पुणे के लोहगढ़ किले में 26 वर्षीय केतन विशाल अग्रवाल की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं. अब केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने दावा किया है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि बेटे की हत्या की साजिश पहले से रची जा रही थी.
परिजनों के अनुसार, 18 जून को सिया गोयल ने 19 जून को अपना जन्मदिन मनाने का हवाला देकर केतन को लोहगढ़ किले चलने के लिए तैयार किया था. सुबह करीब 8:20 बजे दोनों घर से निकले. परिवार को लगा कि वे सामान्य रूप से घूमने जा रहे हैं, लेकिन कुछ घंटों बाद सब कुछ बदल गया. करीब 10:45 बजे सिया की मां का फोन आया और बताया गया कि केतन किले की घाटी में गिर गया है. यह खबर सुनते ही परिवार के लोग घबराकर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. केतन की मौत हो चुकी थी.
सिया का चेहरा देख हुआ शक
विशाल अग्रवाल का कहना है कि शुरुआत से ही उन्हें इस घटना पर संदेह था. उनके मुताबिक, जब केतन का शव घर लाया गया तो परिवार शोक में डूबा हुआ था, लेकिन सिया के चेहरे पर उन्हें वैसा दुख या सदमा दिखाई नहीं दिया, जैसा ऐसी स्थिति में होना चाहिए था. यही बात उनके मन में लगातार सवाल पैदा करती रही.
सिया ने 14 जून को भी की थी मारने की कोशिश
पिता का आरोप है कि केतन की हत्या की कोशिश पहली बार 14 जून को ही की गई थी. उस दिन भी सिया और केतन लोहगढ़ किले गए थे. परिवार का दावा है कि वहां सिया ने केतन को धक्का दिया था. धक्का लगने के बाद केतन पीछे की ओर फिसल गया, लेकिन उसका हाथ झाड़ियों में फंस गया और उसकी जान बच गई. बाद में सिया ने कथित तौर पर 'सांप आया, सांप आया' कहकर शोर मचाया और यह जताने की कोशिश की कि उसने उसे बचाने के प्रयास में धक्का दिया था.
परिजनों का कहना है कि उस समय केतन को भी महसूस हो गया था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है. अब परिवार का आरोप है कि 14 जून की घटना पहली असफल कोशिश थी और 18 जून को उसी साजिश को अंजाम दिया गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सामने आए सभी आरोपों व साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है.
श्रीकृष्ण पांचाल