भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को अपना फैसला सुनाएगा. दरअसल, मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बीच रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बीपीएस की संभावित बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है. अगर आरबीआई महंगाई और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% करता है, तो इसका सीधा असर आपके होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रिटर्न पर पड़ेगा.
होम लोन वालों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?
अगर बैंक आरबीआई की बढ़ी हुई दर का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो आपके होम लोन की ब्याज दर 0.25% बढ़ जाएगी. उदाहरण के लिए अगर आपने 25 साल की अवधि के लिए 7.50% ब्याज दर पर ₹50 लाख का होम लोन लिया है, तो फिलहाल आपकी मंथली ईएमआई करीब 36,950 रुपये है. रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद ब्याज की दर बढ़कर 7.75% हो जाएगी, जिससे आपकी EMI बढ़कर ₹37,766 मंथली हो जाएगी. यानी आपको हर महीने ₹817 ज्यादा चुकाने होंगे.
इस हिसाब से आपको एक साल में करीब ₹9,800 और 25 साल की पूरी लोन अवधि में लगभग ₹2.45 लाख अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है. रेपो रेट बढ़ते ही लोन की किस्त तुरंत नहीं बढ़ती है, बल्कि यह आपके बैंक की लोन 'रीसेट डेट' पर लागू होती है. साथ ही कुछ बैंक EMI बढ़ाने के बजाय आपके लोन की अवधि भी बढ़ा देते हैं.
वहीं अगर किसी ने 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 8 फीसदी सालाना ब्याज दर के हिसाब से लिया है, जिसकी EMI ₹41,822 रुपये है. अगर बैंक ब्याज दर बढ़ाकर 8.25 फीसदी करता है तो फिर 781 रुपये ज्यादा EMI देनी होगी.
फिक्स्ड डिपॉजिट के निवेशकों को होगा फायदा
होम लोन ग्राहकों के विपरीत बचतकर्ताओं और एफडी कराने वालों के लिए ब्याज दर बढ़ना एक अच्छी खबर है. अगर रेपो रेट बढ़ता है तो फिर और फिर बैंक एफडी की ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी करते हैं, तो नए एफडी जमाकर्ताओं को अधिक ब्याज मिलेगा.
अगर आप ₹10 लाख की 1 साल के लिए FD 7.00% की दर पर कराते हैं, तो आपको ₹70,000 का ब्याज मिलता है. लेकिन 0.25% दर बढ़कर 7.25% होने पर आपको ₹72,500 का ब्याज मिलेगा, यानी ₹2,500 का सीधा फायदा.
पुरानी FD पर असर नहीं
आपकी जो एफडी पहले से चल रही है, उसकी ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं होगा. नया रेट केवल नई FD या पुरानी FD को रिन्यू कराने पर ही लागू होगा.
अगर आप लंबी अवधि के लिए FD कराने की सोच रहे हैं, तो बैंकों द्वारा जमा दरों (Deposit Rates) में बढ़ोतरी का इंतजार करना बेहतर रणनीति हो सकती है.
आजतक बिजनेस डेस्क