पिकएक्स माउंटेन, जिसे स्थानीय भाषा में कुह-ए-कोलंग गज ला कहा जाता है, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत सुरंग सुविधाओं में से एक है. इस्फाहान प्रांत में स्थित यह विशाल ग्रेनाइट किला नतांज परमाणु परिसर से कुछ मिनट की दूरी पर है.
2020 से लगातार फैल रही इस सुविधा को ईरान ने पश्चिमी हमलों और सबोटाज से बचाने के लिए बनाया है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियां मानती हैं कि यहां सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट, यूरेनियम मेटलर्जी या गुप्त यूरेनियम संवर्धन सुविधा हो सकती है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सीधे निशाने पर लिया है.
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भूवैज्ञानिक सुरक्षा और निर्माण का पैमाना
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गहराई और कठोर ग्रेनाइट चट्टान है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके अंडरग्राउंड हॉल 80 से 100 मीटर या इससे भी ज्यादा गहराई में बने हैं, जो फोर्डो से भी ज्यादा गहरा है. पहाड़ की ऊंचाई 1608 मीटर है, जो प्राकृतिक सुरक्षा का मजबूत कवच प्रदान करती है.
यहां पूर्वी ढलान पर दो और पश्चिमी ढलान पर दो, कुल चार टनल एंट्रेंस हैं. 2025 से ईरान ने पूरे पहाड़ के चारों ओर दोहरी सुरक्षा दीवार और बाड़ बनाई है. टनल पोर्टल्स को कंक्रीट और मिट्टी की परतों से मजबूत किया गया है. जुलाई 2026 की सैटेलाइट इमेजरी में निर्माण कार्य जारी दिख रहा है, हालांकि सुविधा अभी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं मानी जा रही है.
13 जुलाई को राष्ट्रपति ट्रंप ने ह्यू हेविट शो में साफ कहा कि पिकएक्स माउंटेन उनके निशाने पर है. उन्होंने इसे 'नाइस बिग फैट शॉट राइट इन द फ्रंट डोर' बताया और ईरानियों को चेतावनी दी कि वे तैयार रहें. यह बयान उन हमलों के बीच आया है जिसमें अमेरिका ने ईरान के रडार, मिसाइल साइट्स, स्पीडबोट्स और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंदरगाहों पर लगातार हमले किए.
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खामेनेई की मौत के बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड में बदले की भावना बढ़ गई है. पिकएक्स पर हमला ईरान के बचे हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीधा प्रहार होगा, जो क्षेत्रीय युद्ध को और बड़ा बना सकता है.
रणनीतिक उद्देश्य और ईरानी थ्योरी
ईरानी विश्लेषकों के अनुसार इस सुविधा में तीन संभावनाएं हैं.
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी को ईरान ने जवाब दिया कि पहाड़ के अंदर क्या है- यह आपका काम नहीं है. 2007 से यहां टनलिंग शुरू हुई थी, लेकिन 2020 के बाद इसे पूर्ण परमाणु किले में बदला गया.
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गहराई के बावजूद कमजोरियां
GBU-57 जैसी अमेरिकी बंकर बस्टर बम 60 मीटर मिट्टी भेद सकती है, लेकिन 100 मीटर ग्रेनाइट में प्रभावी नहीं हो सकती. फिर भी वेंटिलेशन शाफ्ट, पावर लाइन, खुली टनल एंट्रेंस और कंस्ट्रक्शन सप्लाई लाइन इसकी कमजोरियां हैं. इजरायल और अमेरिका पहले भी फोर्डो और अन्य टनल साइट्स पर वेंटिलेशन शाफ्ट को निशाना बना चुके हैं. ग्राउंड ऑपरेशन या गहरी पैठ वाली हथियारों से भी खतरा है.
ऋचीक मिश्रा