राजस्थानः स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तानी जासूस कुलदीप और नारायण गिरफ्तार, ऐसे भेज रहे थे सेना के सीक्रेट

राजस्थान पुलिस की खुफिया एजेंसी ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक आरोपी कुलदीप शेखावत सेना के जवानों से सोशल मीडिया पर दोस्ती करने के बाद उनसे गोपनीय सूचनाएं हासिल करता था. वहीं दूसरे आरोपी नारायण लाल ने बताया कि उसने पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव को पैसों के बदले में इंडियन सिम उपलब्ध कराए थे.

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दोनों संदिग्ध पुलिस की गिरफ्त में हैं दोनों संदिग्ध पुलिस की गिरफ्त में हैं

कमलजीत संधू

  • जयपुर,
  • 14 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 1:07 AM IST

स्वतंत्रता दिवस से पहले राजस्थान पुलिस की खुफिया एजेंसी ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों की पहचान भीलवाड़ा निवासी 27 वर्षीय नारायण लाल गदरी और जयपुर के 24 वर्षीय कुलदीप सिंह शेखावत के रूप में हुई है. खुफिया एजेंसियों ने उनसे संयुक्त रूप से पूछताछ की.

अधिकारियों ने कहा कि गदरी ने पाकिस्तानी हैंडलर को कई कंपनियों के सिम कार्ड मुहैया कराए थे, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी हैंडलर सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए करते थे.  वहीं कुलदीप सिंह शेखावत पाली में एक शराब की दुकान में सेल्समैन का काम करता था. वह पाकिस्तानी महिला हैंडलर के संपर्क में था.

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खुफिया एजेंसी के महानिदेशक उमेश मिश्रा ने कहा कि कुलदीप शेखावत सेना के जवानों से सोशल मीडिया पर दोस्ती करने के बाद उनसे गोपनीय सूचनाएं हासिल करता था. उन्होंने कहा कि दोनों को जासूसी करने और पाकिस्तानी हैंडलरों की मदद करने के एवज में पैसे मिल रहे थे. उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ IPC की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. 

व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हुआ था शामिल 


वहीं राजस्थान पुलिस को नारायण लाल ने पूछताछ में बताया कि उसने 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की है. अपनी आजीविका चलाने के लिए उसने ड्राइविंग, घर-घर कुल्फी बेचने, बकरी पालन, भजन गायक समेत कई काम किए. इस साल की शुरुआत में नारायण लाल को फेसबुक पर एक लिंक मिला था. इसके जरिए वह ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप पर शामिल हुआ, जिस पर अश्लील सामग्री परोसी जाती थी. व्हाट्सएप ग्रुप में पाकिस्तान सहित कई देशों के करीब 250 से ज्यादा सदस्य थे. हालांकि आरोपी नारायण लाल ने दावा किया कि वह एक हफ्ते बाद ही इस ग्रुप से एग्जिट हो गया था. 

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पाकिस्तान ले जाने की बनाई थी योजना
 

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने के बाद एक व्यक्ति ने उससे कॉन्टेक्ट किया. जो कि "+92" यानी पाकिस्तानी नंबर का इस्तेमाल कर रहा था. उसने ग्रुप एग्जिट करने का कारण पूछा. साथ ही अपना नाम अनिल बताया. दोनों के बीच बातचीत जारी रही. कुछ दिनों के बाद अनिल ने नारायण लाल को एक अन्य पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) साहिल से मिलवाया, जो भारत के नंबर से ही व्हाट्सएप चला रहा था, उसने बताया कि वह दिल्ली में रहता है. पीआईओ साहिल ने नारायण लाल से पाकिस्तान चलने के लिए कहा. साथ ही कहा कि वह इस ट्रिप का पूरा खर्चा उठाएगा, साथ ही डॉक्यूमेंट्स भी बनवा देगा. अपना पासपोर्ट और वीजा बनवाने के लिए नारायण लाल ने पीआईओ के साथ अपने आधार कार्ड, डाइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड की जानकारी भी शेयर की.

नारायण लाल ने खरीदे थे सिम कार्ड


पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव अनिल और साहिल ने नारायण लाल से कहा कि उन्हें कुछ इंडियन सिम कार्ड की जरूरत है, इसके बदले उसे पैसे दिए जाएंगे. नारायण लाल ने उनके नाम पर दो सिम कार्ड खरीदे. नारायण लाल ने पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के बताए पते पर यह सिम भेज दीं. इसके बाद नारायण लाल ने पीआईओ को तीन और सिम भेजीं. इसके लिए उसे 5 हजार रुपये मिले.

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कन्हैयालाल के मर्डर के बाद जारी वीडियो देखने को कहा

पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने नारायणलाल को मिलिट्री एरिया में घुसने, सेना के जवानों से दोस्ती करने, सैन्य ठिकानों के फोटो और वीडियो भेजने के लिए कहा था. इतना ही नहीं, पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने उससे उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या के बाद गौस और रियाज द्वारा जारी किए गए वीडियो को भी देखने के लिए कहा. पीआईओ ने नारायण लाल को उदयपुर छावनी से सटे शॉपिंग स्पेस की रेकी का भी काम सौंपा था, ताकि वे वहां एक फोटो कॉपी का स्टॉल लगा सकें. इस काम के लिए उन्होंने नारायण लाल को दो से तीन हजार रुपये भेजे थे. इतना ही नहीं, इसके लिए 4-5 लाख रुपये देने का भी वादा किया था. 

गूगल मैप से भेजी दुकान की लोकेशन
 

इसके बदले में पीआईओ उन सैन्य डॉक्यूमेंट्स की कॉपियां चाहते थे, जो फोटोकॉपी के लिए दुकान पर आएंगी. नारायण लाल ने उदयपुर छावनी से सटे क्षेत्र का दौरा किया. एक दुकान को शॉर्टलिस्ट किया, इसके बाद दुकान की लोकेशन Google मैप के जरिए शेयर की थी.

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