एक तरफ ऊंची-ऊंची गगनचुंबी इमारतें, बड़ी-बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों के चमकते दफ्तर और देश भर से आकर बसे लाखों लोगों के सपने... दूसरी तरफ चंद घंटों की बारिश और उसके बाद तालाब बनी सड़कें, घंटों लंबा ट्रैफिक जाम और गाड़ियों में लाचार बैठे लोग. यह किसी पिछड़े कस्बे की कहानी नहीं, बल्कि देश के तथाकथित सुपर-स्मार्ट शहर 'गुरुग्राम' की हर मानसून की कड़वी हकीकत है.
एक बार फिर बारिश ने मिलेनियम सिटी की पानी में डूबी सड़कों ने नगर निगम और प्रशासन के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है.
गुरुग्राम में घर खरीदना किसी इंसान के लिए जिंदगी भर की जमापूंजी लगा देने जैसा है. गोल्फ कोर्स रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में लोग करोड़ों रुपये खर्च करके लग्जरी अपार्टमेंट खरीदते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश आती है, करोड़ों के इन लग्जरी सोसायटियों के बाहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं.
लाखों-करोड़ों के घर में रहने वाले लोग शाम को दफ्तर से निकलकर अपनी चमचमाती गाड़ियों में सिसकते नजर आते हैं. 2 किलोमीटर का सफर तय करने में 3 से 4 घंटे लग रहे हैं. सड़कों पर रेंगती गाड़ियां और बंद पड़े इंजन इस बात की गवाही देते हैं कि गुरुग्राम का इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ कागजों और विज्ञापनों में ही चमकदार है.
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
जैसे ही शहर में पानी भरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X/ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन) पर लोगों का गुस्सा उबल पड़ा. कई लोगों ने जलभराव वाली सड़कों के वीडियो शेयर करते हुए लिखा—"लाखों का टैक्स देने के बाद हमें मिला यह वॉटर पार्क!"
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- पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण सेक्टर-70ए स्थित बीपीटीपी एस्टेयर गार्डन कॉलोनी में आधे से एक फीट तक पानी।
- घरों में कैद होने को मजबूर लोग। @OfficialGMDA@csharyana @cmohry @NayabSainiBJP pic.twitter.com/J8hqvOWZGM
विकास की दौड़ में पीछे छूटा ड्रेनेज सिस्टम
गुरुग्राम में हर साल नए-नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, नई कमर्शियल इमारतें खड़ी हो रही हैं और विदेशी निवेशक आ रहे हैं, लेकिन जिस रफ्तार से कंक्रीट का जंगल खड़ा किया गया, उस रफ्तार से प्राकृतिक नाले और जल निकासी की व्यवस्था नहीं बनाई गई.
विशेषज्ञों और सिविक रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुग्राम के पारंपरिक प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, नतीजा यह है कि थोड़ा सा पानी भी सड़कों पर जमा हो जाता है.
देश भर से लोग रोजगार और बेहतर जीवनशैली की तलाश में गुरुग्राम आते हैं, लेकिन हर बारिश में 4-5 घंटे ट्रैफिक में फंसे रहने के बाद लोग यही सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या इतने महंगे शहर में रहने की यही कीमत है?
शहर के बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन पर हर साल करोड़ों का बजट खर्च होता है, लेकिन मानसून की पहली ही बारिश प्रशासन के दावों को बहा ले जाती है। जब तक गुरुग्राम के ड्रेनेज सिस्टम का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक 'मिलेनियम सिटी' का यह कड़वा सच हर बारिश में यूं ही सामने ने आता रहेगा.
क्यों है गुरुग्राम का ये हाल?
आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में अर्बन प्लानर और आर्किटेक्ट डॉ.सुप्तेंदु पी बिश्वास ने बताया कि ' गुरुग्राम में विकास पहले होता है और अर्बन प्लानिंग बाद में. बिल्डरों ने हाईराइज इमारतें तो बना दीं , लेकिन उनसे निकलने वाले सीवेज और बारिश के पानी की निकासी की कोई सही योजना तक नहीं तैयार की, जब बिना किसी मास्टर प्लान के शहरों की प्लानिंग होती है तो गुरुग्राम जैसा डरावना रिजल्ट सामने आता है. '
अर्बन प्लानिंग का अर्थ सिर्फ गगनचुंबी इमारतें खड़ी करना या चमचमाते एक्सप्रेसवे बनाना भर नहीं है, इसका असली और प्राथमिक उद्देश्य बुनियादी संसाधनों का निष्पक्ष और संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है. सुव्यवस्थित नियोजन का मूल ढांचा इस बात पर टिका होता है कि आने वाले 20-30 वर्षों में शहर का स्वरूप कैसा होगा, इसमें भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, रिहायशी इलाके, रोजगार के केंद्र, सार्वजनिक मनोरंजन के स्थल और सड़कों की क्षमता के साथ वाहनों के संतुलन का सटीक आकलन किया जाता है. संक्षेप में कहें तो, अर्बन प्लानिंग का अंतिम लक्ष्य किसी भी शहर में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को आसान, सुरक्षित और बेहतर बनाना है.
सुप्तेंदु पी. बिश्वास का मानना है कि चार-पांच दशक पहले तक गुरुग्राम में जलभराव जैसी स्थिति कभी पैदा नहीं होती थी, उस समय शहर का प्राकृतिक ड्रेनेज नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय था, अरावली की पहाड़ियों से बहकर आने वाला बारिश का पानी जमीन की स्वाभाविक ढलान के साथ जोहड़ों, तालाबों और कुदरती नालों से होता हुआ आसानी से बाहर निकल जाता था. हालांकि, आधुनिकता और बेतरतीब निर्माण की होड़ में हमने इन प्राकृतिक जल स्रोतों और रास्तों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिसके गंभीर परिणाम आज पूरा शहर भुगत रहा है.
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