केंद्र सरकार ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने और उन्हें नियमित करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है. सरकार ने दिल्ली की कुल 1,731 में से 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित करने का निर्णय लिया है. इसके तहत भूखंडों और मकानों का उपयोग पूरी तरह से आवासीय माना जाएगा, जिससे लाखों निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी.
अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने 'स्वगम' (SWAGAM) नाम से एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है. यह पोर्टल उन संपत्ति मालिकों के लिए बनाया गया है, जो 'पीएम उदय' (PM UDAY) योजना के तहत पहले ही अपने स्वामित्व के अधिकार हासिल कर चुके हैं. अब वे इस पोर्टल के जरिए अपनी संपत्ति को आधिकारिक रूप से नियमित करवाने के लिए अगला कदम उठा सकते हैं.
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स्वगम पोर्टल का लाभ कौन उठा सकता है?
यह सुविधा केवल 1,511 पात्र कॉलोनियों के उन निवासियों के लिए है, जिनके पास पीएम उदय केस आईडी (PM UDAY Case ID) उपलब्ध है. विशेष रूप से वे लोग इस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं, जिन्हें पीएम उदय के तहत कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप जारी की जा चुकी है.
सबसे पहले निवासी को पोर्टल पर जाकर अपनी कॉलोनी का चयन करना होगा, जिसके बाद वार्ड और ज़ोन का विवरण अपने आप दर्ज हो जाएगा, इसके बाद आवेदक को अपना पीएम उदय केस आईडी दर्ज करना होगा. यदि कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप पहले ही मिल चुकी है, तो आगे की नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.
जिन लोगों का मामला अभी लंबित है, पोर्टल उन्हें सीधे पीएम उदय की वेबसाइट का लिंक देता है ताकि वे अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकें.
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कन्वेयंस डीड और ऑथराइजेशन स्लिप में क्या अंतर है?
पीएम उदय योजना के तहत निवासियों को उनके पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA), सेल एग्रीमेंट और कब्जा रिकॉर्ड के आधार पर मालिकाना हक का दस्तावेज दिया जाता है. अगर संपत्ति सरकारी जमीन पर बनी है, तो सरकार इसके लिए कन्वेयंस डीड जारी करती है. वहीं अगर संपत्ति निजी जमीन पर स्थित है, तो इसके लिए ऑथराइजेशन स्लिप दी जाती है. 31 मार्च, 2026 तक ऐसे लगभग 40,000 दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं.
इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए पहले से स्वीकृत लेआउट प्लान (Approved Layout Plan) की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. यानी अब बनी-बनाई संपत्तियों को बिना किसी पेचीदा लेआउट मंजूरी के नियमित किया जाएगा. इससे सालों से अपने मकानों के कानूनी दर्जा मिलने का इंतजार कर रहे लोगों को बड़ी राहत और सुरक्षा मिलेगी.
दूसरे चरण में यह दस्तावेज़ मिलने के बाद MCD के 'स्वगम' पोर्टल पर आवेदन करें, जिसके बाद नगर निगम द्वारा आपको औपचारिक नियमितीकरण प्रमाण पत्र (Regularisation Certificate) जारी कर दिया जाएगा.
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