घर खरीदते वक्त सबसे पहले अक्सर लोकेशन देखी जाती है मेट्रो कितनी दूर है, स्कूल-कॉलेज पास हैं या बाजार कितनी दूरी पर है, लेकिन सिर्फ अच्छी लोकेशन किसी प्रॉपर्टी को अच्छा निवेश या सुरक्षित घर नहीं बनाती. प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति, RERA रिकॉर्ड, बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड, कुल खर्च और भविष्य की सुविधाएं भी उतनी ही अहम हैं. घर खरीदने से पहले इन 5 चीजों की जांच आपको महंगी गलती से बचा सकती है.
किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को खरीदने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें. Real Estate Act, 2016 के तहत संबंधित प्रोजेक्ट के लिए RERA में रजिस्ट्रेशन जरूरी है, हालांकि कानून में कुछ छूट भी दी गई हैं. सिर्फ विज्ञापन में दिए गए RERA नंबर पर भरोसा न करें. संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट का रिकॉर्ड देखें. वहां प्रोजेक्ट की स्थिति, प्रमोटर से जुड़ी जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों को क्रॉस-चेक किया जा सकता है.
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जमीन और प्रोजेक्ट के कागज सिर्फ देखकर संतुष्ट न हों
प्रॉपर्टी खरीदने में सबसे बड़ा जोखिम सिर्फ कीमत का नहीं, टाइटल और दस्तावेजों का भी होता है, इसलिए जमीन का मालिक कौन है, उस पर कोई कर्ज या कानूनी दावा तो नहीं है और जरूरी अप्रूवल मौजूद हैं या नहीं इनकी जांच जरूरी है.
भारतीय रिजर्व बैंक की होम लोन संबंधी गाइडलाइन के मुताबिक, पुराने या दोबारा बिक रहे घर को खरीदते समय संपत्ति का स्पष्ट मालिकाना हक, भार प्रमाणपत्र और अपडेटेड प्रॉपर्टी टैक्स दस्तावेज जरूर जांचने चाहिए. बैंक भी होम लोन मंजूर करने से पहले संपत्ति से जुड़े कानूनी दस्तावेजों की जांच करते हैं.
इसलिए केवल बिल्डर या प्रॉपर्टी ब्रोकर की ओर से दिए गए दस्तावेजों पर भरोसा करने के बजाय संपत्ति के वकील से टाइटल और सभी जरूरी दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच करवाना ज्यादा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम है.
बिल्डर का नाम नहीं, उसका पिछला रिकॉर्ड देखें
बड़े ब्रांड का नाम देखकर प्रॉपर्टी खरीद लेना पर्याप्त नहीं है. यह देखना जरूरी है कि बिल्डर ने पहले जो प्रोजेक्ट बनाए हैं, उनका डिलीवरी रिकॉर्ड कैसा रहा है. पिछले प्रोजेक्ट में पजेशन वक्त पर मिला या नहीं, क्वालिटी सही है या नहीं, खरीदारों की कोई शिकायत तो नहीं है. एक बिल्डर का अच्छा मार्केटिंग कैंपेन भविष्य की डिलीवरी की गारंटी नहीं है, इसलिए कम से कम उसके 2-3 पुराने प्रोजेक्टों को जाकर देखना और वहां रहने वाले लोगों से बात करना उपयोगी हो सकता है.
सिर्फ घर की कीमत नहीं, पूरी लागत निकालें
₹80 लाख का फ्लैट जरूरी नहीं कि आपको वास्तव में ₹80 लाख में ही पड़े. घर खरीदते समय बेस कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, जहां लागू हो वहां जीएसटी, पार्किंग शुल्क, क्लब या अन्य सुविधाओं के शुल्क, मेंटेनेंस जमा, ब्रोकरेज और इंटीरियर जैसे कई खर्च भी जुड़ सकते हैं.
अगर आप होम लोन लेते हैं तो लोन प्रोसेसिंग शुल्क, दस्तावेजीकरण शुल्क और अन्य संबंधित शुल्क भी देने पड़ सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की उपभोक्ता गाइडलाइन के मुताबिक, घर खरीदने वालों को केवल ईएमआई या ब्याज दर पर ध्यान देने के बजाय लोन की पूरी लागत, शुल्क, डाउन पेमेंट और अन्य खर्चों की तुलना करनी चाहिए. इसलिए घर खरीदने से पहले सिर्फ संपत्ति की कीमत नहीं, बल्कि उससे जुड़े सभी अतिरिक्त खर्चों को जोड़कर कुल लागत का हिसाब लगाना जरूरी है. यही आपकी वास्तविक खरीद लागत होगी.
आज की लोकेशन नहीं, अगले 5-10 साल की जरूरत देखें
लोकेशन महत्वपूर्ण है, लेकिन सिर्फ यह देखना कि आज वहां मेट्रो या बाजार कितनी दूर है, पर्याप्त नहीं है, यह भी देखें कि अगले कुछ वर्षों में इलाके में क्या बदलने वाला है मसलन, नई मेट्रो या एक्सप्रेसवे की योजना, रोजगार के नए केंद्र, स्कूल और अस्पताल, आसपास आने वाले नए प्रोजेक्ट, पानी और बिजली की उपलब्धता, सड़क और ड्रेनेज व्यवस्था, ट्रैफिक और प्रदूषण
और इलाके में बाढ़ या जलभराव का जोखिम.
लोन जितना मिल रहा है, उतना लेना जरूरी नहीं
बैंक जितना होम लोन देने के लिए तैयार है, जरूरी नहीं कि उतना लोन लेना आपके लिए सही हो. EMI आपकी मासिक आय और दूसरे खर्चों के मुकाबले आरामदायक होनी चाहिए.
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