Gold 50% Fall Prediction: सोने की कीमत हो जाएगी आधी? एक्सपर्ट्स ने कहा- दो बार हो चुकी है, जानिए कारण

Gold Correction: सोने में 50 फीसदी तक गिरावट के पीछे एक्सपर्ट्स 1980 और साल 2012-13 का हवाला दे रहे हैं. मौजूदा दौर की बात करें तो जनवरी 2026 में सोने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,595 प्रति औंस का नया ऑल-टाइम हाई छुआ था.

Advertisement
सोने में बड़ी गिरावट की आशंका. (Photo: ITG) सोने में बड़ी गिरावट की आशंका. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

सोने (Gold) को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध गहराता जा रहा है. संकट के समय लोगों सोने में निवेश करते हैं. लेकिन फिलहाल सोने की कीमतों में दबाव देखने को मिल रही है. सोने का भाव इसी साल जनवरी में 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जो कि ऑल टाइम हाई है.

Advertisement

दरअसल, जनवरी में ऑल टाइम हाई लगाने के बाद सोना 25 फीसदी से ज्यादा लुढ़क चुका है. फिलहाल 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1.41 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है. इस बीच सोने को लेकर तमाम एक्सपर्ट्स बुलिश नजर नहीं आ रहे हैं. कुछ एक्सपर्ट्स बड़ी गिरावट की आशंका जता रहे हैं. ऐसे में निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा है कि आगे सोने की चाल कैसी रहने वाली है. 

क्या सच में सोना 50% तक गिर जाएगा?
दरअसल, CoinCodex जैसे कुछ टेक-इंडिकेटर्स ने इंटरनेशनल मार्केट में इस साल के अंत तक सोना $2,780 के स्तर तक यानी जनवरी के हाई से लगभग 50% नीचे जाने की आशंका जताई है. लेकिन बड़े एक्सपर्ट्स खासकर Goldman Sachs और J.P. Morgan का कहना है कि सोना $3,800 से $4,000 के मजबूत सपोर्ट जोन के आसपास ही टिका रहेगा और पूरी तरह क्रैश नहीं होगा. 

Advertisement

सोने में 50 फीसदी तक गिरावट के पीछे एक्सपर्ट्स 1980 और साल 2012-13 का हवाला दे रहे हैं, हालांकि इतिहास देखें तो ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद केवल एक बार सोने की कीमत में 50% या उससे अधिक की गिरावट देखी गई है. हालांकि 20% से 30% तक भाव कई बार गिरे हैं. 

1980 की ऐतिहासिक गिरावट 
जनवरी 1980 में ईरान संकट और अफगानिस्तान पर सोवियत संघ के हमले से दुनिया भर में महंगाई चरम पर पहुंच गई थी. जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $850 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसके ठीक बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को आक्रामक रूप से बढ़ाकर करीब 20% कर दिया, फिर सोने की चमक फीकी पड़ने लगी. 1982-1985 आते-आते सोने की कीमत गिरकर $300 से $350 प्रति औंस के बीच आ गई. यह ऑल-टाइम हाई से 60% से अधिक की गिरावट थी, यानी कीमतें घटकर आधी से भी काफी कम रह गईं. 

2011 से 2015 की मंदी 
साल 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बहुत बढ़ गई, सितंबर 2011 में सोना $1,920 प्रति औंस के तत्कालीन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, फिर मंदी के बाद जैसे-जैसे अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर लौटने लगी, निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर शेयर बाजार में डालना शुरू कर दिया. जिसके बाद दिसंबर 2015 तक सोना गिरकर $1,050 प्रति औंस के निचले स्तर पर आ गया, यह इसके ऑल-टाइम हाई से करीब 45% की गिरावट थी. 

Advertisement

मौजूदा दौर की बात करें तो जनवरी 2026 में सोने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,595 प्रति औंस का नया ऑल-टाइम हाई छुआ था. लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी की आशंकाओं के चलते सोना ऊपरी स्तरों से करीब 30% गिरकर $4,000 के नीचे आ गया, और यहां से भी गिरावट का अनुमान लगाए जा रहे हैं. 

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि पिछले दो साल में सोने में जो जबरदस्त तेजी आई थी, वह जरूरत से ज्यादा थी. बाजार का एक नियम है कि जब कोई कमोडिटी अपनी वास्तविक वैल्यू से बहुत ऊपर चली जाती है, तो वह वापस अपने ऐतिहासिक औसत पर लौटती है.

भारतीय बाजार पर इसका क्या असर?
आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि भारत में सोना कभी आधा होता हुआ क्यों नहीं दिखा? इसका मुख्य कारण है अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया का कमजोर पड़ना, और भारत सरकार द्वारा सोने के आयात को कम करने के लिए लगाया जाने वाला इंपोर्ट शुल्क औक टैक्स. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 40% गिरता है, तब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने के कारण भारतीय बाजार में यह गिरावट अक्सर घटकर सिर्फ 15% से 20% ही रह जाती है, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए गिरावट का असर काफी कम हो जाता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »