समंदर से अब जमीनी हमले की तैयारी... अमेरिका भेज रहा USS त्रिपोली लाइटनिंग कैरियर, स्टेल्थ फाइटर जेट्स और 2500 मरीन्स

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी ताकत भेजी है. USS Tripoli (लाइटनिंग कैरियर) 2500 मरीन और F-35B स्टेल्थ फाइटर जेट्स लेकर पूरे स्पीड से मिडिल ईस्ट की ओर जा रहा है. यह जहाज ताइवान क्षेत्र से हटाकर भेजा गया. अब USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford के साथ तीन कैरियर-कैपेबल प्लेटफॉर्म्स इकट्ठे हैं. यह 2003 के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना की सबसे बड़ी तैनाती है.

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यूएसएस त्रिपोली अपनी फ्लीट के साथ जापान से ईरान की ओर बढ़ चुका है. (Photo: US Navy) यूएसएस त्रिपोली अपनी फ्लीट के साथ जापान से ईरान की ओर बढ़ चुका है. (Photo: US Navy)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में अब अमेरिकी नौसेना ने अपना सबसे महत्वपूर्ण जहाज और हजारों मरीन को मिडिल ईस्ट भेज दिया है. USS Tripoli नाम का यह जहाज अमेरिका क्लास का एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो लाइटनिंग कैरियर के नाम से जाना जाता है.

यह जहाज जापान से निकलकर पूरे स्पीड से ईरान की ओर जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों में यह बाशी चैनल (ताइवान और फिलीपींस के बीच) से गुजरता दिखा है. यह कोई सामान्य तैनाती नहीं है, बल्कि युद्ध की जरूरत में बहुत तेजी से की गई कार्रवाई है.

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USS Tripoli क्या है और क्यों खास है?

USS Tripoli (LHA-7) एक बड़ा एम्फीबियस असॉल्ट शिप है. इसका वजन 45000 टन, लंबाई 844 फीट और कीमत 3.4 अरब डॉलर है. यह सामान्य ट्रांसपोर्ट शिप नहीं है, बल्कि लाइटनिंग कैरियर के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि यह F-35B लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर जेट्स को अपने डेक से लॉन्च कर सकता है. F-35B वर्टिकल टेकऑफ कर सकता है. प्रिसिजन गाइडेड हथियार ले जा सकता है.

हर F-35B की कीमत 130 मिलियन डॉलर है. यह दुश्मन के रडार से छिप सकता है. इस जहाज पर मरीन कॉर्प्स की अपनी हवाई ताकत होती है, जो नेवी से अलग काम करती है. यह जहाज एम्फीबियस असॉल्ट (समुद्र से जमीन पर हमला) के लिए बनाया गया है, जिसमें 2500 से ज्यादा मरीन और उनके हथियार, हेलीकॉप्टर और F-35B जेट्स शामिल हैं.

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कौन-कौन से जहाज ईरान के पास पहुंच रहे हैं?

अमेरिका ने अब तीन बड़े कैरियर-कैपेबल प्लेटफॉर्म्स को मिडिल ईस्ट में इकट्ठा कर लिया है. USS Abraham Lincoln (CVN-72) – न्यूक्लियर सुपरकैरियर – अरेबियन सी में पहले से मौजूद है. USS Gerald R. Ford (CVN-78) – दुनिया का सबसे नया और एडवांस्ड कैरियर – रेड सी में है.

अब USS Tripoli तेजी से वहां पहुंच रहा है. इन तीनों से मिलाकर 150 से ज्यादा कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं, जिसमें स्टेल्थ फाइटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट्स और अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं. यह 2003 के इराक युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत है.

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यह तैनाती क्यों हो रही है?

यह तैनाती ईरान के साथ बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमलों के कारण हुई है. ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जहाजों के लिए बंद कर दिया है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. हाल ही में अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप (तेल निर्यात का मुख्य केंद्र) पर हमला किया, जहां सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. ट्रंप ने कहा है कि अगर स्ट्रेट बंद रहा तो तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला होगा. 

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ईरान के सुप्रीम लीडर ने जवाब में कहा कि स्ट्रेट बंद रहेगा. USS Tripoli को ताइवान के पास से हटाकर यहां भेजा गया है, जो पैसिफिक में चीन के खिलाफ अमेरिकी डिटरेंस को कमजोर करता है. यह दिखाता है कि ईरान युद्ध अमेरिका के लिए बहुत बड़ा हो गया है और मौजूदा ताकत पर्याप्त नहीं है.

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इसका क्या मतलब है?

यह तैनाती सिर्फ जहाज भेजने की नहीं है. USS Tripoli पर मरीन अम्फीबियस असॉल्ट के लिए तैयार हैं, यानी समुद्र से जमीन पर उतरकर ऑपरेशन कर सकते हैं या निकासी कर सकते हैं. F-35B जेट्स से हवाई हमले और सपोर्ट मिलेगा. अमेरिका एयर डोमिनेंस चाहता है – F-35B (ट्रिपोली से), F/A-18 (लिंकन से) और F-35C (फोर्ड से) से. 

यह युद्ध अब सिर्फ हवाई हमलों तक नहीं रह गया, बल्कि जमीन पर ऑपरेशन की तैयारी भी दिख रही है. अमेरिका ने पैसिफिक से एसेट हटाकर मिडिल ईस्ट पर फोकस किया है, जो बताता है कि स्थिति बहुत गंभीर है. युद्ध लंबा चल सकता है. दुनिया अब तेल की कीमतों, ऊर्जा संकट और बड़े युद्ध के खतरे से चिंतित है.

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