कभी 9 से 5 की जॉब को एक अच्छी और सिक्योर लाइफ की पहचान माना जाता था. वक्त पर ऑफिस जाना, तय घंटों तक काम करना और महीने के आखिर में सैलरी मिलना ज्यादातर लोगों के लिए करियर का एक कॉमन रास्ता था. लेकिन अब जेन जी के बीच काम को लेकर सोच बदलती नजर आ रही है. आज के युवा सिर्फ अच्छी सैलरी नहीं, बल्कि ऐसा काम चाहते हैं जिसमें उन्हें अपनी जिंदगी जीने का भी वक्त मिले.
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह वर्क-लाइफ बैलेंस है. जेन जी के लिए नौकरी अब जिंदगी का अकेला मकसद नहीं है. वे करियर के साथ अपनी हॉबी, दोस्तों, परिवार, ट्रैवल और पर्सनल ग्रोथ को भी अहमियत देना चाहते हैं. यही वजह है कि कई युवा ऐसी जॉब्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां काम के घंटे और जगह को लेकर थोड़ी आजादी हो.
डेलॉयट की 2026 जेन जी और मिलेनियल सर्वे के मुताबिक, भारत में जेन जी के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस और फाइनेंशियल फ्रीडम सबसे अहम प्राथमिकताओं में शामिल हैं. वहीं, 99% भारतीय जेन जी और 98% मिलेनियल्स का मानना है कि नौकरी से संतुष्टि के लिए काम में एक मकसद होना जरूरी है.
इसके अलावा, रिमोट वर्क, हाइब्रिड जॉब और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स जैसे ऑप्शन्स की मांग भी बढ़ी है. युवा चाहते हैं कि उन्हें हर दिन ऑफिस में बैठकर काम करने के बजाय अपने काम और वक्त को बेहतर तरीके से मैनेज करने का मौका मिले.
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हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि जेन जी मेहनत या करियर से दूर भाग रही है. डेलॉयट की 2025 की रिपोर्ट में भी सामने आया कि युवा करियर में आगे बढ़ने के लिए नई स्किल्स सीखने और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं. बस उनके लिए सक्सेस का मतलब अब सिर्फ ऊंचा पद या लंबी वर्किंग आवर्स नहीं रह गया है.
क्या 9 से 5 की नौकरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी?
शायद नहीं! आज भी बड़ी संख्या में लोगों के लिए एक स्थिर नौकरी और तय सैलरी जरूरी है. लेकिन काम करने के पुराने तरीके में बदलाव जरूर आ रहा है. जेन जी नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि नौकरी के साथ अपनी जिंदगी को भी जगह देना चाहती है.
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