अब तक गुजरात के एकतानगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जाने वाले पर्यटकों के लिए नर्मदा नदी में क्रूज का सफर एक अलग आकर्षण रहा है. लेकिन आने वाले समय में यही नदी एक ऐसी यात्रा का रास्ता बन सकती है, जो गुजरात को मध्य प्रदेश से जोड़ देगी. अगर यह सेवा शुरू होती है, तो पर्यटकों को गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर तक नर्मदा के रास्ते यात्रा करने का नया विकल्प मिलेगा.
एकतानगर से ओंकारेश्वर तक नर्मदा पर क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी है. इस क्रूज को 597 फुट ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) से ओंकारेश्वर में 108 फुट ऊंची स्टैच्यू ऑफ वननेस (Statue of Oneness) तक ले जाने का प्रस्ताव है.
एकतानगर से ओंकारेश्वर तक नर्मदा क्रूज सेवा की योजना जरूर तैयार है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप से शुरू नहीं किया गया है. जरूरी वैधानिक और सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही क्रूज का संचालन शुरू हो सकेगा.
600 यात्रियों वाला लग्जरी क्रूज तैयार
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एरिया डेवलपमेंट एंड टूरिज्म गवर्नेंस अथॉरिटी (SOUADTGA) के एडिशनल कलेक्टर नारायण मधु के मुताबिक, 600 यात्रियों की क्षमता वाला नया लग्जरी क्रूज पहले ही एकतानगर में नर्मदा नदी पर अपनी सेवाएं दे रहा है. मंजूरी मिलने के बाद इसी क्रूज को प्रस्तावित रूट पर चलाया जा सकता है. इस क्रूज को सिर्फ आने-जाने के सफर के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन और कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. क्रूज में करीब 250 मेहमानों के लिए खाने की व्यवस्था और एक परफॉर्मेंस डेक भी है. यानी योजना सिर्फ कुछ घंटों की नदी यात्रा तक सीमित नहीं है. इसे लंबी दूरी के पर्यटन अनुभव के तौर पर विकसित करने की तैयारी है.
रास्ते में जुड़ेंगे कई नए पर्यटन स्थल
एकतानगर में पर्यटकों के लिए पहले से कई आकर्षण मौजूद हैं. अब इनके साथ कुछ नए आकर्षण भी जोड़े जा रहे हैं. इनमें डैम एक्सपीरियंस सेंटर, वाटर पार्क, फॉरेस्ट म्यूजियम और गुजरात वंदना म्यूजियम शामिल हैं. इसके अलावा म्यूजियम ऑफ ट्राइबल फ्रीडम फाइटर्स, म्यूजियम ऑफ द रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया और वीर बालक उद्यान भी विकसित किए जा रहे हैं. इन परियोजनाओं का मकसद पर्यटकों को सिर्फ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक सीमित रखने के बजाय एकतानगर में ज्यादा समय बिताने के लिए आकर्षित करना है.
हर साल 50 लाख से ज्यादा पर्यटक
करीब 56 वर्ग किलोमीटर में फैला एकतानगर लगभग 90 गांवों को कवर करता है. यहां 26 बड़े पर्यटन आकर्षण हैं और हर साल 50 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं. पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए यहां 55 इलेक्ट्रिक बसों के साथ ई-रिक्शा, ई-कार्ट और ई-बाइक जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं. इनसे कम कार्बन उत्सर्जन वाली परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. अगर नर्मदा में इंटरस्टेट क्रूज सेवा शुरू होती है, तो इससे एकतानगर के पर्यटन को गुजरात से बाहर मध्य प्रदेश तक जोड़ने का नया रास्ता भी बन सकता है.
स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार
एकतानगर में पर्यटन बढ़ने का असर स्थानीय रोजगार पर भी पड़ा है. करीब 1,800 आदिवासी महिलाओं को सीधे रोजगार मिला है, जबकि करीब 7,000 लोग अप्रत्यक्ष तौर पर पर्यटन से जुड़े काम कर रहे हैं. इनमें हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, कंस्ट्रक्शन और दूसरी पर्यटन सेवाओं से जुड़े काम शामिल हैं. नारायण मधु के मुताबिक, कई आदिवासी महिलाएं पिंक ई-रिक्शा, फूड आउटलेट और रेस्टोरेंट चला रही हैं. एकता महिला मंडल की ओर से उन्हें वित्तीय मदद और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इससे स्थानीय परिवारों के लिए खेती और पशुपालन के अलावा कमाई के दूसरे रास्ते भी बने हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क