किसी की सैलरी 18 हजार रुपये हो तो सुनने में लग सकता है कि वह किसी तरह अपना घर चला लेगा. लेकिन जब इसी रकम से किराया, राशन, बच्चों की फीस और दवाइयों का खर्च भी उठाना होता है, तो महीने के आखिर तक पैसे बचाना कितना मुश्किल हो सकता है. सोशल मीडिया पर एक सिक्योरिटी गार्ड की कमाई और खर्च का ऐसा ही हिसाब सामने आया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
18 हजार सैलरी और खर्च हो जाते हैं पूरे पैसे?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंकित पांडे नाम के यूजर ने एक सिक्योरिटी गार्ड से हुई बातचीत का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति की महीने की कमाई 18 हजार रुपये है. इसमें से ज्यादातर रकम घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में खर्च हो जाती है. पोस्ट के मुताबिक, सिक्योरिटी गार्ड हर महीने 4 हजार रुपये किराया देता है. खाने-पीने पर 6 हजार रुपये खर्च होते हैं. बच्चों की स्कूल फीस के लिए 2 हजार रुपये और आने-जाने के लिए भी 2 हजार रुपये रखने पड़ते हैं. इसके अलावा घर के बिल पर 1 हजार और दवाइयों पर 1 हजार रुपये खर्च होते हैं.
इस तरह महीने के कुल खर्च के बाद उसके पास सिर्फ 2 हजार रुपये बचते हैं. यानी 18 हजार रुपये की कमाई में से करीब 16 हजार रुपये जरूरी खर्चों में चले जाते हैं.
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कम आय में घर चलाने की मुश्किलों पर चर्चा शुरू कर दी. कुछ यूजर्स ने कहा कि कम सैलरी पाने वाले लोगों की बड़ी कमाई रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही खत्म हो जाती है. ऐसे में भविष्य के लिए बचत करना उनके लिए आसान नहीं होता.
इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा कि कम आय वाले कर्मचारियों के लिए रोजमर्रा का खर्च उठाना ही बड़ी चुनौती है. वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि 2 हजार रुपये बचाना भी अच्छी बात है क्योंकि कई लोग इससे ज्यादा कमाने के बावजूद बचत नहीं कर पाते.
एक यूजर ने यह भी सवाल उठाया कि अगर अचानक बीमारी, फोन खराब होने या किसी दूसरी जरूरत पर पैसे खर्च करने पड़ जाएं, तो ये 2 हजार रुपये भी बचना मुश्किल है.
केवल बचत नहीं, भविष्य की सुरक्षा भी चिंता
इस पोस्ट ने एक बार फिर उन लोगों की आर्थिक स्थिति पर ध्यान खींचा है, जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा घर चलाने में ही खर्च हो जाता है. ऐसे में बचत बच्चों की पढ़ाई और अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसे जुटाना चुनौती बन जाता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क