देश के प्रमुख रियल एस्टेट बाजार में एक बार फिर तेजी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान देश के सात बड़े शहरों में एक लाख से अधिक घरों की बिक्री हुई. हालांकि, इस दौरान नए घरों की लॉन्चिंग और बाजार में उपलब्ध मकानों की संख्या भी बढ़ी है. ऐसे में रियल एस्टेट बाजार के सामने मांग और सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है. घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह स्थिति एक तरफ ज्यादा विकल्प दे रही है, तो दूसरी ओर लगातार बढ़ती कीमतें बजट पर दबाव भी डाल रही हैं.
प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ANAROCK की Q3 2026 Residential Market Viewpoints रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सात प्रमुख शहरों में तीसरी तिमाही के दौरान करीब 1,00,200 घर बिके. यह आंकड़ा पिछली तिमाही के मुकाबले 10% और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3% अधिक है. इस दौरान घरों की कुल बिक्री का मूल्य लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये रहा.
खरीदारों की वापसी से बढ़ी घरों की बिक्री
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में जिन लोगों ने घर खरीदने का फैसला टाल दिया था, उनमें से कई खरीदार तीसरी तिमाही में दोबारा बाजार में लौटे. इससे सातों प्रमुख शहरों में बिक्री को गति मिली. हालांकि, सालाना आधार पर बिक्री में केवल 3% की बढ़ोतरी बताती है कि बाजार में सुधार तो हो रहा है, लेकिन अभी इसे बड़ी तेजी कहना जल्दबाजी होगी.
अफोर्डेबल घरों की सप्लाई में भी बढ़ोतरी
तीसरी तिमाही में बिल्डरों ने नए घरों की लॉन्चिंग भी बढ़ाई, इस दौरान करीब 1,14,300 नए घर बाजार में उतारे गए, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 18% अधिक हैं. इस बार नए घरों की कीमतों के मामले में भी बदलाव देखने को मिला. 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी बढ़कर 14% हो गई, जबकि एक साल पहले यह इससे काफी कम थी. वहीं, 2.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी 22% से घटकर 14% रह गई.
इस बदलाव से संकेत मिलता है कि डेवलपर्स अब प्रीमियम प्रॉपर्टी के साथ कम बजट वाले खरीदारों को भी ध्यान में रख रहे हैं. हालांकि, इन घरों की वास्तविक उपलब्धता और लोकेशन के आधार पर ही तय होगा कि आम खरीदारों को इसका कितना फायदा मिलेगा.
घर खरीदना हुआ महंगा, कीमतों में 7% की बढ़ोतरी
नए घरों की सप्लाई बढ़ने के बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतों में नरमी नहीं आई है. ANAROCK के अनुसार, सात प्रमुख शहरों में घरों की औसत कीमत 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई. पिछले साल की तुलना में इसमें 7% और पिछली तिमाही के मुकाबले 1% की बढ़ोतरी हुई है.
इसका मतलब है कि खरीदारों को पहले के मुकाबले ज्यादा विकल्प तो मिल रहे हैं, लेकिन घर खरीदने की लागत भी बढ़ रही है. ऐसे में खरीदारों को केवल विज्ञापन में दिखाई गई कीमत के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए. रजिस्ट्रेशन, टैक्स, इंटीरियर और होम लोन के ब्याज जैसे खर्चों को भी बजट में शामिल करना जरूरी है.
बढ़ रहा है बिना बिके घरों का स्टॉक, हैदराबाद में सबसे ज्यादा दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, सातों शहरों में बिक्री के लिए उपलब्ध घरों की संख्या सालाना आधार पर 12% बढ़कर करीब 6,30,600 यूनिट हो गई है. हालांकि, कुल इन्वेंट्री ओवरहैंग करीब 19 महीने पर बना हुआ है. इसका मतलब है कि मौजूदा बिक्री की रफ्तार जारी रहने पर उपलब्ध घरों के स्टॉक को बेचने में लगभग 19 महीने लग सकते हैं.
हैदराबाद इस मामले में सबसे अलग नजर आ रहा है. यहां इन्वेंट्री ओवरहैंग 28 महीने है. यानी मौजूदा रफ्तार से यहां उपलब्ध घरों को बिकने में करीब 28 महीने लग सकते हैं. यह स्थिति बताती है कि शहर में नए घरों की सप्लाई के मुकाबले बिक्री की रफ्तार पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.
हालांकि, ज्यादा इन्वेंट्री का मतलब यह नहीं है कि हर प्रोजेक्ट की कीमत घट जाएगी, लेकिन ऐसे बाजारों में खरीदारों के पास अलग-अलग प्रोजेक्ट की कीमतों और सुविधाओं की तुलना करने के साथ बिल्डर से बेहतर डील पर बातचीत करने का मौका हो सकता है.
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