यूपी के आजमगढ़ में मौजूद है शंभूपुर गांव. उस रोज आधी रात का वक़्त था. लेकिन रात के सन्नाटे की जगह गांव में चारों तरफ पुलिस और कमांडोज़ का डेरा था. रह-रह कर सुनाई देती गोलियों और सायरन की आवाज. और फिजा में अजीब सी बेचैनी. शंभूपुर के एक मकान के अंदर से आई खबर ने आस-पास के दस थानों की पुलिस के साथ-साथ एटीएस और एसओजी की टीमों को भी इसके इर्द-गिर्द ला खड़ा कर दिया था. सौ से ज्यादा पुलिस के जवान और कमांडोज़ उस मकान को घेर चुके थे.
पुलिस चारों तरफ से मकान की मैपिंग करने में जुटी है, ताकि बगैर किसी खून खराबे के इस एपिसोड का अंत किया जा सके. लेकिन मामला इतना आसान नहीं लग रहा था. मकान के अंदर एक हथियारबंद शख्स तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ मौजूद था और वो रह-रह कर मासूमों की जान लेने की धमकी दे रहा था. उसका कहने है कि पुलिस यहां से वापस चली जाए, वरना वो बच्चों को गोली मार देगा.
यहां एक छोटी सी गलती भी बच्चों की जिंदगी छीन सकती थी. लिहाजा, पुलिस के अफसर थोड़ी-थोड़ी देर में कमरे के अंदर मौजूद शख्स से बातचीत करने की कोशिश करते रहे, उसे समझाने-बुझाने का सिलसिला चलता रहा. लेकिन हर कोशिश के बाद अंदर से जवाब 'ना' में आता रहा. लेकिन करीब सात घंटे के मान-मनौव्वल के बाद रात के एक बजते-बजते कुछ ऐसा हुआ कि पुलिस सही मायने में एक्शन में आ गई.
पहले कमरे में स्मोक ग्रेनेड फेंका गया, फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर शूटआउट की शुरुआत हो गई. और जब तक इस सिलसिले का अंत हुआ, मकान के अंदर से बच्चों को बंधक बनाने वाले शख्स की लाश के साथ-साथ 9 साल का एक बच्चा लहूलुहान हालत में बरामद हुआ. जिसकी आखिरकार अस्पताल पहुंचते-पहुंचते जान चली गई.
लेकिन ये कहानी बस इतनी सी नहीं है, बल्कि इन दो मौतों के साथ-साथ इस मकान में मरने वालों की तादाद 5 पांच तक जा पहुंची. जिनमें चार लोग तो एक सिरफिरे शख्स की गोलियों का शिकार बने, जबकि पांचवीं मौत पुलिस की गोलियों से खुद उस सिरफिरे कातिल की हुई.
करीब आठ घंटे पहले तक गांव शंभूपुर के उस मकान में पूजा-पाठ और मंत्रोच्चारण का सिलसिला चल रहा था. महामृत्युंजय मंत्र के स्वर गूंज रहे थे. हवा में हवन की खुशबू थी. लेकिन अब इसी मकान में सन्नाटा पसरा है. जगह-जगह खून के छींटें हैं. और अगर कुछ बाकी है, तो वो है रह-रह कर आती रोने बिलखने की ये आवाज़ें. चप्पे चप्पे पर मौजूद पुलिस वाले.
लेकिन एक ऐसे घर में जहां मंगलवार शाम तक माहौल खुशनूमा था, पूजा-पाठ चल रहा था, आखिर वहां एकाएक ऐसा क्या हुआ कि हालात इतने बदल गए? तो सुनिए, उसी मकान के मुखिया ने पूजा-पाठ और मंत्रोच्चारण के बीच अचानक घर में आए पुजारियों पर ऐसा हमला बोला कि इस हमले में पहले उसने एक-एक कर तीन लोगों की जान ली और फिर अपने ही तीन छोटे-छोटे बच्चों को बंधक बना कर एक कमरे में बंद हो गया. और इस खून-खराबे का अंत उसी सिरफिरे शख्स के 9 साल के छोटे से बेटे और खुद सिरफिरे की मौत के साथ हुआ. चलिए सिलसिलेवार तरीके से आपको पूरी कहानी बताते हैं.
शंभूपुर में मौजूद है श्यामबाला देवी का मकान. जहां बुजुर्ग श्यामबाला अपने 42 साल के बेटे अरविंद सिंह, उसकी पत्नी बबीता और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी. 9 साल का बेटा शौर्य, 5 साल की परी और महज 7 महीने की एक और छोटी सी बच्ची के साथ. पिछले कई सालों से अरविंद की मानसिक स्थिति खराब थी और उसे पूजा-पाठ जैसी बातों से सख्त चिढ़ थी. लेकिन उसी की मानसिक स्थिति को ठीक करने की कामना से अरविंद की मां श्यामबाला और उसकी पत्नी बबीता ने घर में चार दिनों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप रखवाया था. जिसकी शुरुआत शनिवार यानी 19 सितंबर को हुई.
चार दिन बाद मंगलवार को ही इस यज्ञ की पूर्णाहूति होनी थी. यानी पूजा संपन्न होनी थी. लेकिन इससे पहले ही अरविंद के दिमाग पर इस पूजा को लेकर ऐसा खून सवार हुआ कि उसने एकाएक कुछ ऐसा किया, जो किसी ने सोचा ना था. मंगलवार को अरविंद कहीं बाहर गया हुआ था. इधर, घर में पूजा पाठ चालू था. लेकिन शाम को वो जैसे ही घर लौटा, हवन-पूजन के सिलसिले को देखते हुए गुस्से में पागल हो गया और सीधे घर आए पुजारियों से ही उलझ पड़ा.
उनसे आधार कार्ड मांगने लगा. पुजारी भी कहीं दूर-दराज के नहीं, बल्कि उसी शंभूपुर गांव के रहने वाले थे. सभी एक-दूसरे को जानते थे. ऐसे में पुजारियों ने अरविंद से पूछा कि जब वो जानता है कि वो कौन हैं, तो फिर उसने आधार कार्ड मांगने क्या तुक है? बस इतनी सी बात पर अरविंद ने 60 साल के बुजुर्ग पुजारी महेंद्र पाठक और 55 साल के उनके भाई अखिलेश मिश्रा को पीटने की कोशिश की.
लेकिन ये तो बस शुरुआत थी. पुजारियों पर हमला होता हुआ देख अरविंद की पत्नी बबीता ने बीच-बचाव करने की कोशिश की और तभी अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से उसने बबीता पर फायरिंग कर दी. अरविंद का ये रूप देख कर घर आए पुजारी भागने लगे. लेकिन उसने पीछा कर दो पुजारियों महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को भी गोली मार दी, जबकि एक पुजारी उनके घर की दीवार कूद कर भागने में कामयाब रहा. उसने किसी तरह अपनी जान बचाई.
इतने राउंड की फायरिंग और एकाएक घर में हुए तीन-तीन कत्ल के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया. लोगों ने पुलिस को खबर दी और अगले ही पल सिर्फ आजमगढ़ पुलिस का अच्छा-खासा लवाजमा मौके पर पहुंच गया. लेकिन तीन जान ले चुके अरविंद का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ था. इतना कुछ होने के बाद भी उसने हथियार डालने या मौके से भागने की बजाय अपने ही तीनों बच्चों को एक कमरे में बंधक बना लिया. उसने पुलिस वालों को वहां से लौट जाने की चेतावनी दी और कहा कि अगर पुलिस ने उसकी बात नहीं मानी तो वो अपने बच्चों की जान ले लेगा.
फिर तो शाम से ही कमरे में बंद अरविंद को समझाने-बुझाने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो मंगलवार और बुधवार की देर दरम्यानी रात तक चलता रहा. सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि खुद अरविंद की मां श्यामबाला देवी, उसके रिश्तेदारों और यहां तक कि गांव वालों ने भी अरविंद को समझाने-बुझाने की काफी कोशिश की. लेकिन वो टस से मस होने को तैयार नहीं था. वो बस एक ही रट लगाए हुए था कि पुलिस वहां से वापस चली जाए, वरना वो बच्चों की भी जान ले लेगा.
हालात बिगड़ते देख कर अब 10 थानों की फोर्स को मौके पर बुला लिया गया था. एटीएस और एसओजी की टीमें पोजिशन ले चुकी थीं और बच्चों को सिरफिरे बाप के कब्जे से छुड़ाने की कोशिश चल रही थी. लेकिन तभी रात के एक बजे अरविंद ने कथित तौर पर एक गोली चलाई, जो उसके 9 साल के इकलौते बेटे शौर्य को लगी और वो लहूलुहान होकर नीचे गिर पड़ा.
बस, इसके बाद पुलिस ने पहले स्मोक ग्रेनेड का और फिर टियर गैस यानी आंसू गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगी. लेकिन अंदर से अरविंद ने फिर से फायरिंग चालू कर दी और कम से कम छह राउंड गोलियां चलाईं. जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और आखिरकार पुलिस की गोली से अरविंद मारा गया. इसके बाद पुलिस ने अंदर फंसे तीनों बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन तब तक 9 साल के बच्चे शौर्य की जान जा चुकी थी.
अब सवाल ये था कि आखिर अरविंद को पूजा-पाठ से इतनी सख्त नफरत क्यों थी? और आखिर क्यों अरविंद की इस नफरत को जानते हुए भी उसकी मां और बीवी ने घर में चार दिनों के महामृत्युंजय यज्ञ का आयोजन किया?
तो इस कहानी का कनेक्शन 8 साल पुरानी खून खराबे की एक और वारदात से जुड़ता है. खबरों के मुताबिक उन दिनों अरविंद की पत्नी बबीता का अपने ही एक चचेरे देवर मनीष के साथ अफेयर चल रहा था. इसकी जानकारी अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह को हो गई थी. सुनील इसका विरोध करता था. सुनील के कहने पर ही बबीता ने तब अपने कथित प्रेमी मनीष के खिलाफ रेप का केस दर्ज करवाया था.
कहते हैं इसी रेप केस का बदला मनीष और उसके भाई अविनाश ने सुनील की हत्या से लिया. साल 2018 में सुनील सिंह की हत्या तब हुई, जब वो मंदिर में पूजा करने जा रहे थे. बस यही वो दिन था और यही वो वजह थी कि अरविंद को पूजा-पाठ से नफरत हो गई. यहां तक कि अरविंद उन्हीं दिनों से अपनी पत्नी बबीता को भी नापसंद करने लगा था. लेकिन फिर भी जिंदगी जैसे तैसे चल रही थी.
अपने भाई सुनील सिंह की हत्या का अरविंद के दिलो-दिमाग पर बहुत गहरा असर पड़ा और वो सबसे कटा-कटा रहने लगा. यहां तक कि उसने अपने बचन के दोस्तों से भी मिलना-जुलना और बातचीत करना बंद कर दिया. उधर, अरविंद के बड़े भाई सुनील के पास जो दो लाइसेंसी हथियार थे, उन हथियारों में से एक लाइसेंसी रिवॉल्वर अरविंद को मिल गया. जबकि एक हथियार सुनील की पत्नी को मिला.
हालांकि सुनील की पत्नी अपने पति की मौत के बाद अपने चार बेटियों को लेकर दिल्ली चली गई और वहीं रहने लगी. अरविंद ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले कभी भी उस लाइसेंसी रिवॉल्वर का दुरुपयोग नहीं किया था. लेकिन ये भी सच है कि वो मानसिक रूप से बीमार हो चुका था. यहां तक कि उसका इलाज भी चल रहा था. कुछ लोग इसे उस पर अपने भाई का साया होने की बात भी कहते थे.
इन हालात में अरविंद की मां श्यामबाला और पत्नी बबीता ने उसकी बेहतरी के लिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करवाने का फैसला किया था और घर में पूजा-पाठ देख कर अरविंद का दिमाग कुछ ज्यादा ही खराब हो गया. शनिवार को जब से घर में हवन पूजन की शुरुआत हुई थी, वो तभी से इसे रोकने की मांग कर रहा था. पुजारियों को भगा रहा था. लेकिन पुजारी कर्मकांड में लगे थे.
आखिर चार दिन गुजरते-गुजरते पूर्णाहूति के रोज अरविंद हिसंक हो उठा और उसने पुजारियों को पीटने की कोशिश की. इसके बाद जब उसने अपनी पत्नी बबीता को पहली गोली चलाई, तो ये कहते हुए चलाई कि तुम्हारी वजह से ही मेरे भाई की हत्या हो गई. फिर इसके बाद तो जो कुछ हुआ, वो आप जानते ही हैं.
(आजमगढ़ से राजीव कुमार के साथ संतोष शर्मा का इनपुट)
aajtak.in