UPI पेमेंट पर कितने लोग देंगे चार्ज? NPCI सीईओ ने बता दी 'A to Z' डिटेल

UPI MDR Charge From Next Month: अगले महीने की 15 तारीख से 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू हो जाएगा. इसे लेकर NPCI CEO ने तस्वीर साफ की है.

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15 अक्टूबर से लागू होगा यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज. (Photo: Reuters) 15 अक्टूबर से लागू होगा यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

केंद्र सरकार ने 2000 रुपये से ज्‍यादा के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी का मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट यानी UPI MDR लगाया है और ये चार्ज अगले महीने 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगा. सरकार की ओर से इसके ऐलान के बाद से ही लगातार साफ किया जा रहा है कि ये 2000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर नहीं लगेगा और सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट एमडीआर लगाया है. ये फिक्स्ड 5 रुपये से लेकर अधिकतम 300 रुपये रखा गया है. 

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वित्त मंत्री भी इसे लेकर विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए तस्वीर साफ कर चुकी हैं, कि UPI Payment MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस है. यह पैसा भारत के कंसोलिडेटेड फंड में जमा नहीं होगा, बल्कि यह सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा सिस्टम को बेहतर बनाने और अच्छी सर्विस देने के लिए लगाया जाने वाला चार्ज है और सबसे खास बात ये है कि छोटे ट्रांजैक्शन के लिए तो बिल्कुल नहीं. अब इसे लेकर NPCI के MD-CEO ने 'A To Z' शेयर की है, जिससे पता चलता है कि यूपीआई पर ये चार्ज किसे देना होगा. 

एमडीआर को लाने की ये वजह
NPCI के सीईओ दिलीप असबे ने UPI पेमेंट चार्ज को लेकर कहा है कि मर्चेंट हमारे इकोसिस्टम का बहुत अहम हिस्सा हैं. इसलिए हमने पिछले 6 महीनों में MDR चार्ज तय करने के लिए काफी काम किया है. उन्होंने कहा कि, कुछ साल पहले RBI को मिले डेटा के अनुसार, उस स्तर पर UPI को चलाने की कुल लागत लगभग 21,000 करोड़ रुपये बनती है. हालांकि हम पूरी लागत वसूल नहीं कर सकते, लेकिन हमने कहा कि कम से कम उचित मात्रा में वसूली की जाए, ताकि मार्केट प्लेयर्स को दोबारा निवेश करने और UPI को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिले.'

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UPI चार्ज से पहले साल इतनी वसूली
दिलीप असबे ने ये भी बताया कि जिस दर से UPI Payment MDR लागू किया जाने वाला है, उससे कितनी अनुमानित वसूली होगी. उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि पहले साल में इकोसिस्टम से 13 से 15 हजार करोड़ रुपये वसूलना उचित होगा.

NPCI CEO के मुताबिक, यूपीआई के कुल मूल्य का 75% हिस्सा बिना किसी एमडीआर का है. उन्होंने एक कैलकुलेशन के जरिए समझाया कि अगर आप 30 लाख करोड़ रुपये को देखें, तो 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट लगभग 7 लाख करोड़ रुपये है. हमारे पास लगभग 6 करोड़ मर्चेंट हैं और इनमें से 75% मर्चेंट ने 2,000 रुपये से ज्यादा का एक भी ट्रांजैंक्शन नहीं देखा है. 

एमडीआर की ज्यादातर वसूली यहां से
नेशनल पेमेंट्स कॉरर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीईओर ने आगे बताया कि MDR का 80% उन व्यवसायों से वसूला जाता है जिनका सालाना कारोबार 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है. ये बिजनेस पहले से ही क्रेडिट कार्ड स्वीकार कर रहे हैं और पहले से ही बहुत ज्यादा शुल्क भी दे रहे हैं. अगर MRP में पहले से ही क्रेडिट कार्ड शुल्क शामिल है और उन्होंने UPI या RuPay डेबिट कार्ड पर कोई छूट नहीं दी है (जो अब तक मुफ्त रहे हैं), तो हमें लगता है कि वे ये शुल्क ग्राहकों पर नहीं डालेंगे.

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दिलीप असबे के मुताबिक, इस 80% के बाद बाकी का जो 20% बचता है, तो उसमें से मौजूद डेटा के आधार पर हमारा आकलन कहता है कि 1 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा वाले कारोबार का हिस्सा 10% हो सकता है. जबकि बाकी सिर्फ 10% शुल्क का ही असली जोखिम, जो ग्राहकों पर पड़ सकता है. इसी हिस्से पर बैंकों, NPCI और पेमेंट एग्रीगेटर्स को निगरानी की जरूरत है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना होगा कि ये शुल्क ग्राहकों पर न डाला जाए. 

क्या इस MDR का असर MF पर होगा? 
NPCI दिलीप असबे का कहना है कि म्यूचुअल फंड निवेश के लिए 50% से अधिक लेन-देन UPI से होते हैं. कैपिटल मार्केट देश की आर्थिक स्थिति की नींव हैं और स्टॉक-म्यूचुअल फंड, दोनों ही देश के लिए घरेलू निवेश के जरिए आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी हैं. सीईओ के मुताबिक, यही कारण है कि हमने अपने आकलन में काफी वाजिब चार्ज तय किए हैं और यह सबसे कम चार्ज वाली कैटेगरी में से एक है.

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