परीक्षा में वे खुद सफल नहीं हो पाए, उसके लिए बेटे पर कभी दबाव नहीं डालेंगे. यही वजह थी कि आकाश बिना किसी डर और तनाव के तैयारी कर सकें.
आकाश ने पहले कोशिश में पास की परीक्षा
आकाश में आगे बताया कि साल 2012 में उन्होंने पहले ही प्रयास में जेईई परीक्षा पास कर ली थी. उनकी इस सफलता से घर में खुशी की माहौल बन गया. उन्होंने बताया कि उनके पिता इतने खुश थे कि उनकी खुशी संभाले नहीं संभल रही थी.
आकाश का कहना है कि अगर उनके पिता 1980 में JEE पास कर लेते, तो शायद उनकी जिंदगी अलग होती. उनकी कहानी यह दिखाती है कि हर असफलता अंत नहीं होती. कई बार एक पीढ़ी की नाकामी ही अगली पीढ़ी की सबसे बड़ी सफलता की नींव बन जाती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क