16,000 फीट ऊपर खुला भारत का नया पैराशूट, DRDO के AHAP का पहला लाइव जंप सफल

लद्दाख के आसमान में DRDO ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. 16,000 फीट की ऊंचाई से पैराट्रूपर ने छलांग लगाई और AHAP पैराशूट के साथ 13,700 फीट पर सुरक्षित लैंडिंग की. इस सफल टेस्ट से हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में नई ताकत मिली है.

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लद्दाख में पैराशूट से कूदने के बाद जवान. (Photo: ITG) लद्दाख में पैराशूट से कूदने के बाद जवान. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

लद्दाख में DRDO ने 16,000 फीट की ऊंचाई पर एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट (AHAP) का पहला लाइव जंप सफलतापूर्वक किया है. यह टेस्ट न्योमा के मुध ड्रॉप जोन में हुआ. जंप 16,000 फीट से किया गया. पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और 13,700 फीट की ऊंचाई पर लैंडिंग हुई. इस टेस्ट से पता चला है कि AHAP को बहुत ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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AHAP को भारतीय रक्षा बलों के लिए बनाया गया है. इसका इस्तेमाल पैराट्रूपर्स को ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में उतारने के लिए किया जा सकता है. यह एक स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है. इसकी मदद से एक साथ कई पैराट्रूपर्स को एयरक्राफ्ट से नीचे उतारा जा सकता है. इसे DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा ने डिजाइन और डेवलप किया है.

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न्योमा का मुध ड्रॉप जोन काफी ऊंचाई पर मौजूद है. यहां हुए टेस्ट में पैराट्रूपर ने 16,000 फीट से छलांग लगाई. पैराशूट 15,500 फीट पर खुला और 13,700 फीट पर लैंडिंग हुई. इतनी ज्यादा ऊंचाई पर पैराशूट जंप करना आसान नहीं होता. यहां पैराशूट खुलने के समय लगने वाला झटका ज्यादा हो सकता है. नीचे आते समय पैराट्रूपर की रफ्तार भी एक बड़ी चुनौती होती है. इसलिए हाई-एल्टीट्यूड जंप के लिए पैराशूट का सही और सुरक्षित तरीके से काम करना बहुत जरूरी है.

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18,000 फीट तक काम कर सकता है

DRDO के मुताबिक, AHAP को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे 18,000 फीट तक की ऊंचाई पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. इसमें नीचे आने की रफ्तार को भी सुरक्षित रखा गया है. इससे यह पैराशूट ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के लिए काम का हो सकता है. ऐसे इलाकों में जमीन पहले से ही काफी ऊंचाई पर होती है, इसलिए वहां पैराट्रूपर्स को उतारने के लिए खास सिस्टम की जरूरत होती है.

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भारत में ही तैयार हुआ पैराशूट

AHAP का निर्माण ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (OPF), कानपुर ने किया है. इसकी जांच डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस (DGAQA) ने की. इसके अलावा इसे सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थीनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC), RCMA कानपुर से प्रमाणन मिला है. यानी इस पैराशूट के डिजाइन से लेकर निर्माण, जांच और प्रमाणन तक कई काम देश में ही किए गए हैं. इससे हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट सिस्टम के लिए भारत की अपनी क्षमता मजबूत होती है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल टेस्ट के लिए DRDO, रक्षा बलों, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को बधाई दी. उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया. रक्षा सचिव और DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने भी AHAP बनाने वाली टीम को बधाई दी. इस सफल लाइव जंप के बाद AHAP का इस्तेमाल ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में पैराट्रूपर्स को उतारने के लिए किया जा सकता है.

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