मोदी सरकार 2.0 के सामने नई चुनौती, देश के करीब आधे हिस्से में सूखा पड़ने की आशंका

देश के करीब आधे राज्यों में सूखा पड़ने की चेतावनी जारी की गई है. ऐसे में नई सरकार को सूखे से प्रभावित हो सकने वाले राज्यों को तत्काल मदद करनी होगी. खासकर दक्षिण भारत के कई राज्य सूखे से प्रभावित हो रहे हैं.

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देश के कई राज्यों में सूखे की आशंका (फाइल फोटो- PTI) देश के कई राज्यों में सूखे की आशंका (फाइल फोटो- PTI)

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2019,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की दूसरी सरकार बनने जा रही है, लेकिन नई सरकार के सामने कई तरह की चुनौतियां दिख रही हैं. ऐसी ही एक बड़ी चुनौती यह है कि देश के करीब आधे राज्यों में सूखा पड़ने की चेतावनी जारी की गई है. ऐसे में नई सरकार को सूखे से प्रभावित हो सकने वाले राज्यों को तत्काल मदद करनी होगी. खासकर दक्षिण भारत के कई राज्य सूखे से प्रभावित हो रहे हैं.

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बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक आईआईटी गांधी नगर में बने सूखे के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम के द्वारा यह चेतावनी जारी की गई है कि देश के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से में सूखा पड़ सकता है और इसके करीब आधे हिस्से में गंभीर या असाधारण सूखा पड़ सकता है.

गौरतलब है कि मार्च से मई के बीच होने वाली प्री-मॉनसून बारिश इस बार करीब 22 फीसदी कम हुई है. देश के दो-तिहाई हिस्से में या तो कम या काफी कम बारिश हुई है. यह पिछले छह साल में सबसे कम प्री-मॉनसून बारिश है.

दक्ष‍िणी राज्यों में 49 फीसदी कम बारिश हुई है और यह सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. जब मॉनसून आएगा तो सामान्य बारिश से क्षेत्रीय स्तर पर पानी की कमी दूर होगी और जमीन में नमी का स्तर सुधर सकता है, लेकिन प्री-मॉनसून बारिश में कमी से ग्रामीण भारत में तो परेशानी बढ़ी ही है, इससे शहरों में भी जल संकट हो सकता है.

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इस साल मार्च से मई महीने के दौरान होने वाले प्री-मॉनसून बारिश में 22 फीसदी की गिरावट आई है. इस गिरावट से गन्ना, सब्जियों, फलों और कपास जैसे फसलों के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है.

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1 मार्च से 15 मई के बीच सिर्फ 75.9 मिली मीटर की बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 96.8 मिली मीटर मानी जाती है.

1 मार्च से 24 अप्रैल तक बारिश सामान्य से 27 फीसदी तक कम हुई. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश के आंकड़ों की वजह से यह गिरावट देखी गई.

मौसम विभाग के दक्षिण भारत स्थित ऑफिस ने प्री-मॉनसून बारिश में 46 फीसदी की कमी दर्ज की है जो देश से में सबसे ज्यादा गिरावट है. इसके बाद 1 मार्च से ही 24 अप्रैल के बीच बारिश में उत्तर-पश्चिम सब डिवीजन में सामान्य से 36 फीसदी कम और उत्तर भारत में सामान्य से 38 फीसदी की कमी देखी गई है.

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