पैनकार्ड क्लब लिमिटेड केस में ED का बड़ा एक्शन, 646 करोड़ से ज्यादा की 211 संपत्तियां अटैच

पैनकार्ड क्लब लिमिटेड में ED ने PMLA के तहत 646.58 करोड़ रुपये की 211 अचल संपत्तियां अटैच की हैं. मामला 51 लाख से ज्यादा निवेशकों से जुड़ी कथित पोंज़ी स्कीम का है. पढ़ें पूरी कहानी.

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ED ने इस मामले में 211 संपत्तियां अटैच की हैं (फोटो-ITG) ED ने इस मामले में 211 संपत्तियां अटैच की हैं (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पैनकार्ड क्लब लिमिटेड और अन्य से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत करीब 646.58 करोड़ रुपये की 211 अचल संपत्तियां अनंतिम रूप से अटैच की हैं. इन संपत्तियों में कमर्शियल ऑफिस स्पेस, लग्जरी होटल, ऑपरेशनल रिसॉर्ट, कृषि भूमि और रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं. ये प्रॉपर्टीज महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और दादरा एवं नगर हवेली में स्थित हैं.

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ED के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियां पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड (PCL), पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड और उनकी अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनियों के नाम पर हैं. इसके अलावा कुछ संपत्तियां परिवार के सदस्यों और लाभकारी मालिकों के नाम पर भी बताई गई हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों में उस रकम का निवेश किया गया, जिसे इस मामले में 'अपराध से हुई कमाई' माना गया है. ED की यह कार्रवाई ऐसी संपत्तियों के आगे ट्रांसफर या बिक्री को रोकने के लिए की गई है.

कैसे शुरू हुई ED की जांच?

इस मामले में ED की जांच PMLA के प्रावधानों के तहत शुरू हुई थी. इसकी शुरुआत दादर पुलिस स्टेशन, मुंबई में पैनकार्ड क्लब लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दर्ज FIR से हुई थी. बाद में यह मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर किया गया. EOW ने 31 दिसंबर 2021 को मुंबई की विशेष MPID कोर्ट के सामने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी.

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जांच के दौरान ED ने पैनोरमिक ग्रुप से जुड़ी 46 कॉर्पोरेट संस्थाओं के नेटवर्क की जानकारी जुटाई. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों के जरिए 'Sale of Room Nights' और टाइमशेयर हॉलिडे मेंबरशिप की आड़ में कथित अवैध Ponzi Schemes चलाई गईं. इन योजनाओं में भारत भर के 51 लाख से ज्यादा निवेशकों को कथित तौर पर अवास्तविक रिटर्न का भरोसा दिया गया. जांच के मुताबिक, बड़ी संख्या में निवेशकों से रकम जुटाई गई, लेकिन पूरी रकम उन्हें वापस नहीं की गई.

ED की जांच के मुताबिक, पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 1997-98 से 2017-18 के बीच निवेशकों से करीब 9,577 करोड़ रुपये जुटाए. इस कुल रकम में से करीब 2,858 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं को वापस किए गए, जबकि लगभग 2,332 करोड़ रुपये एजेंट कमीशन के तौर पर दिए गए. जांच एजेंसी के अनुसार, इसके बाद करीब 4,387 करोड़ रुपये की रकम आरोपी कंपनियों और मुख्य व्यक्तियों के पास बची रही. ED ने इस रकम को मामले में 'Proceeds of Crime' के तौर पर चिन्हित किया है.

जांच में यह भी सामने आया कि कथित गैर-कानूनी फंड को कई शेल और डमी कंपनियों के जरिए अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर किया गया. ED ने मेसर्स शगुन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का भी उल्लेख किया है. इसके बाद यह रकम पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड और उसकी घरेलू तथा विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों समेत दूसरी संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाई गई. एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर रकम की परतें बनाई गईं और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई.

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ED के मुताबिक, कथित 'Proceeds of Crime' का इस्तेमाल भारत और विदेशों में महंगी रियल एस्टेट प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया. इनमें रिसॉर्ट, कमर्शियल यूनिट और अन्य रियल एस्टेट संपत्तियां शामिल हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि ऐसी संपत्तियां ग्रुप की कंपनियों, डायरेक्टरों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं. इसके बाद कथित तौर पर इन्हें वैध या साफ-सुथरी संपत्तियों के तौर पर पेश किया गया.

जांच में संपत्तियों के कथित गैर-कानूनी ट्रांसफर का मामला भी सामने आया. ED के अनुसार, SEBI और MPID अधिकारियों की ओर से पहले ही अटैच की जा चुकी संपत्तियों को बेचने की कोशिश की गई. एजेंसी ने इसे कानूनी कार्रवाई में बाधा डालने की जानबूझकर की गई कोशिश बताया है. इसी तरह के एक मामले में रायगढ़ के पनवेल स्थित काल्हे गांव की 7.08 हेक्टेयर जमीन का कथित तौर पर बिना अधिकार ट्रांसफर किया गया.

ED के मुताबिक, काल्हे गांव की इस जमीन के ट्रांजैक्शन के लिए ऐसी कंपनी का इस्तेमाल किया गया था, जिसे कंपनी रजिस्टर से पहले ही हटाया जा चुका था यानी वह एक 'struck-off entity' थी. एजेंसी के अनुसार, इस ट्रांजैक्शन के लिए एक कथित फर्जी बोर्ड रिजॉल्यूशन का इस्तेमाल किया गया. इस दस्तावेज में दिवंगत डायरेक्टर उषा अरुण तारी के हस्ताक्षर बताए गए हैं, जबकि उनका निधन 11 सितंबर 2018 को हो चुका था.

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ED ने इन घटनाक्रमों को देखते हुए संपत्तियों के आगे गैर-कानूनी ट्रांसफर या बिक्री को रोकने के लिए PMLA की धारा 5(1) के तहत प्रोविज़नल अटैचमेंट की कार्रवाई की. इस कार्रवाई के तहत अब 211 अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से अटैच किया गया है. इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 646.58 करोड़ रुपये बताई गई है. संपत्तियों में कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्र में मौजूद अलग-अलग तरह की प्रॉपर्टीज शामिल हैं.

इससे पहले ED ने साल 2025 में भी इस मामले में प्रोविज़नल अटैचमेंट की कार्रवाई की थी. उस कार्रवाई में पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड और दिवंगत सुधीर मोरावेकर की विदेशी सब्सिडियरी से जुड़ी भारत के बाहर स्थित 30 अचल संपत्तियों को अटैच किया गया था. ये संपत्तियां अमेरिका (USA), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और थाईलैंड में स्थित थीं. इन विदेशी संपत्तियों की कीमत करीब 54.31 करोड़ रुपये बताई गई थी.

ED के मुताबिक, साल 2025 में की गई इस प्रोविज़नल अटैचमेंट की कार्रवाई की पुष्टि संबंधित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 9 अक्टूबर 2025 को की थी. अब 646.58 करोड़ रुपये की 211 संपत्तियों की नई कार्रवाई के बाद इस मामले में ED की ओर से PMLA के तहत अब तक अनंतिम रूप से अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत करीब 700.89 करोड़ रुपये हो गई है. यह आंकड़ा भारत और विदेशों में की गई दोनों अटैचमेंट कार्रवाइयों को मिलाकर है.

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