कश्मीर पहुंची भारतीय सेना की पहली मालगाड़ी, लौटेगी सेब लेकर

भारतीय सेना की पहली विशेष मालगाड़ी बीडी बारी से अनंतनाग चली. इसमें 753 टन सर्दियों का सामान था. वापसी में यह कश्मीरी सेब ले जाएगी, जिससे किसानों को फायदा होगा. यह सैन्य-सिविल एकीकरण का उदाहरण है, जो कश्मीर की अर्थव्यवस्था और सेना की तैयारी को मजबूत करेगा.

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भारतीय सेना के लिए कश्मीर पहुंची मालगाड़ी से सामान उतारते सेना के ट्रक. (Photo: ITG) भारतीय सेना के लिए कश्मीर पहुंची मालगाड़ी से सामान उतारते सेना के ट्रक. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

जम्मू-कश्मीर में एक ऐतिहासिक घटना हुई है. उद्धमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर भारतीय सेना की पहली विशेष मालगाड़ी सफलतापूर्वक चली. 12-13 सितंबर 2025 को यह गाड़ी बीडी बारी से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडवांस्ड विंटर स्टॉकिंग (एडब्ल्यूएस) सामान लदा था, जो सेना की इकाइयों के लिए था. यह कदम सेना की सर्दियों की तैयारी में क्रांति लाएगा.

यूएसबीआरएल क्या है और इसका महत्व?

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यूएसबीआरएल भारत का एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना है, जो जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ती है. इसकी कुल लंबाई 272 किलोमीटर है. यह हिमालय के कठिन इलाके से गुजरती है. इसमें दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल चेनाब ब्रिज (359 मीटर ऊंचा) और भारत का सबसे लंबा रेल सुरंग पीर पंजाल (11.215 किमी) शामिल हैं.

यह परियोजना 2002 में शुरू हुई और जून 2025 में पूरी तरह चालू हो गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को इसकी शुरुआत की, जब वंदे भारत ट्रेन को फ्लैग ऑफ किया गया. इस रेल लिंक से कश्मीर घाटी बाकी भारत से जुड़ गई, जो सड़कों पर भूस्खलन या बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम करेगी.

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अगस्त 2025 में पहली मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची, जो सीमेंट ले जा रही थी. लेकिन भारतीय सेना की यह गाड़ी पहली विशेष मालगाड़ी है, जो सैन्य और सिविल उपयोग का उदाहरण है.

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सेना की पहली विशेष मालगाड़ी: क्या लाया और क्यों खास?

12-13 सितंबर 2025 को चली यह मालगाड़ी बीडी बारी (कटरा के पास) से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडब्ल्यूएस सामान लदा था, जैसे राशन, ईंधन, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें. ये सामान जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना की इकाइयों के लिए था, ताकि सर्दियों में बर्फीले हिमालयी इलाके में कोई कमी न हो.

पहले सेना सड़कों पर ट्रक से सामान भेजती थी, जो भूस्खलन या बर्फबारी से रुक जाती थी. अब रेल से तेज और सुरक्षित तरीके से स्टॉकिंग होगी. यह सेना की क्षमता विकास का हिस्सा है, जो कठिन इलाकों में ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कश्मीर को राष्ट्रीय फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने का मील का पत्थर है. 

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सिविल-मिलिट्री फ्यूजन: कश्मीरी सेब का निर्यात

यह गाड़ी सिर्फ सैन्य उपयोग की नहीं. वापसी में यह कश्मीरी सेब ले जाएगी, जो भारत के बाकी बाजारों में बेचे जाएंगे. यह ड्यूल-यूज लॉजिस्टिक्स का शानदार उदाहरण है. कश्मीरी किसान पहले भूस्खलन या बाढ़ से सड़कें बंद होने पर भारी नुकसान उठाते थे. अब रेल से उनका फल तेजी से बाजार पहुंचेगा, जिससे आर्थिक राहत मिलेगी.

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यह कदम सेना की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका दिखाता है. सेना न सिर्फ रक्षा करती है, बल्कि कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही है. रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का सैन्य और सिविल उपयोग से क्षेत्र की लचीलापन, कनेक्टिविटी और समृद्धि बढ़ेगी. परियोजना से 5 करोड़ से ज्यादा मैन-डे रोजगार पैदा हुए हैं.

यूएसबीआरएल के फायदे: कश्मीर के लिए नया दौर

यह रेल लिंक कश्मीर को बदल देगी. पहले कश्मीर घाटी रेल से अलग-थलग थी, लेकिन अब पैसेंजर ट्रेनें (जैसे वंदे भारत) और मालगाड़ियां चलेंगी. इससे फल, हस्तशिल्प और अन्य सामान सस्ते में बाजार पहुंचेंगे. सेना के लिए यह सर्दियों की स्टॉकिंग आसान करेगा. 

परियोजना में कई चुनौतियां थीं—जैसे हिमालय के युवा इलाके में भूगर्भीय समस्याएं. लेकिन सुरंगों में वेंटिलेशन और फायरफाइटिंग सिस्टम लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित की गई. अब कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

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