प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को देशवासियों से एक साल तक नया सोना नहीं खरीदने की अपील की थी. दरअसल वेस्ट-एशिया में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल के कारण फॉरेक्स रिजर्व को बचाने के लिए अपील की गई थी.
इस बीच अब वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (अप्रैल से जून) में सोने की डिमांड को लेकर आंकड़े दिए गए हैं. अप्रैल-जून के दौरान सोने की कुल मांग में वजन के हिसाब से गिरावट दर्ज की गई. लेकिन इसके बावजूद देश के लोगों ने सोने की खरीदारी पर पिछले साल के मुकाबले लगभग 65,000 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए.
दरअसल, यह आंकड़ा पहली नजर में हैरान करने वाला लगता है. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान भारत में सोने की कुल खपत का वजन घटकर कम रहा. लेकिन मूल्य या वैल्यू के लिहाज से इसमें उछाल देखने को मिला, क्योंकि सोने की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान अच्छी-खासी तेजी देखने को मिली है.
सोने की मांग में गिरावट (वजन के अनुसार)
कीमतों में उछाल के कारण आम उपभोक्ताओं और ज्वेलरी प्रेमियों ने सोने की ज्वेलरी फिजिकली कम खरीदारी की है, या फिर कम वजन के आभूषण चुने. लेकिन सोने की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के कारण, भले ही लोगों ने कम वजन का सोना खरीदा. इसके बावजूद चुकाई गई कुल रकम पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 65,000 करोड़ रुपये ज्यादा रही.
भारतीयों ने चालू वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही सोने की कुल खरीदारी पर 1,65,400 करोड़ रुपये खर्च किए. इससे पहले 2025 की समान तिमाही में भारतीयों ने कुल 1,00,400 करोड़ रुपये का सोना खरीदा था. भारत में सोने की कुल मांग अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 139.7 टन से घटकर 131.4 टन हो गई.
बता दें, पिछले एक साल में भू-राजनीतिक तनावों, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. जब सोने का प्रति ग्राम भाव ऐतिहासिक ऊंचाई पर हो, तो कम मात्रा खरीदने पर भी जेब पर असर ज्यादा पड़ता है.
ज्वेलरी की जगह Gold Bar और सिक्के की मांग में उछाल
ऊंचे दामों के कारण जहां पारंपरिक गहनों की मांग में सुस्ती देखी गई, वहीं एक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने के बिस्कुट, बार (Bars) और सिक्कों की मांग मजबूत रही. निवेशकों ने मूल्य में आ रही बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए सोने में जमकर निवेश किया.
शादी-विवाह का सीजन और अक्षय तृतीया
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान अक्षय तृतीया और शादी-विवाह के अवसरों पर सोने की खरीदारी हुई. हालांकि लोगों ने भारी गहनों के बजाय हल्के वजन वाले आधुनिक डिजाइन चुने, जिससे मांग का कुल मूल्य काफी ऊंचा बना रहा.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि सोने की ऊंची कीमतें शॉर्ट टर्म में आभूषण मांग पर दबाव जरूर डाल सकती हैं. लेकिन भारत में सोने को लेकर निवेशकों का भरोसा अटूट है.
विश्लेषकों का कहना है कि आगामी त्योहारी सीजन (धनतेरस और दिवाली) और मानसून की स्थिति यह तय करेगी कि साल की दूसरी छमाही में ग्रामीण और शहरी इलाकों से सोने की मांग किस दिशा में जाती है.
आजतक बिजनेस डेस्क