1984 सिख दंगाः हाईकोर्ट ने बरकरार रखी 88 दोषियों की सजा

1984 में हुए सिख विरोधी दंगा में एक और फैसला आया है. 34 साल पहले हुए इस दंगे के लिए 22 साल पहले एक कोर्ट ने 5 साल जेल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ 88 लोग हाईकोर्ट चले गए थे.

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1984 में हुए सिख विरोधी दंगे की सुनवाई कोर्ट में जारी (फाइल/ PTI) 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे की सुनवाई कोर्ट में जारी (फाइल/ PTI)

सुरेंद्र कुमार वर्मा / पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

34 साल पहले 1984 में पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में हुए दंगों के सिलसिले में सभी 88 दोषियों की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सजा बरकरार रखा है.

कड़कड़डूमा ने साल 1996 में दंगा भड़काने, घरों को जलाने और धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में 107 लोगों को 5 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद 88 लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की थी.

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इन पर 2 नवंबर 1984 को कर्फ्यू का उल्लंघन कर हिंसा करने का आरोप था. उस हिंसा में त्रिलोकपुरी में करीब 95 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था और करीब सौ घरों को जला दिया गया था.

इस मामले में 95 शव बरामद होने के बाद भी किसी भी पर हत्या की धाराओं में आरोप तय नहीं हुए थे. के मामले में दोषी पाए गए करीब 80 से ज्यादा लोगों की अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सितंबर में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

जस्टिस आरके गौड़ा ने इस मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इन लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

सभी 88 दोषियों पर निचली अदालत में ये आरोप साबित हो गए थे कि इन्होंने ही 2 नवंबर 1984 को कर्फ्यू का उल्लंघन कर हिंसा की थी. इस हिंसा के दौरान करीब 100 घरों को जलाया गया था, जिसमें 95 लोगों की मौत हो गई थी.

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