वंदे भारत स्लीपर का हाई स्पीड टेस्ट! 160 Kmph पर परखा गया 'कवच सिस्टम', जानें कैसा रहा रिजल्ट

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का खास ट्रायल किया है. हजरत निजामुद्दीन-पलवल रूट पर 16 कोच वाली ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी. इस दौरान ‘कवच’ सुरक्षा सिस्टम के कम्युनिकेशन की भी जांच हुई. रेलवे के मुताबिक, ट्रायल के दौरान लोको पायलट और स्टेशन के बीच संपर्क बिना रुकावट बना रहा.

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 वंदे भारत स्लीपर को 160 किलोमीटर की स्पीड पर चलाकर कवच सेफ्टी सिस्टम का ट्रायल किया गया. (File Photo: PTI) वंदे भारत स्लीपर को 160 किलोमीटर की स्पीड पर चलाकर कवच सेफ्टी सिस्टम का ट्रायल किया गया. (File Photo: PTI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST

ट्रेन में सफर करते वक्त यात्रियों की नजर आमतौर पर रफ्तार, समय और सुविधाओं पर रहती है, लेकिन ट्रेन जितनी तेज दौड़ती है, उसकी सुरक्षा उतनी ही बड़ी चुनौती बन जाती है. खासकर तब, जब रेलवे देश में सेमी हाई स्पीड और हाई स्पीड ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी कर रहा हो. ऐसे में ट्रेन को तेज दौड़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी खतरे की स्थिति में सुरक्षा सिस्टम कितनी तेजी और भरोसे के साथ काम करता है.

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इसी कड़ी में भारतीय रेलवे ने एक अहम कदम उठाया है. हजरत निजामुद्दीन-पलवल रूट पर 16-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ाकर 'कवच' सेफ्टी सिस्टम का ट्रायल किया गया. इस दौरान खास तौर पर ट्रेन और स्टेशन के बीच कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच की गई.

करीब 50 किमी का सफर, 160 की रफ्तार

उत्तरी रेलवे ने हजरत निजामुद्दीन और पलवल के बीच यह हाई स्पीड ट्रायल किया. इस सेक्शन पर पहली बार 16-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चलाया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन 9 सितंबर को दोपहर करीब 1:38 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना हुई और 2:21 बजे पलवल पहुंची. वहां करीब 31 मिनट रुकने के बाद ट्रेन 2:52 बजे वापस चली और 3:32 बजे हजरत निजामुद्दीन लौट आई.

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इस दौरान दोनों स्टेशनों के बीच करीब 50 किलोमीटर का सफर किया गया. हालांकि पूरे रूट पर ट्रेन लगातार 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नहीं चली. फरीदाबाद मेन लाइन पर विकास कार्य चल रहा था और दोनों मेन लाइन बंद थीं. ऐसे में ट्रेन को लूप लाइन से गुजारा गया और स्टेशन पार करते समय इसकी रफ्तार कम करनी पड़ी.

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ट्रायल में कवच कम्युनिकेशन पर खास नजर

इस हाई स्पीड रन का मकसद सिर्फ वंदे भारत स्लीपर की रफ्तार परखना नहीं था. ट्रायल के दौरान कवच के कम्युनिकेशन सिस्टम को भी जांचा गया. रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे सफर के दौरान लोको पायलट और स्टेशन के बीच संपर्क सुचारू रहा. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कम्युनिकेशन में किसी तरह की रुकावट नहीं आई. तेज रफ्तार पर ट्रेन संचालन के दौरान यह व्यवस्था बेहद अहम मानी जाती है.

क्या है कवच सिस्टम, कैसे करता है काम?

कवच भारतीय रेलवे का स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है. इसका काम ट्रेन संचालन के दौरान लोको पायलट को जरूरी चेतावनी देना और खतरे की स्थिति में सुरक्षा बढ़ाना है. जरूरत पड़ने पर यह सिस्टम अपने आप ब्रेक भी लगा सकता है. कवच का मकसद सिग्नल उल्लंघन, ट्रेनों के बीच टक्कर और मानवीय गलती से जुड़े जोखिम को कम करना है. जनवरी में रेल मंत्रालय ने बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में देश में विकसित कवच सिस्टम लगाया गया है.

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आगे बड़े स्तर पर रोलआउट की है तैयारी

अधिकारियों के मुताबिक, हाई स्पीड जांच सफल रही है. नई दिल्ली-पलवल रूट पर इससे पहले करीब 30 ट्रायल किए जा चुके हैं. अब भारतीय रेलवे नेटवर्क में कवच के बड़े स्तर पर विस्तार की दिशा में काम कर रहा है. रेलवे के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि आने वाले समय में तेज रफ्तार ट्रेनों का संचालन बढ़ाने की तैयारी है. ऐसे में सिर्फ ट्रेन की स्पीड बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तकनीक को भी उतना ही मजबूत करना होगा. वंदे भारत स्लीपर का यह ट्रायल इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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