कौन हैं विकास डी नाहर? 10 हजार से शुरू किया बिजनेस, अब 700 करोड़ रुपये है कंपनी की वैल्यूएशन

विकास डी नाहर ने साल 2016 में सिर्फ 10,000 रुपये और दो कर्मचारियों के साथ हैप्पीलो की शुरुआत की थी. मसालों की ट्रेडिंग और गोरमे फूड रिटेल के क्षेत्र में काम करने का अनुभव रखने वाले विकास ने ड्राई फ्रूट्स और हेल्दी स्नैक्स का ब्रांड बनाया. बेंगलुरु में शुरू हुए इस कारोबार ने आगे चलकर निवेशकों का ध्यान खींचा. विकास ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी और पुणे के SCMHRD से पढ़ाई की है.

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हैपिलो के फाउंडर विकास नाहर ने कैसे 10,000 रुपये को एक बड़े स्नैक बिजनेस में बदल दिया. (Photo: Linkedin/@dvikas | AI-enhanced) हैपिलो के फाउंडर विकास नाहर ने कैसे 10,000 रुपये को एक बड़े स्नैक बिजनेस में बदल दिया. (Photo: Linkedin/@dvikas | AI-enhanced)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:13 AM IST

बिजनेस शुरू करने के लिए बड़ी रकम और बड़ी टीम होना जरूरी नहीं है. कई बार बाजार की जरूरत को समझना और सही मौके पर शुरुआत करना भी कारोबार को आगे तक लेकर जा सकता है. विकास डी नाहर ने साल 2016 में सिर्फ 10,000 रुपये और दो कर्मचारियों के साथ हेल्दी स्नैक्स ब्रांड हैप्पिलो (Happilo) की शुरुआत की थी. जनवरी 2026 के ट्रैक्सन डेटा के मुताबिक, करीब एक दशक बाद कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 700 करोड़ रुपये बताई गई. हालांकि, यह बिज़नेस उनका पहला एंटरप्रेन्योरियल एक्सपेरिमेंट नहीं था. नाहर पहले ही फ़ूड रिटेल, इंटरनेशनल ट्रेड और कंज्यूमर ब्रांड बनाने की चुनौतियों के बारे में सीखने में कई साल बिता चुके थे. 

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कॉफी और काली मिर्च उगाने वाले परिवार से बिजनेस तक का सफर

बता दें कि विकास डी नाहर कर्नाटक के सकलेशपुर में कॉफी और काली मिर्च की खेती करने वाले परिवार में पले-बढ़े हैं. इसके बाद उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर एप्लीकेशन की पढ़ाई की. इसके बाद पुणे के सिम्बायोसिस सेंटर फॉर मैनेजमेंट एंड ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (SCMHRD) से मार्केटिंग में MBA किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ट्रेडिंग बिजनेस में काम किया और जैन ग्रुप के साथ अंतरराष्ट्रीय मसाला कारोबार का अनुभव हासिल किया. इस दौरान उन्हें अलग-अलग देशों में बिकने वाले पैकेज्ड फूड और सुविधा स्टोर में मिलने वाले प्रोडक्ट्स को करीब से समझने का मौका मिला.

पहले भी शुरू किया था बिजनेस 

हैप्पिलो शुरू करने से पहले भी विकास कारोबार की दुनिया में कदम रख चुके थे. उन्होंने साल 2011 में सात्विक स्पेशलिटी फूड्स नाम से एक रिटेल वेंचर शुरू किया था. इसमें चॉकलेट और शुगर-फ्री खाद्य उत्पादों जैसे प्रोडक्ट्स बेचे जाते थे. उनके बड़े भाई भी इस कारोबार से जुड़े थे. हालांकि, विकास ने 2015 में इस वेंचर से अलग होने का फैसला किया. यहां पर एक्सपीरियंस लेने के बाद उन्होंने बाजार में ब्रांडेड ड्राई फ्रूट्स और हेल्दी स्नैक्स को लेकर चल रहे बिजनेस पर ध्यान दिया. उस समय इस तरह के उत्पादों की उपलब्धता आज की तुलना में काफी कम थी. ग्राहक अक्सर पारंपरिक दुकानों या विदेशी ब्रांड्स पर निर्भर रहते थे.

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10 हजार रुपये और दो कर्मचारियों से शुरू हुई हैप्पिलो

विकास ने सितंबर 2016 में हैप्पिलो की शुरुआत की. शुरुआती दौर में यह कारोबार प्रोपराइटरशिप के तौर पर चलाया गया और 2018 में कंपनी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया. शुरुआत भले ही छोटी पूंजी से हुई, लेकिन कारोबार को बढ़ाने के लिए आगे चलकर ज्यादा निवेश की जरूरत पड़ी.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विकास ने सरकार के क्रेडिट गारंटी कार्यक्रम के जरिए 75 लाख रुपये का बिना गारंटी वाला लोन लिया था. इससे कारोबार की प्रोसेसिंग सुविधाओं, ऑटोमेशन, पैकेजिंग और सप्लायर नेटवर्क को बढ़ाने में मदद मिली.

हैप्पिलो को शुरुआती दौर में बिगबास्केट पर लिस्टिंग से फायदा मिला. इसके बाद ब्रांड ने छह बड़े शहरों में ग्राहकों तक पहुंच बनाई. धीरे-धीरे कंपनी ने Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के साथ-साथ फिजिकल रिटेल स्टोर्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई.

शार्क टैंक इंडिया में भी नजर आए विकास 

विकास डी नाहर साल 2023 में शार्क टैंक इंडिया के दूसरे सीजन में गेस्ट इन्वेस्टर के तौर पर नजर आए थे. इस दौरान उन्होंने दूसरे कारोबारियों के बिजनेस आइडिया का मूल्यांकन किया था. जारी किए गए वीडियो में विकास डी नाहर ने बताया था कि हैप्पिलो शुरू करने से पहले उन्हें करीब 20 निवेशकों ने पैसा लगाने से मना कर दिया था. इसके बावजूद उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया और उसे आगे बढ़ाया.

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700 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन, फिर भी कारोबार में चुनौतियां

ट्रैक्सन के जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, हैप्पिलो की वैल्यूएशन करीब 700 करोड़ रुपये थी. इससे पहले जनवरी 2022 में इसकी वैल्यूएशन करीब 1,600 करोड़ रुपये बताई गई थी. वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 15 फीसदी घटकर 282.57 करोड़ रुपये रह गया. इस दौरान कंपनी को 9.55 करोड़ रुपये का घाटा भी हुआ. हैप्पिलो की कहानी बताती है कि छोटे निवेश से कारोबार शुरू करके उसे बड़ा बनाया जा सकता है लेकिन कारोबार को आगे बढ़ाने और मुनाफा कमाने की चुनौती बनी रहती है.

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