कोरोनाः टीके की कमी दूर करने की कवायद, विदेशों से वैक्सीन आयात कर सकती है केंद्र सरकार

देश में जारी वैक्सीन की कमी को दूर करने के लिए और वैक्सीनेशन में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार विदेशों से वैक्सीन आयात करने की तैयारी कर रही है. सरकार की कई विदेशी कंपनियों से वैक्सीन के आयात को लेकर बात चल रही है.

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कम समय में ज्यादा से ज्यादा आबादी को वैक्सीनेट करना चाहती है सरकार (फाइल फोटो-PTI) कम समय में ज्यादा से ज्यादा आबादी को वैक्सीनेट करना चाहती है सरकार (फाइल फोटो-PTI)

स्नेहा मोरदानी

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2021,
  • अपडेटेड 12:07 PM IST
  • वैक्सीनेशन में भी तेजी लाने की कोशिश
  • कई कंपनियों से सरकार की बातचीत जारी
  • अब तक 20.86 करोड़ को वैक्सीन लगी

देश में कोरोना संक्रमण के खिलाफ वैक्सीनेशन प्रोग्राम को शुरू हुए 5 महीने से ज्यादा हो चुके हैं. अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज लगाई जा चुकी है. सरकार ने जब से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी दी है, तब से ही वैक्सीन की कमी की बातें सामने आ रही हैं.

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दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी दूर करने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए थे लेकिन कंपनियों ने ये कहते हुए वैक्सीन देने से मना कर दिया था कि वो सिर्फ केंद्र सरकार से ही डील कर सकती हैं. अब जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार भी वैक्सीन आयात करने की तैयारी कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, देश में वैक्सीन की कमी को दूर करने और वैक्सीनेशन में तेजी लाने के लिए विदेशों से वैक्सीन आयात कर सकती है. हाल ही में अमेरिकी कंपनी फाइजर ने भारत को अगले कुछ महीनों में 5 करोड़ डोज देने की बात कही है. इसी तरह जिन वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी हैं, उन्हें आयात किया जा सकता है ताकि वैक्सीनेशन में तेजी लाई जा सके. 

वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में ही नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड​​​​-19 (NEGVAC) का गठन कर दिया था. वैक्सीन की उपलब्धता के लिए NEGVAC के जरिए सरकार फाइजर, मॉडर्ना जैसी कई कंपनियों से लगातार बातचीत कर रही है. सरकार का जोर न सिर्फ देश में वैक्सीन के प्रोडक्शन को बढ़ाने पर है, बल्कि विदेशी कंपनियों से वैक्सीन आयात करने की कोशिश पर भी है.

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भारत के लिए वैक्सीन आयात करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारे देश की आबादी करीब 1.4 अरब है और कोरोना को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा आबादी को वैक्सीनेट करना जरूरी है. क्योंकि अभी देश में सिर्फ तीन वैक्सीन को ही मंजूरी मिली है, इसलिए विदेशों से वैक्सीन आयात कर आबादी को वैक्सीनेट करने की तैयारी की जा रही है, ताकि कम वक्त में ही ज्यादा से ज्यादा आबादी को वैक्सीनेट किया जा सके.

भारत में इस वक्त तीन वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है. पहली वैक्सीन है कोविशील्ड, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है और दूसरी है कोवैक्सीन, जिसे भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के साथ मिलकर बनाया है. तीसरी वैक्सीन है स्पुतनिक-V, जिसे इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिल गई है. ये रूसी वैक्सीन है, जिसे भारत की डॉ. रेड्डी लैब बना रही है.

मई में कोविशील्ड और कोवैक्सीन के 7.92 करोड़ डोज बनाए गए हैं. वहीं, स्पुतनिक-V अभी कुछ चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में लग रही है और जल्द ही इसे बाकी दूसरी प्राइवेट अस्पतालों में लगाने की तैयारी चल रही है.

देश में 16 जनवरी से वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हुआ था. 28 मई तक 133 दिन हो चुके हैं. सरकार अब तक 20.86 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगा चुकी है. इनमें से 4.40 करोड़ ऐसे हैं जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है, जबकि 16.45 करोड़ को एक डोज दी जा चुकी है. 

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