कैंसर की नकली दवा बनाने वालों पर अब ED का एक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज, छापेमारी में मिला 65 लाख कैश

ED ने इस गिरोह से जुड़े आरोपी विफल जैन, सूरज शत, नीरज चौहान, कोमल तिवारी, अभिनय, परवेज मालिक और तुषार चौहान के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की है. सर्च के दौरान ईडी की टीम ने 65 लाख रुपये की नकदी जब्त की है.

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कैंसर की नकली दवा बनाने वाले रैकेट के 8 लोग पकड़े गए थे कैंसर की नकली दवा बनाने वाले रैकेट के 8 लोग पकड़े गए थे

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

दिल्ली में कैंसर की नकली दवाइयों का खुलासा होने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी. अब उसी FIR को आधार बनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है. इसी के साथ इस मामले में ईडी ने छापेमारी भी शुरू कर दी है. दिल्ली एनसीआर में दस ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. अभी तक छापेमारी में 65 लाख रुपये की नकदी बरामद हो चुकी है.

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कई ठिकानों से कैश बरामद
दरअसल, जांच में खुलासा हुआ कि ये एक संगठित गिरोह है, जो कैंसर की नकली दवा बनाता और बेचता है. ईडी ने इस मामले में इस गिरोह से जुड़े आरोपी विफल जैन, सूरज शत, नीरज चौहान, कोमल तिवारी, अभिनय, परवेज मालिक और तुषार चौहान के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की है. सर्च के दौरान ईडी की टीम ने 65 लाख रुपये की नकदी जब्त की है. 

बीन बैग में छिपाए थे 23 लाख 
इसमें आरोपी सूरज शत के घर में बीन बैग में छिपाकर रखे गए 23 लाख रुपये भी शामिल हैं. इसके अलावा, संदिग्धों के कब्जे से चल और अचल संपत्तियों के बारे में कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. तलाशी और छापेमारी की कार्रवाई अभी जारी है. 

ये है पूरा मामला
आपको बता दें कि दिल्ली में कैंसर की नकली दवा का कारोबार जोरो पर है. जिसके चलते नकली दवा का बड़ा खेल करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. जिसकी हकीकत सामने आने पर हर कोई दहल गया था. दिल्ली पुलिस के कब्जे में ऐसे शातिर आए हैं, जिनके पास शर्तिया मौत का पक्का इलाज है. गुरुग्राम साउथ सिटी के एक फ्लैट में दवाओं का वो स्टॉक रखा गया था, जिससे मरीज तो बेहाल हो जाए और उसके तीमारदार कंगाल. 

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असल में ये समाज को वो कैंसर हैं, जो कैंसर की दवा के नाम पर जिंदगी को सरेआम मौत के हवाले करने का धंधा कर रहे थे. ये वो गैंग है जो दिल्ली में बैठकर दिल्ली के बाहर से यहां अपने मरीजों के कैंसर का इलाज करवाने आए लोगों को शिकार बनाता था. उन्हें कैंसर का सस्ता इलाज और सस्ती दवाओं का झांसा दिया जाता था. इस गैंग के काले कारनामों का खुलासा सुनकर आपको घिन आने लगेगी. दिल्ली के अस्पतालों के बाहर दिखने वाली भारी भीड़ में इस गैंग के लिए आसान शिकार मिल जाते हैं. 

नकली दवा बेचने वाला असली गिरोह
असल में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस रैकेट में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें से दो आरोपी दिल्ली के बड़े कैंसर अस्पताल के कर्मचारी हैं. पुलिस ने जब गुरुग्राम के एक फ्लैट में छापा मारा तो वहां मौजूद आरोपियों के पास से कैंसर की कुल नौ ब्रांड्स की नकली दवाइयां बरामद हुईं. इनमें से सात दवाइयां विदेशी ब्रांड्स की हैं जबकि दो भारत में बनाई जाने वाली नकली दवाइयां हैं.

विदेशी मरीजों को भी बनाते थे शिकार
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. उनकी शिनाख्त विफल जैन, सूरज शत, नीरज चौहान, प्रवेज, कोमल तिवारी, अभिनय कोहली और तुषार चौहान के तौर पर हुई है. इनमें से नीरज चौहान गुरुग्राम का रहने वाला है, जबकि बाकी आरोपी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपियों के टारगेट पर दिल्ली के बाहर से आने वाले मरीज होते थे, खासतौर से हरियाणा, बिहार, नेपाल या फिर अफ्रीकी देशों से आने वाले मरीजों को वे अपना शिकार बनाते थे.

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ऐसे तैयार होती थी कैंसर की नकली दवा
अभी तो ये महज शुरूआत है. पुलिस को अंदेशा है कि अभी इस गैंग के जरिए इनके बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है. ये गैंग कितना बड़ा है. इसने कहां-कहां दवाएं सप्लाई की. किन-किन लोगों को दवाएं दी. इसकी जांच जारी है. अब ये समझने की कोशिश करते हैं कि ये गैंग काम कैसे करता था. इस केस में कुल 3 ज्वाइंट हैं. असली दवाओं की खाली शीशी. जो कैंसर अस्पताल से मिलती थी. फिर उसी शीशी में टॉक्सिक दवाई भरते थे. ब्रांडेड कंपनियों के स्टीकर सील मुहर लगाकर पैकिंग करते थे. और ऐसे तैयार हो जाती थी कैंसर की नकली दवा.

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