अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ने के लगभग दो साल बाद भी आईआईटी कानपुर के 61 वर्षीय पूर्व छात्र को फुल टाइम नौकरी पाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिसके बाद वह अब भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं. बिजनेस इनसाइडर की पब्लिश एक रिपोर्ट गौतम देव ने बताया कि सितंबर 2024 में डलास में अपनी नौकरी छोड़ने के बाद, जब उन्हें दूसरे राज्य में शिफ्ट होने के लिए कहा गया तब उन्होंने पार्ट टाइम नौकरी का सहारा लिया.
टॉप किया फिर भी नहीं है नौकरी
बता दें कि देव ने आईआईटी कानपुर से एमएससी फिजिक्स में टॉप किया. इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय से पीएचडी की. फिर उन्होंने सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. उन्होंने वेरिजोन वायरलेस, सिरियसएक्सएम और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसी कंपनियों में काम किया. टीसीएस में उन्होंने मेटलाइफ और सिटी के लिए सॉफ्टवेयर बनाने में मदद की.
आईटी क्षेत्र में 20 साल से ज्यादा काम करने के बाद देव को लगा था कि उन्हें कुछ ही महीनों में दूसरी नौकरी मिल जाएगी. उन्होंने लिंक्डइन पर नौकरी खोजी और अपने जान-पहचान वालों से भी बात की. लेकिन कई लोगों ने बताया कि उनकी कंपनियों में नई भर्ती नहीं हो रही है.
देव को कई कंपनियों में इंटरव्यू देने का मौका मिला. एक कंपनी में तो कई बार इंटरव्यू हुआ, लेकिन उन्हें कहीं भी फुलटाइम नौकरी नहीं मिली. उनका मानना है कि ज्यादा उम्र और लंबे समय तक नौकरी से दूर रहने की वजह से उन्हें नई नौकरी मिलने में परेशानी हुई होगी.
गिग वर्क और डे ट्रेडिंग से भी नहीं हो पा रही अच्छी कमाई
नौकरी मिलने में परेशानी होने पर देव ने पैसे कमाने के दूसरे तरीके अपनाए. उन्होंने डे ट्रेडिंग शुरू की. शुरुआत में इससे फायदा हुआ, लेकिन बाद में नुकसान होने लगा. उन्होंने उबर, डोरडैश और वॉलमार्ट स्पार्क जैसे प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी का काम भी किया. लेकिन इस काम से उनकी उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हुई.
भारी सामान उठाने में परेशानी के कारण वे ज्यादा डिलीवरी भी नहीं कर पाए. लंबे समय तक नौकरी न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. घर का किराया और दूसरे खर्च पूरे करने के लिए उन्हें अपनी बचत खर्च करनी पड़ी. साथ ही, उन्हें क्रेडिट कार्ड से कर्ज भी लेना पड़ा.
देव अब डलास में कम किराए वाले घर में जाना चाहते हैं लेकिन उन्हें डर है कि नियमित कमाई न होने के कारण उन्हें दूसरा घर किराए पर मिलने में परेशानी हो सकती है. डिलीवरी का काम छोड़कर घर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लगेगा, जिससे उनकी कमाई पर असर पड़ सकता है.
जनवरी में देव ने अपने बिल चुकाने के लिए GoFundMe पर लोगों से आर्थिक मदद मांगी. इससे उन्हें 9,000 डॉलर से ज्यादा की मदद मिली. इस दौरान उन्होंने यह भी माना कि लोगों से पैसे मांगना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन कुछ लोग मदद के लिए आगे आए.
सोशल सिक्योरिटी से मदद की उम्मीद
देव को उम्मीद है कि 62 साल के होने पर वे सोशल सिक्योरिटी के तहत मिलने वाले लाभ के पात्र हो जाएंगे. उन्हें लगता है कि इस पैसे और अपने अस्थायी काम से होने वाली कमाई की मदद से वे खर्च चला सकेंगे. इसके साथ ही वह भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं. वह दो दशक से ज्यादा समय पहले अमेरिका गए थे और बाद में वहां के नागरिक बन गए.
हालांकि, फिलहाल उनकी भारत लौटने की तत्काल योजना नहीं है. उनका मानना है कि ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले पूरी योजना बनाना जरूरी होगा. फिलहाल देव अमेरिका में रहकर अस्थायी काम जारी रखने की सोच रहे हैं. साथ ही वे यह भी विचार कर रहे हैं कि आगे अमेरिका में रहना उनके लिए सही होगा या भारत लौटना.
आजतक एजुकेशन डेस्क