जरूरी नहीं है कि किसी प्रतिष्ठित कॉलेज से डिग्री और एक स्थिर नौकरी हमेशा आर्थिक सुरक्षा की गारंटी ही हो. एक इंजीनियर के लिए एक कॉर्पोरेट कंपनी में 40,000 रुपये महीने की सैलरी, उसके घरेलू खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं था. इसकी वजह से उसने अपना करियर बदलने का फैसला किया और रैपिडो ड्राइवर बन गया, जहां वह अब इससे हर महीने 1.2 लाख रुपये की कमाई कर रहा है. इस घटना को झारखंड की एक महिला ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया , जब उसने रैपिडो बुक की और उस दौरान उससे बात की.
कहां से शुरू हुई बात?
झारखंड की रहने वाली एक महिला ने बताया कि उसने रैपिडो बुक की थी, जिसकी कीमत 198 रुपये थी. पहले तो उसे लगा यह एक सामान्य सा रूटीन है लेकिन उसे नहीं पता था कि देखते ही देखते उसकी ये राइड करियर विकल्पों, वित्तीय दबावों और सफलता के सही अर्थ वाली बातचीत में बदल जाएगी.
एक महीने में होती है लाखों रुपये की कमाई?
बातचीत का सिलसिला चलता गया और फिर महिला ने उस रैपिडो ड्राइवर से उसकी कमाई को लेकर सवाल किया. महिला ने पोस्ट में बताया कि जब उसने ड्राइवर से पूछा कि वह एक दिन में कितना कमा लेता है, तो उसके जवाब में उसने कहा कि कम से कम 4000 रुपये कमा लेते हैं. यह सुनने के बाद महिला हैरान हो गई. हालांकि, पहले तो उसका जवाब सुनकर कुछ गलत लगा लेकिन कुछ देर बाद उसे एहसास हुआ कि ड्राइवर ने अपनी एक दिन की कमाई बताई है न क् महीने की.
क्या आप 1.2 लाख रुपये तक की कमाई करते हैं?
जब उसने पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि वह महीने में 1 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं, तो ड्राइवर ने सहमति जताते हुए कहा कि उसकी मासिक आय 1 लाख रुपये से 1.2 लाख रुपये के बीच है. यह जानकर वह दंग रह गई. भला कोई बाइक टैक्सी ड्राइवर बनकर इतनी कमाई कैसे कर सकता है और एक पारंपरिक पेशेवर करियर को छोड़ सकता है?
इंजीनियरिंग की छोड़ी नौकरी!
ड्राइवर के जवाब से उसके इस फैसले के पीछे का आर्थिक दबाव स्पष्ट हो गया. उसने महिला को बताया कि वह पहले एक कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम करता था और उसे ₹40,000 का मासिक सैलरी मिलता था. हालांकि, यह आय उसके परिवार के घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था.
पेशेवर योग्यता और नियमित नौकरी होने के बावजूद, उन्हें गुजारा करना मुश्किल हो रहा था. इसके बाद उन्होंने फैसला लेते हुए इंजीनियरिंग छोड़कर, कमाई का दूसरा रास्ता अपनाया.
उस महिला ने उसके फैसले पर सवाल उठाते हुए बताया कि इंजीनियर बनने के लिए लोग कितनी मेहनत और पढ़ाई करते हैं. लेकिन ड्राइवर के लिए यह चुनाव सिर्फ पेशेवर प्रतिष्ठा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था. उनके लिए परिवार की जरूरतों को पूरा करना सबसे पहला काम था, जो उनका मौजूदा सैलरी नहीं कर पा रहा था.
उन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय रैपिडो को क्यों चुना?
अब महिला का सवाल बिल्कुल साफ था. इंजीनियरिंग छोड़कर रैपिडो चलाना ही क्यों शुरू किया? इसके पीछे ड्राइवर ने दो कारण बताएं. पहला कि इससे ज्यादा कमाई हो रही है और दूसरा यह कि वह अपने गृहनगर में रहकर काम कर सकता है. महिला की पोस्ट के अनुसार, उसने उससे कहा कि अब मैं अपने ही शहर में काम करता हूं और अपनी कमाई से खुश हूं. उसने यह भी बताया कि उसे अपने इस फैसले पर गर्व है क्योंकि वह घर के पास रहते हुए अच्छी कमाई कर सकता है.
क्या सम्मानजनक नौकरी ही सफलता की पहचान है?
महिला ने X पर हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि इस अनुभव ने सफलता को देखने का उनका नजरिया बदल दिया. आमतौर पर लोग मानते हैं कि अच्छी डिग्री लेना, बड़ी कंपनी में नौकरी करना और अच्छा करियर बनाना ही सफलता है. हालांकि, ये चीजें अच्छे मौके दे सकती हैं लेकिन जरूरी नहीं है कि वह आपकी आर्थिक परेशानियों को दूर कर दें. महिला के मुताबिक, रैपिडो चलाने वाले व्यक्ति ने इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी थी क्योंकि उसे बाइक टैक्सी चलाने में ज्यादा कमाई हो रही थी. उनकी कहानी यह सवाल उठाती है कि सफलता का मतलब क्या है? क्या इसे नौकरी के पद, कंपनी के नाम या परिवार की जरूरतें पूरी करने लायक कमाई से मापा जाना चाहिए?
सफलता सिर्फ पद और नौकरी से तय नहीं होती
₹198 की एक रैपिडो राइड के दौरान हुई बातचीत ने महिला को काम, पैसे और महत्वाकांक्षा के बारे में सोचने का नया नजरिया दिया. उनके मुताबिक, उस व्यक्ति ने इंजीनियर की नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि उसकी कमाई से परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा था. उसने बताया कि अब वह अपने नए काम से ज्यादा कमा रहा है और अपने गृहनगर में रहकर खुश है.
आजतक एजुकेशन डेस्क