346 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला, ED ने तीन राज्यों में की छापेमारी, गुरुग्राम की कंपनी से जुड़ा है मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों ने बताया कि ईडी के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने इस जांच के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पांच परिसरों, चेन्नई में तीन और बेंगलुरु में एक परिसर की तलाशी ली.

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ED ने इस मामले में तीन राज्यों में छापेमारी की है (फोटो-ITG) ED ने इस मामले में तीन राज्यों में छापेमारी की है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • गुरुग्राम,
  • 10 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 8:50 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को हरियाणा में मौजूद एक बिजली क्षेत्र की कंपनी और उसके प्रवर्तकों द्वारा कथित तौर पर 346 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु और कर्नाटक में छापेमारी की. ईडी के आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी.

ईडी की यह जांच गुरुग्राम स्थित हाइथ्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और उसके निदेशकों अमूल गबरानी और अजय कुमार बिश्नोई के अलावा कुछ अन्य के खिलाफ की जा रही है. एचपीसीएल परिसमापन के दौर से गुज़र रही है. 

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धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज ईडी का मामला फरवरी 2025 में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें प्रवर्तकों पर आरोप है कि उन्होंने ऋण राशि को अपनी कुछ संबद्ध संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया, जिससे बैंकों को नुकसान हुआ.

सूत्रों ने बताया कि ईडी के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने इस जांच के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पांच परिसरों, चेन्नई में तीन और बेंगलुरु में एक परिसर की तलाशी ली.

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता बैंकों द्वारा घोषित कथित धोखाधड़ी की राशि 346.08 करोड़ रुपये है, जिसमें पीएनबी द्वारा 168.07 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक द्वारा 77.81 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक द्वारा 44.49 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक द्वारा 55.71 करोड़ रुपये शामिल हैं.

यह धोखाधड़ी 2009 और 2015 के बीच हुई बताई गई है. एक विद्युत पारेषण और वितरण क्षेत्र की कंपनी एचपीसीएल विद्युत पारेषण लाइनों के लिए टर्नकी परियोजनाओं के डिजाइन, निर्माण और निर्माण में लगी हुई थी.

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आरोप है कि कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों ने बहु-बैंकिंग व्यवस्था के तहत कंसोर्टियम के अग्रणी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से कुल 165.71 करोड़ रुपये की ऋण सुविधाएं हासिल कीं.

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि बैंक गारंटियों को वित्तपोषित ब्याज सावधि ऋण (FITL) में बदलने सहित कई पुनर्गठनों के बावजूद, एचपीसीएल ने डिफ़ॉल्ट किया और 31 मार्च, 2015 को इसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया. और बाद में 13 जून, 2024 को आरबीआई को धोखाधड़ी के रूप में रिपोर्ट किया गया.

एक फोरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि अवध ट्रांसफॉर्मर्स, जी.ई.टी. पावर, रेवोल्यूशन इन्फोकॉम, टेकप्रोइंजीनियरिंग और अन्य समूह कंपनियों के साथ काल्पनिक जॉब वर्क, अवैतनिक प्राप्तियों और सर्कुलर लेनदेन के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई.

कई बड़े अग्रिम और बिक्री चालान वर्षों तक वसूल नहीं किए गए, जो गैर-वास्तविक व्यापारिक सौदों का संकेत देते हैं. एजेंसी ने आरोप लगाया कि एचपीसीएल ने धन को दूसरी जगह भेजने और संपत्तियों का दुरुपयोग करने के लिए संबंधित संस्थाओं का इस्तेमाल किया, जिससे लेनदारों के हितों का क्षरण हुआ.

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