दिल्ली में छोड़ा 50 लाख का पैकेज, लंदन में 12 लाख का ऑफर क्यों किया एक्सेप्ट? 

दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने 50 लाख रुपये के पैकेज के बजाय लंदन में 12 लाख रुपये की नौकरी चुनकर पैसे और जीवन की क्वालिटी के मुद्दे पर एक बहस छेड़ दी है. उनका ये फैसला कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर क्यों उन्होंने ये कदम उठाया है?

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लंदन में रहने के लिए दिल्ली में छोड़ दिया 50 लाख का पैकेज. लंदन में रहने के लिए दिल्ली में छोड़ दिया 50 लाख का पैकेज.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

लाखों रुपये की सैलरी आपको आकर्षित कर सकती है. 50 लाख की सैलरी, परिवार और हर तरह की सुख-सुविधा को छोड़कर किसी दूसरे देश में बस जाना आसान नहीं होता है. लेकिन दिल्ली की रहने वाली एक प्रोफेशनल महिला के लिए लंदन जाना केवल कमाई के लिहाज से फैसला नहीं था. तमाम सुविधाएं होने के बाद भी उन्होंने लंदन जाकर अपना करियर बनाने का फैसला किया. हालांकि, ऐसा नहीं था कि वह राजधानी में रहते हुए काम नहीं कर रही थीं. दिल्ली के 50 लाख के पैकेज को छोड़कर लंदन के 12 लाख के पैकेज को स्वीकार करने का क्या मतलब था? उनका कहना है कि साफ हवा, सुरक्षा, पैदल चलने की सुविधा, बेहतर स्वास्थ्य और वर्क-लाइफ बैलेंस ने इस कदम को और भी ज्यादा खास बना दिया है.

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सही लगता है फैसला 

अब ब्रिटेन में रह रहीं जसलीन कौर ने हाल ही में बताया कि उन्हें अपना यह फैसला सही क्यों लगता है. उन्होंने दिल्ली में मिलने वाले 50 लाख रुपये के सालाना पैकेज की तुलना लंदन में मिलने वाली 1 लाख पाउंड यानी करीब 1.2 करोड़ रुपये सालाना सैलरी से की है. 

सारी सुख-सुविधा थी 

लंदन जाने से पहले कौर को दिल्ली में शहरी जीवन को आसान बनाने वाली कई सुविधाएं मिल रही थीं.जरूरी सामान की जल्दी डिलीवरी से लेकर घरेलू वर्कर और अपनी कार इस्तेमाल करने तक, वह ऐसी लाइफस्टाइल जी रही थी, जिसमें रोजमर्रा के काम बहुत कम मेहनत में आसानी से हो जाते थे. लेकिन उनके लिए जो सबसे फायदेमंद था, वह ये था कि वह अपने परिवार के साथ थीं. अब लंदन जाने का मतलब था कि परिवार और इन सुख सुविधाओं को पीछे छोड़कर जाना. फिर भी जसलीन कौर ने लंदन में शिफ्ट होने का फैसला किया. 

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क्या थी वजह? 

अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया कि लंदन जाने के बाद कौर ने सबसे बड़ा बदलाव वहां के वातावरण को बताया. उनके लिए हवा की क्वालिटी एक अहम मुद्दा बन गई. उन्होंने दिल्ली में रहने के अपने अनुभव की तुलना लंदन में अपने नए जीवन से की. कौर के लिए बेहतर वायु गुणवत्ता सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा फायदा नहीं था, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और रोजमर्रा की खुशहाली से भी सीधे जुड़ी थी. इस बदलाव ने उन्हें आरामदायक लाइफस्टाइल को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया. 

पोस्ट में लंदन शिफ्ट होने की एक और वजह जो उन्होंने बताई, वह यह थी कि लंदन में पैदल चलना भी बेहतर था. दिल्ली में कार होने की वजह से वह बिना सार्वजनिक परिवहन पर ज्यादा निर्भर हुए आसानी से शहर में घूम लेती थीं. वहीं, लंदन में पैदल चलना और सार्वजनिक परिवहन उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया.

कौर इसे परेशानी नहीं मानतीं. उनका मानना है कि इससे वह ज्यादा सक्रिय और आत्मनिर्भर बनी हैं. अब पैदल चलकर कहीं जाना, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना और बाहर ज्यादा समय बिताना उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया है, जिसकी वह सराहना करती हैं. 

सुरक्षा और स्वतंत्रता भी रखती है मायने

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कौर ने अपने अनुभव में सुरक्षा को भी एक अहम हिस्सा बताया. उनके लिए शहर में घूमते समय सुरक्षित और सहज महसूस करना और रोजमर्रा के कामों को खुद संभाल पाना, उन्हें ज्यादा स्वतंत्र महसूस कराता है. ये ऐसी चीजें हैं जो भले ही सैलरी में नजर नहीं आतीं, लेकिन किसी व्यक्ति के शहर में रहने के अनुभव पर इनका बड़ा असर पड़ता है. इतनी ही नहीं उन्होंने अपनी हेल्थ को भी इसकी अहम वजह बताई है. उन्होंने माना कि अच्छी हवा, ज्यादा पैदल चलना ने उनकी हेल्थ पर भी अच्छा असर डाला है. 

दिल्ली की आती है याद 

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें दिल्ली की याद नहीं आती है. उन्होंने माना कि उन्हें अपने परिवार और दिल्ली की कुछ सुविधाओं की कमी महसूस होती है. दिल्ली में घरेलू मदद, लगभग हर चीज की तेज डिलीवरी और आसानी से उपलब्ध कार ने उनकी जिंदगी को काफी आसान बना दिया था. विदेश आने के बाद उन्हें ज्यादा आत्मनिर्भर बनना पड़ा और रोजमर्रा के कई कामों में खुद ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. हालांकि, इन बदलावों से उन्हें कई फायदे मिले हैं. 

यह बदलाव सिर्फ त्याग नहीं, एक समझौता है

कौर का अनुभव दिखाता है कि विदेश जाने का मतलब हमेशा आसान जिंदगी को मुश्किल जिंदगी से बदलना नहीं होता. अक्सर लोग कुछ सुविधाएं छोड़कर वे चीजें हासिल करते हैं, जिन्हें वे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं. किसी को परिवार से दूर रहने का दुख हो सकता है, लेकिन बदले में ज्यादा स्वतंत्रता मिल सकती है. घरेलू मदद कम हो सकती है, लेकिन व्यक्ति ज्यादा सक्रिय बन सकता है. रोजमर्रा के कामों में ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन इससे जीवनशैली और काम के बीच बेहतर संतुलन बन सकता है. 

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आखिर 'बेहतर जीवन' का मतलब क्या है?

कौर की कहानी यह सवाल भी उठाती है कि लोग सफलता और बेहतर जीवन को किस तरह देखते हैं. कुछ लोगों के लिए भारत में अच्छी सैलरी, परिवार के पास रहना और रोजमर्रा की सुविधाएं सबसे ज्यादा मायने रखती हैं. वहीं, कुछ लोगों के लिए साफ वातावरण, सुरक्षा, आजादी, बेहतर सुविधाएं और अपने लिए ज्यादा समय महत्वपूर्ण हो सकता है. 

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