फरवरी 2026 में जब पुणे के एक मशहूर होटल में केतन और सिया की सगाई हो रही थी, तब असल में उससे दो महीने पहले ही सिया शादी कर चुकी थी. यानी शादीशुदा सिया शादी के दो महीने बाद केतन से सगाई कर रही थी. सिया ने केतन के साथ सगाई से पहले चेतन से राजस्थान के एक मंदिर में शादी की थी. हालांकि ये शादी और इस शादी की खबर सिर्फ तीन लोगों को थी. सिया, चेतन और चेतन के दोस्त ऋतेश हांगे को. पिछले तीन महीने से इस सवाल का जवाब भी हर कोई जानना चाहता था कि 18 जून की सुबह पुणे के करीब लौहगढ़ की पहाड़ी से केतन को धक्का किसने दिया था? सिया ने या फिर चेतन ने.
आपको याद होगा इस मामले में पुणे पुलिस ने बाकायदा डमी ट्रायल भी किया था. इस डमी ट्रायल में सिया और चेतन दोनों को अलग-अलग दिन बुलाया गया था. अब जो सच्चाई सामने आई है, वो ये कि केतन को धक्का देने वालों में सिया और चेतन दोनों शामिल थे. सिया ने सबसे पहले केतन को अपने हाथों से धक्का दिया. इसके बाद चेतन ने केतन को अपने पैर से धक्का दिया था.
केतन मर्डर केस मे डेडलाइन पूरी होने से ठीक एक दिन पहले 19 सितंबर को पुणे पुलिस ने कुल 5 हजार 53 पन्नों की चार्जशीट वडगांव मावल सेशंस कोर्ट में दाखिल कर दी. चार्जशीट यानी आरोप पत्र असल में वो कानूनी दस्तावेज है, जो एक केस की जांच करने के बाद केस से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज सबूतों और गवाहों के साथ कहानी की तरह लिखी जाती है.
चार्जशीट में पुलिस ने बताई हत्या की पूरी कहानी
मर्डर केस में पुलिस के पास चार्जशीट दाखिल करने के लिए कुल 90 दिनों का वक्त होता है. पुणे पुलिस ने केतन मर्डर केस में 89वें दिन ये चार्जशीट दाखिल कर दी. अब इस चार्जशीट पर अदालत में चार्जेज फ्रेम होंगे. यानी आरोप तय होंगे. कौन कौन से आरोप जो चार्जशीट में मौजूद हैं, वो आरोपियों पर लगाए जाएंगे या उनमें से कुछ हटाए जाएंगे, ये अब अदालत तय करेगी. एक बार आरोप तय हो जाने के बाद कायदे से मुकदमे का ट्रायल शुरू होगा.
अब ये मुकदमा आम कोर्ट में चलेगा या फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसका फैसला आरोप तय होने के बाद ही होगा. 18 जून यानी जिस दिन केतन को लौहगढ़ की पहाड़ी से धक्का देकर मारा गया, उसके बाद से मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए आपने तमाम कहानियां सुनीं. लेकिन आज पहली बार केतन मर्डर केस की असली कहानी आप पुलिस की जुबानी सुनेंगे. पुलिस की जुबानी इसलिए क्योंकि चार्जशीट की कहानी पुणे पुलिस ने ही लिखी है. तो पेश है केतन मर्डर केस और उसकी साजिश की सारी कहानी.
सिया गोयल का भाई क्रिकेट खेलने और क्रिकेट का मैच देखने का शौकीन था. पुणे में जब भी कोई टूर्नामेंट होता, वो मैच देखने चला जाता. ऐसे ही एक टूर्नामेंट के दौरान उसकी मुलाकात चेतन चौधरी से हुई. चेतन के पिता की मसाले की दुकान पुणे में उसी इलाके में है, जहां सिया के पिता का बिजनेस है. भाई के जरिए ही पहली बार 2025 में दिवाली से पहले सिया की चेतन चौधरी से मुलाकात हुई.
फिर दोनों में प्यार हो गया. इत्तेफाक से ये बात सिया के घर वालों को पता लग गई. हैसियत और रुतबे को देखते हुए सिया का परिवार चेतन से उसकी शादी करने के लिए तैयार नहीं था. पर सिया चेतन के प्यार में पागल थी. इसी दौरान सिया को चेतन से दूर करने के लिए सिया के घर वालों ने सिया के लिए लड़का देखना शुरू कर दिया. ये बात सिया को पता थी। पर सिया किसी और से शादी करना नहीं चाहती थी.
दिसंबर 2025 की बात है, सिया और चेतन अपने कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान जाने का प्लान करते हैं. उन्होंने पुणे से जयपुर का टिकट भी बुक करीदा. पर इत्तेफाक से उस दिन फ्लाइट कैंसल हो गई. फिर सिया चेतन और उसके दोस्त ट्रेन से जयपुर पहुंचे. वहां से सभी खाटू श्याम मंदिर गए. इसी मंदिर में सिया और चेतन ने शादी कर ली. इस शादी की जानकारी पुणे पुलिस को तब लगी, जब पुलिस ने सिया और चेतन के डिलिटेड मैसेज और फोटो को रिट्रीव कराने के बाद उन्हें देखा और पढ़ा.
सिया और चेतन के मोबाइल में उन्हें एक तस्वीर मिली. जिसमें दोनों एक दूसरे के गले में वरमाला डालते हुए नजर आ रहे हैं. केतन मर्डर केस के एक महीने बाद जुलाई में पुणे पुलिस खाटू श्याम मंदिर भी गई थी. लेकिन वहां से उन्हें सिया या चेतन की सीसीटीवी कैमरे में कैद कोई तस्वीर नहीं मिली. खाटू श्याम मंदिर से सिया, चेतन और उसके दोस्त उसी ट्रेन से वापस पुणे आ गए.
इधर, सिया गोयल के घरवाले उसके लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे. इत्तेफाक से सिया और केतन का परिवार एक दूसरे को लंबे अर्से से जानता था. दोनों परिवार के एक रिश्तेदार ने पहली बार सिया और केतन के रिश्ते का आइडिया दिया. चूंकि दोनों परिवार एक दूसरे को जानते थे, इसलिए वो इस रिश्ते के लिए राजी हो गए. ये बात जनवरी 2026 की है. रिश्ता तय होते ही फरवरी 2026 में सिया और केतन की सगाई कर दी गई.
घर वालों के दबाव के चलते सिया इस सगाई के लिए तो राजी हो गई, पर चूंकि वो पहले ही चेतन से शादी कर चुकी थी, इसलिए अब केतन से शादी करना नहीं चाहती थी. तब सिया और चेतन का प्लान यही था कि फिलहाल सगाई कर लेते हैं, शादी होने में साल-दो साल तो लग ही जाएंगे. लेकिन होता ये है कि सगाई के फौरन बाद सिया और केतन के घर वाले सगाई के नौ महीने बाद यानी नवंबर में शादी की तारीख भी तय कर देते हैं. यहीं से सारी कहानी बिगड़ जाती है.
अब सिया और चेतन चौधरी मिल कर किसी तरह शादी को पहले तो टलवाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब शादी की तारीख आगे बढ़ाने की बजाय घर वाले राजस्थान में शादी की बुकिंग तक करना शुरू कर देते हैं, तब सिया और चेतन घबरा जाते हैं. इस दौरान कई बार सिया केतन से इशारों-इशारों में शादी तोड़ने की बात भी करती है. शादी की तारीख बढ़ाने के लिए भी कहती है, लेकिन केतन राजी नहीं होता. उल्टा होता ये है शादी से 5 महीने पहले जून में ही केतन बाली में प्री वेडिंग शूट प्लान कर लेता है. इसके लिए केतन उसकी बहन और सिया और उसके भाई बाली जाना था. बस यही वो पल था, जब सिया और चेतन ने कोई आखिरी फैसला लेने का फैसला किया.
अब इस फैसले या प्लान में पहली बार चेतन के दोस्त ऋतेष हांगे की एंट्री होती है. एक सलाहकार के तौर पर. उसे ये सलाह देनी थी कि केतन से कैसे छुटाकारा पाया जाए? अब तीनों ने मिल कर प्लान बनाना शुरू किया. इसके लिए इन लोगों ने क्राइम थ्रिलर मूवी देखी, क्राइम के शोज़ देखे, क्राइम के पॉड कास्ट सुने, पुलिस से बचने के तरीके इंटरनेट पर ढूंढे और फिर ये फैसला लिया कि महाराष्ट्र के बाहर के किसी किलर को हायर कर या तो केतन के हाथ-पांव तुड़वा दें या फिर उसे जान से मार दें.
लेकिन फिर तीनों को ये आइडिया अच्छा नहीं लगा. उन्हें लगा कि कल को किराये का वो कातिल या बदमाश ना सिर्फ मुंह खोल सकता है, बल्कि उन्हें आगे भी लगातार ब्लैकमेल कर सकता है. इसी के बाद पहली बार ये तय हुआ कि केतन का जो कुछ होगा, वो खुद सिया और चेतन करेंगे.
अब सवाल था, कैसे? इत्तेफाक से जब सिया और चेतन की ये प्लानिंग चल रही थी, तब देश में सोनम रघुवंशी के किस्से हरेक की जुबान पर थे. सिया और चेतन ने अब सोनम के केस की स्टडी करनी शुरू कर दी. यही वो केस था, जिसके बाद उन्हें पहली बार अहसास हुआ कि अगर किसी को किसी सुनसान पहाड़ी से धक्का देकर नीचे गिरा दिया जाए, तो फंसने की गुंजाइश बहुत कम होगी. यानी पहाड़ी से धक्का देने का आइडिया इन्हें सोनम केस से ही आया. क्योंकि सोनम और किराए के उसके कातिलों ने राजा रघुवंशी को मेघालय में पहाड़ी से ही धक्का दिया था.
कत्ल का ये आइडिया आते ही अब सिया और चेतन ने लोकेशन ढूंढना शुरू कर दिया. इत्तेफाक से पुणे में सिया के घर से 40 किलोमीटर दूर ही लौहगढ़ का ये किला था. जिसकी ऊंचाई अच्छी खासी थी. अब सबसे पहले सिया और चेतन ने ये पता लगाना शुरू किया कि क्या कभी लौहगढ़ किले से गिर कर किसी की मौत हुई है? इत्तेफाक से दोनों को पता चला कि मार्च 2025 में एक महिला की लौहगढ़ किले से खाई में गिर कर मौत हो गई थी. ये पता चलते ही अब सिया और चेतन ने किले की रेकी करनी शुरू की. इस रेकी के दौरान वो किले के टाइगर प्वाइंट से लेकर उन सारे प्वाइंट्स को देखा, जहां लोगों की भीड़ कम होती है या लगभग सन्नाटा रहता है. और फिर आखिर में फाइनल प्वाइंट चुन लिया.
अब सिया केतन को लौहगढ़ ले जाने की कोशिश में जुटी थी. दो बार दोनों वहां तक गए भी. यहां तक कि 14 जून को सिया ने केतन को उसी जगह से धक्का देने की कोशिश भी की, लेकिन बीच में एक पेड़ आ जाने की वजह से केतन खाई में गिरने से बच गया. अब केतन की मौत की अगली तारीख 18 जून तय की गई. लेकिन सिया को शक था कि शायद उस दिन केतन उसके साथ लौहगढ़ किले तक नहीं जाएगा. इसके लिए भी उसने एक साजिश रची. उसने अपनी एक जानने वाली लड़की की तस्वीर के साथ एक फर्जी इंस्टाग्राम एकाउंट बनाया.
फिर केतन को बताया कि ये उसकी अच्छी दोस्त है. फिर खुद ही सिया उसके फेक एकाउंट से केतन से बात भी करने लगी. इसके बाद सिया की ये वही गुमनाम दोस्त थी, जिसके नाम पर केतन को इंस्टा पर मैसेज गया. मैसेज ये कि 18 जून को आप लौहगढ़ किले जरूर चलें, वहां सिया ने आपके लिए एक सरप्राइज बर्थ डे पार्टी रखी है. कहते हैं कि यही वो मैसेज था, जिसके बाद केतन किले तक जाने को तैयार हो गया. केतन की मौत के बाद सिया और चेतन ने इंस्टा का ये फेक आईडी डिलीट कर दिया था. लेकिन पुणे पुलिस ने फॉरेंसिक लैब की मदद से इसे वापस हासिल कर लिया.
अब तक केतन के कत्ल की प्लानिंग में सिया और चेतन के साथ हर कदम पर ऋतेष भी शामिल था. यहां तक कि ये भी तय था कि 18 जून को वो भी लौहगढ़ किले जाएगा. लेकिन पकड़े जाने के डर से ऐन वक्त पर ऋतेष पीछे हट गया। पर प्लान के हिसाब से सिया केतन के साथ और चेतन अकेले 18 जून की सुबह लौहगढ़ किला पहुंच चुके थे. सिया और केतन साथ-साथ चल रहे थे, जबकि चेतन हुडी में अपना चेहरा छुपाए पीछे-पीछे चल रहा था. चूंकि दोनों लोकेशन की रेकी कर चुके थे और पहले ही आपस में तय कर चुके थे, इसलिए पीछे चल रहे चेतन को पता था कि सिया और केतन कहां पर रुकेंगे.
फिर वो फाइनल प्वाइंट आया, सिया केतन को बातों-बातों में बिल्कुल पहाड़ी के एज यानी किनारे पर ले गई. फिर चुपके से एक इशारा किया, कुछ मीटर दूरी पर खड़ा चेतन इशारा मिलते ही तेजी से आगे बढ़ा, चेतन के करीब आते ही अब तक बातों में उलझाई सिया केतन को दोनों हाथों से जोर से धक्का देती है, इस धक्के से जैसे ही केतन लड़खड़ा कर संभलने की कोशिश करता है, तब तक चेतन आगे बढ़ता है और अपने एक पांव से उसे जोर का धक्का मारता है. केतन पहाड़ी से नीचे गिर पड़ता है। चेतन अब सिया को उसी जगह छोड़ तेज कदमों से वापस लौट जाता है.
जन्मदिन के बहाने केतन को बुलाया था
तो ये तो रही चार्जशीट की जुबानी पुलिस की कहानी. अब सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ कहानी ही है? या इस कहानी से जुड़े सबूत भी हैं. तो बकौल पुणे पुलिस इस पूरी कहानी से जुड़े हर सबूत चाहे वो गवाह की शक्ल में हों, मोबाइल की शक्ल में, व्हाट्स एप चैट, फोटो-वीडियो, मोबाइल डेटा, सीडीआर या सीसीटीवी की शक्ल में, वो सबकुछ उनके पास है. पुणे पुलिस को यकीन है कि सबूत इतने पुख्ता हैं कि सिया और चेतन के बचने की गुंजाइश ही नहीं.
वैसे केतन मर्डर केस में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर है कि क्या केतन की तरफ से जाने-माने वकील उज्जवल निकम इस केस की पैरवी करेंगें. केतन के पिता इस सिलसिले में पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मिल कर उनसे इस बारे में गुजारिश कर चुके हैं. खुद उज्जवल निकम ने इस बारे में आजतक से बातचीत के दौरान कहा था कि जब चार्जशीट दाखिल हो जाएगी तब वो इस केस की पैरवी करने के बारे में सोचेंगे. फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि अक्तूबर तक इस मुकदमे का ट्रयल शायद शुरू हो जाए. सिया, चेतन और रितेश तीनों ही इस वक्त पुणे की यरवडा जेल में बंद हैं.
शम्स ताहिर खान