नई नौकरी, अच्छी सैलरी और नया ऑफिस से हर युवा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. लेकिन कई बार जब आप ज्यादा खुश होते हैं या अच्छी सैलरी देखकर बिना कुछ सोचे समझे साइन कर देते हैं तो, इसका असर महीने की 1 तारीख को दिखाई देती है. 10 लाख का पैकेज होने के बाद जब अकाउंट में सैलरी 60 हजार आती है, तो आपके होश उड़ जाते हैं. कई बार तो कर्मचारी को यह भी नहीं पता होता है कि उनकी बेसिक सैलरी क्या है, टैक्स कितने कटते हैं या PF का क्या नियम है? कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रहे हैं? अगर आपको भी इन चीजों की समझ नहीं है तो चलिए जान लेते हैं इसके पीछे का गणित.
पहले जानते हैं क्या होता है CTC का मतलब?
CTC का साफ मतलब होता है कि कंपनी आप पर सालभर में कितना खर्च करती है न कि आपकी महीने की कमाई. मान लेते हैं कि अगर आपकी CTC 10 लाख रुपये है, तो इसे 12 से डिवाइड करें लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपकी सैलरी 83,33 रुपये होगी.
क्या होता है इसका गणित?
कुल पैकेज में से कंपनी की तरफ से मिलने वाले PF के लिए ₹45,000, ₹24,000 की ग्रेच्युटी, ₹15,000 का इंश्योरेंस प्रीमियम और ₹1 लाख का वेरिएबल पे अलग करने के बाद फिक्स्ड ग्रॉस सैलरी करीब ₹8 लाख रह जाती है. इसके बाद कर्मचारी के PF और इनकम टैक्स (TDS) की कटौती के बाद हर महीने हाथ में केवल ₹60,000 से ₹63,000 की सैलरी आने की उम्मीद है.
किस लेवल पर कटता है PF?
अब बात अगर PF की करें तो, लोग इसमें कई बार कंफ्यूज हो जाते हैं. हालांकि, PF दो तरह से कटते हैं.
₹15,000 की बेसिक पर PF
मान लेते हैं कि कंपनी EPFO के नियमों के तहत PF की गणना ₹15,000 की बेसिक सैलरी पर करता है, तो ऐसे में कर्मचारी की सैलरी से हर महीने ₹1,800 (12%) PF के लिए कटेंगे. इससे महीने की इन-हैंड सैलरी ज्यादा रहेगी.
पूरी बेसिक सैलरी पर PF
लेकिन अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 है और कंपनी पूरी बेसिक का 12% PF में जमा करती है, तो आपकी सैलरी से 4,800 रुपये हर महीने कटेगा. कंपनी भी अपनी तरफ से उतनी ही राशि जमा करेगी. इससे अभी मिलने वाली सैलरी कुछ कम होगी, लेकिन PF में ज्यादा पैसा जमा होने से आपकी लंबी अवधि की बचत बढ़ेगी.
आजतक एजुकेशन डेस्क